उत्तराखंडराज्य

उत्तराखंड में फटा बादल, भारी तबाही से मचा हाहाकार; मलबे में दबी कई इमारतें, कई लोग बेघर

Cloud burst in Uttarkashi: नौगांव में बादल फटने से मचा हाहाकार

Cloud burst in Uttarkashi: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में भारी बारिश के बाद अचानक बादल फटने की घटना सामने आई है। नौगांव के स्योरी फल पट्टी में बादल फटने से भारी तबाही मची है। अचानक आई बाढ़ से रिहायशी इलाकों में मलबा भर गया, जिससे सड़कें और खेत पूरी तरह से जलमग्न हो गए। इस घटना में एक आवासीय भवन मलबे में दब गया, वहीं आधा दर्जन से अधिक इमारतें पानी में डूब गईं। प्रशासन और एसडीआरएफ की टीमें तुरंत मौके पर पहुंची और राहत व बचाव कार्य में जुट गईं। इस आपदा में जान-माल के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

कई इमारतें और वाहन मलबे में दबे

नौगांव बाजार के देवलसारी गदेरे (पहाड़ी नाला) में आए मलबे के साथ एक मिक्सर मशीन और कई दुपहिया वाहन भी बह गए। एक कार भी मलबे में दब गई है। खतरे को देखते हुए, स्थानीय लोगों ने अपने घर खाली कर दिए हैं और सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं। पहले मिली जानकारी में इसे सिर्फ अतिवृष्टि बताया गया था, लेकिन बाद में सामने आया कि यह बादल फटने की घटना थी।

पहले भी हो चुका है हादसा

गौरतलब है कि उत्तरकाशी में फटा बादल एक महीने के भीतर दूसरी बार हुआ है। इससे पहले, 5 अगस्त को उत्तरकाशी के धराली गांव में भी बादल फटने से खीरगंगा में भयंकर बाढ़ आ गई थी। उस घटना में चार लोगों की मौत हो गई थी और कई लोगों के मलबे में दबे होने की सूचना थी। उस समय भी कई होटलों और घरों को भारी नुकसान हुआ था।

उत्तराखंड पर मंडराता भूस्खलन का खतरा

आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों की एक शोध रिपोर्ट ने उत्तराखंड के चार पर्वतीय जिलों में भूकंप से प्रेरित भूस्खलन के बड़े खतरे की चेतावनी दी है। यह रिपोर्ट हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुई है। शोधकर्ताओं ने जिलावार अध्ययन किया है, जिसमें पाया गया है कि रुद्रप्रयाग जिला भूकंप से होने वाले भूस्खलन के लिए सबसे अधिक संवेदनशील है। इसके बाद पिथौरागढ़, चमोली और उत्तरकाशी जिलों में भी भारी भूस्खलन की आशंका जताई गई है। यह शोध पहली बार अलग-अलग जिलों में जोखिम की जिला-स्तरीय ज़ोनिंग करता है, जो भविष्य के लिए एक बड़ी चेतावनी है।

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