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‘राजनीति ऐशो-आराम नहीं, तपस्या है’—अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार बोले नितिन नबीन, कार्यकर्ताओं को दिया बड़ा संदेश

भारतीय राजनीति में नेतृत्व बदलते ही संदेश भी बदलता है। भारतीय जनता पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने कार्यभार संभालने के बाद अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में राजनीति को लेकर एक स्पष्ट और सख्त दृष्टिकोण रखा।

Nitin Nabin first speech: भारतीय राजनीति में नेतृत्व बदलते ही संदेश भी बदलता है। भारतीय जनता पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने कार्यभार संभालने के बाद अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में राजनीति को लेकर एक स्पष्ट और सख्त दृष्टिकोण रखा। उन्होंने कहा कि राजनीति कोई ऐशो-आराम या सत्ता भोग का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा की तपस्या है।

अपने संबोधन में नितिन नबीन ने कार्यकर्ताओं, युवाओं और संगठन के पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए भाजपा की विचारधारा, संगठनात्मक अनुशासन और आने वाले राजनीतिक लक्ष्यों पर खुलकर बात की।

“सत्ता भोग नहीं, सेवा का माध्यम है”

नितिन नबीन ने कहा,

“हम ऐसे दल के सिपाही हैं, जहां राजनीति भोग-विलास या सुविधा के लिए नहीं, बल्कि त्याग, अनुशासन और तपस्या के लिए की जाती है। हमारे लिए हर पद एक जिम्मेदारी है, न कि विशेषाधिकार।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा में पद का अर्थ केवल शक्ति नहीं, बल्कि जनता, समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे सत्ता को लक्ष्य न मानें, बल्कि सेवा को अपना मूल मंत्र बनाएं।

भाजपा की विचारधारा ही उसकी सबसे बड़ी ताकत

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक विचार-आधारित आंदोलन है, जिसकी जड़ें राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक समरसता में हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी की ताकत उसके करोड़ों समर्पित कार्यकर्ता हैं, जो बिना किसी निजी स्वार्थ के संगठन के लिए काम करते हैं।

“हमारी राजनीति सत्ता के इर्द-गिर्द नहीं, समाज के चारों ओर घूमती है।”

आगामी विधानसभा चुनावों पर फोकस

अपने संबोधन में नितिन नबीन ने पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों का भी जिक्र किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे—

  • बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करें
  • जनसंवाद बढ़ाएं
  • सरकार की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाएं

उन्होंने कहा कि चुनाव केवल जीत-हार का माध्यम नहीं, बल्कि जनता से जुड़ने और भरोसा मजबूत करने का अवसर होते हैं।

सनातन परंपराओं और राष्ट्रीय चेतना की रक्षा का संकल्प

नितिन नबीन ने अपने भाषण में सांस्कृतिक मुद्दों को भी प्रमुखता दी। उन्होंने कहा कि भाजपा का दायित्व केवल शासन करना नहीं, बल्कि

  • सनातन परंपराओं की रक्षा
  • सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण
  • और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करना

भी है। उन्होंने यह भी कहा कि देश को किसी भी प्रकार के जनसांख्यिकीय असंतुलन से बचाना समय की मांग है।

युवाओं को राजनीति से जुड़ने का आह्वान

नव नियुक्त अध्यक्ष ने देश के युवाओं से विशेष रूप से अपील की। उन्होंने 15 अगस्त 2025 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए गए उस संदेश का उल्लेख किया, जिसमें युवाओं से सार्वजनिक जीवन में आने का आह्वान किया गया था।

नितिन नबीन ने कहा,

“राजनीति से दूरी समाधान नहीं है। अगर देश को सही दिशा देनी है, तो युवाओं को आगे आना होगा और सक्रिय योगदान देना होगा।”

उन्होंने कहा कि भाजपा युवाओं को नेतृत्व, प्रशिक्षण और अवसर देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

अनुशासन और संगठन सर्वोपरि

अपने पहले संबोधन में नितिन नबीन ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके नेतृत्व में संगठनात्मक अनुशासन, पारदर्शिता और सामूहिक निर्णय प्रक्रिया को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि भाजपा की सबसे बड़ी पहचान यह है कि यहां व्यक्ति नहीं, विचार महत्वपूर्ण होता है और यही परंपरा आगे भी कायम रहेगी।

नए अध्यक्ष, नया संकल्प

नितिन नबीन का यह पहला संबोधन साफ संकेत देता है कि वे संगठन को

  • वैचारिक रूप से मजबूत
  • युवाओं से जोड़ने वाला
  • और चुनावी तौर पर आक्रामक

बनाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। उनका यह संदेश न केवल कार्यकर्ताओं के लिए, बल्कि देश की राजनीति में प्रवेश करने वाले युवाओं के लिए भी एक स्पष्ट दिशा रेखा खींचता है।

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