सूरजकुंड मेला हादसा: झूला दुर्घटना पर सियासत से संवेदना तक, शहीद इंस्पेक्टर जगदीश को नमन

Surajkund Mela Accident: मुख्यमंत्री सैनी का मानवीय फैसला, मुआवजा और नौकरी का ऐलान

फरीदाबाद के 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले में शनिवार शाम हुए झूला हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। यह घटना अब केवल एक तकनीकी दुर्घटना (Surajkund Mela Accident) नहीं रह गई, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही, सुरक्षा मानकों और पर्यटन नीति पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। इस हादसे में कर्तव्य निभाते हुए शहीद हुए पुलिस निरीक्षक जगदीश प्रसाद की शहादत ने पूरे प्रदेश को भावुक कर दिया।

पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला की उच्चस्तरीय जांच की मांग

पूर्व उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ जेजेपी नेता दुष्यंत चौटाला ने इस हादसे को हरियाणा की अंतरराष्ट्रीय छवि पर धब्बा बताया है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
दुष्यंत चौटाला ने कहा कि विश्व प्रसिद्ध सूरजकुंड मेला संस्कृति और हस्तशिल्प का मंच रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में इसे केवल कमाई का जरिया बना दिया गया है।

पर्यटन विभाग पर सीधे आरोप, नीति बदलने की जरूरत

दुष्यंत चौटाला ने हरियाणा पर्यटन विभाग को हादसे का जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि एडवेंचर और मनोरंजन के नाम पर असुरक्षित झूलों को अनुमति दी जा रही है।
उनका कहना है कि ये झूले न सिर्फ जानलेवा साबित हो रहे हैं, बल्कि मेले की मूल पहचान—पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों—से भी ध्यान भटका रहे हैं। उन्होंने ऐसी नीति को तुरंत खत्म करने की मांग की।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का संवेदनशील रुख

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए शहीद निरीक्षक जगदीश के परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की। उन्होंने घोषणा की कि मृतक के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी, ताकि परिवार की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
इसके साथ ही हादसे में घायल सभी लोगों को एक-एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया गया।

घायलों का इलाज जारी, स्थिति स्थिर

हादसे में कुल 8 लोग घायल हुए थे, जिनमें से 4 को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है, जबकि 4 का इलाज अभी अस्पताल में जारी है। प्रशासन की ओर से घायलों को हरसंभव चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

कर्तव्य निभाते हुए शहीद हुए इंस्पेक्टर जगदीश

शनिवार शाम करीब 6 बजे तकनीकी खराबी के चलते एक झूला अचानक टूटकर गिर गया। उस समय ड्यूटी पर तैनात निरीक्षक जगदीश प्रसाद ने बिना अपनी जान की परवाह किए तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।
लोगों को सुरक्षित निकालते समय वे गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। उनका यह बलिदान पुलिस सेवा के लिए मिसाल बन गया है।

डीजीपी अजय सिंघल का बयान

हरियाणा के पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि निरीक्षक जगदीश ने असाधारण साहस और मानवता का परिचय दिया।
डीजीपी ने बताया कि विभागीय नीति के तहत उनके परिजनों को 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता, सरकारी नौकरी और सभी अन्य लाभ प्रदान किए जाएंगे।

कौन थे शहीद जगदीश

शहीद निरीक्षक जगदीश मूल रूप से मथुरा (उत्तर प्रदेश) के निवासी थे। उनका जन्म 5 मार्च 1968 को हुआ था। वे 31 जनवरी 2026 को पुलिस लाइन पलवल से सूरजकुंड मेला ड्यूटी पर तैनात किए गए थे। वे अपने अनुशासन, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के लिए जाने जाते थे।

हादसे से सबक या फिर दोहराव?

सूरजकुंड जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन में हुई यह घटना प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी है। अब सवाल यह है कि क्या इस हादसे के बाद सुरक्षा मानकों और नीतियों में ठोस बदलाव होंगे या फिर यह मामला भी समय के साथ फाइलों में दब जाएगा।

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