Constitution Day Democracy: रोहतक। लोकतंत्र की मजबूती और संविधान के प्रति जनजागरण के उद्देश्य से रोहतक में आयोजित संविधान हत्या दिवस कार्यक्रम में आपातकाल के दौर को याद करते हुए लोकतंत्र सेनानियों के योगदान को सम्मान दिया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं को याद रखना केवल अतीत को दोहराना नहीं, बल्कि भविष्य को अधिक सशक्त और जागरूक बनाने का माध्यम भी है।
महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के टैगोर सभागार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि 25 जून 1975 भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास का ऐसा अध्याय है, जिसने नागरिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनावों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिक अधिकारों, स्वतंत्र अभिव्यक्ति और संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान से संचालित होता है।
नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने की जरूरत
शेखावत ने कहा कि वर्तमान पीढ़ी का बड़ा हिस्सा आपातकाल के दौर का प्रत्यक्ष साक्षी नहीं रहा है। ऐसे में उस समय की परिस्थितियों और लोकतांत्रिक संघर्षों की जानकारी युवाओं तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए यह आवश्यक है कि समाज अपने इतिहास से सीख लेकर भविष्य के प्रति अधिक सजग बने।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत की लोकतांत्रिक परंपराएं अत्यंत प्राचीन रही हैं। वैदिक काल की सभा और समिति जैसी संस्थाएं इस बात का प्रमाण हैं कि सामूहिक निर्णय और जनभागीदारी भारतीय संस्कृति की मूल पहचान रही है।

लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को किया याद
कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता ने लोकतंत्र सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में उनके संघर्ष और त्याग ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए किए गए प्रयासों को हमेशा याद रखा जाएगा।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि संविधान हत्या दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि लोकतंत्र, संविधान और नागरिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर भी है। उन्होंने युवाओं से तथ्य आधारित सोच विकसित करने और सामाजिक व राजनीतिक विषयों पर जागरूक दृष्टिकोण अपनाने की अपील की।
लोकतंत्र की सुरक्षा में जागरूक नागरिकों की भूमिका अहम
भाजपा के राष्ट्रीय सचिव ओमप्रकाश धनखड़ ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की वास्तविक ताकत उसके जागरूक नागरिक होते हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास की घटनाएं समाज को दिशा देने का काम करती हैं और लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए इन अनुभवों को संजोकर रखना आवश्यक है।
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धनखड़ ने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। संविधान हत्या दिवस इसी चेतना को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है।
रोहतक के संघर्षपूर्ण इतिहास का भी हुआ उल्लेख
कार्यक्रम संयोजक एवं राज्यसभा सांसद संजय भाटिया ने कहा कि देश की बड़ी आबादी ने आपातकाल का दौर नहीं देखा है। इसलिए लोकतंत्र सेनानियों की गाथाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की मांग है। वहीं पूर्व मंत्री मनीष कुमार ग्रोवर ने कहा कि आपातकाल के दौरान रोहतक लोकतांत्रिक संघर्ष का महत्वपूर्ण केंद्र रहा और यहां से कई लोगों ने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाई।
कार्यक्रम के दौरान लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित किया गया और संविधान तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के प्रति सामूहिक संकल्प भी व्यक्त किया गया। अंत में भाजपा जिला अध्यक्ष रणवीर ढाका ने सभी अतिथियों, लोकतंत्र सेनानियों और उपस्थित नागरिकों का आभार व्यक्त किया।

