Vijay Astrologer Controversy: तमिलनाडु में ‘ज्योतिष राजनीति’ पर घमासान, विजय सरकार की नियुक्ति से सहयोगी दल नाराज

Vijay Astrologer Controversy: तमिलनाडु की राजनीति में एक नई बहस ने जोर पकड़ लिया है। मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की सरकार द्वारा एक ज्योतिषी को राजनीतिक सलाहकार के रूप में नियुक्त किए जाने के बाद सत्ता के गलियारों में विवाद गहरा गया है। खास बात यह है कि इस फैसले पर विपक्ष ही नहीं, बल्कि सरकार को बाहर से समर्थन दे रही CPI(M) ने भी तीखी आपत्ति दर्ज कराई है।

दरअसल, मुख्यमंत्री विजय ने राधन पंडित वेट्रिवेल को ‘ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (Political)’ यानी OSD-Political नियुक्त किया है। वेट्रिवेल को तमिलनाडु में एक प्रसिद्ध ज्योतिषी के तौर पर जाना जाता है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी रही कि उन्होंने पहले ही TVK की चुनावी सफलता की भविष्यवाणी की थी। अब उनकी सरकारी नियुक्ति ने राजनीतिक और वैचारिक बहस को जन्म दे दिया है।

CPI(M) ने उठाए वैज्ञानिक सोच पर सवाल

विजय सरकार को बाहर से समर्थन देने वाली CPI(M) ने इस फैसले को लेकर खुलकर नाराजगी जाहिर की है। पार्टी के तमिलनाडु सचिव पी. षणमुगम ने कहा कि लोकतांत्रिक सरकारों में नियुक्तियां योग्यता, प्रशासनिक अनुभव और क्षमता के आधार पर होनी चाहिए, न कि किसी ज्योतिषीय पहचान के आधार पर।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के फैसले समाज में अंधविश्वास को बढ़ावा देते हैं और वैज्ञानिक सोच को कमजोर करते हैं। CPI(M) ने यह भी कहा कि तमिलनाडु लंबे समय से तर्कवादी राजनीति और सामाजिक सुधार आंदोलनों की भूमि रहा है, ऐसे में सरकार का यह कदम राज्य की वैचारिक पहचान के खिलाफ माना जा सकता है।

विपक्ष को मिला नया मुद्दा

इस विवाद ने विपक्षी दलों को भी सरकार पर हमला करने का मौका दे दिया है। विपक्ष का कहना है कि सरकार प्रशासनिक मजबूती की बजाय निजी विश्वास और प्रतीकात्मक राजनीति को प्राथमिकता दे रही है। कई नेताओं ने सवाल उठाया कि क्या अब सरकारी पदों के लिए विशेषज्ञता की जगह भविष्यवाणियां अहम होंगी?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक नियुक्ति तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में इसे ‘वैज्ञानिक सोच बनाम आस्था आधारित राजनीति’ के रूप में भी देखा जा सकता है। खासकर तब, जब तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से द्रविड़ विचारधारा और तर्कवादी आंदोलन से प्रभावित रही है।

TVK की चुप्पी ने बढ़ाई चर्चा

विवाद बढ़ने के बावजूद TVK की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पार्टी के कई नेता इस मुद्दे पर खुलकर बोलने से बच रहे हैं। हालांकि, अंदरखाने यह चर्चा जरूर है कि विजय अपने करीबी और भरोसेमंद लोगों को प्रशासन में अहम जिम्मेदारी देना चाहते हैं।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि विजय की राजनीति अभी शुरुआती दौर में है और ऐसे फैसले उनकी छवि पर बड़ा असर डाल सकते हैं। एक ओर समर्थक इसे व्यक्तिगत भरोसे का मामला बता रहे हैं, वहीं आलोचक इसे प्रशासनिक व्यवस्था में अंधविश्वास की एंट्री मान रहे हैं।

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क्या बढ़ेगा सहयोगी दलों का दबाव?

CPI(M) की नाराजगी आने वाले समय में सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकती है। हालांकि फिलहाल समर्थन वापसी जैसी कोई स्थिति नहीं दिख रही, लेकिन यह विवाद सहयोगी दलों और TVK के रिश्तों में तनाव जरूर बढ़ा सकता है।

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अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि मुख्यमंत्री विजय इस विवाद पर सफाई देते हैं या फिर अपनी नियुक्ति के फैसले पर कायम रहते हैं। फिलहाल तमिलनाडु की राजनीति में यह मुद्दा चर्चा का बड़ा केंद्र बन चुका है।

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