UPI payment charges: बैंकों की मांग खारिज, बजट में 2,000 करोड़ की सब्सिडी से UPI और RuPay लेनदेन रहेंगे मुफ्त
नई दिल्ली।
देश के करोड़ों डिजिटल पेमेंट यूजर्स के लिए बड़ी राहत की खबर है। यूपीआई (UPI) से भुगतान करने पर अब किसी तरह का शुल्क लगाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। वित्त मंत्रालय ने बैंकों और फिनटेक कंपनियों की ओर से UPI ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने की मांग को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि आम उपयोगकर्ताओं और छोटे व्यापारियों के लिए UPI पूरी तरह मुफ्त बना रहेगा।
सरकार की मंशा साफ: UPI रहेगा फ्री
पिछले एक साल से बैंक और डिजिटल पेमेंट कंपनियां जैसे पेटीएम, फोनपे और गूगल पे UPI ट्रांजैक्शन की बढ़ती लागत का हवाला देते हुए शुल्क लगाने की मांग कर रही थीं। लेकिन वित्त मंत्रालय ने यह साफ कर दिया है कि सरकार डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटेगी।
इसी उद्देश्य से केंद्रीय बजट 2026-27 में UPI और RuPay डेबिट कार्ड लेनदेन के लिए 2,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी का प्रावधान किया गया है, ताकि मौजूदा मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) मॉडल को जारी रखा जा सके।
सरकार कैसे करती है बैंकों की भरपाई?
MDR मॉडल के तहत डिजिटल भुगतान पर बैंकों और पेमेंट गेटवे की लागत का बड़ा हिस्सा सरकार वहन करती है।
पिछले बजट में इस मद में 437 करोड़ रुपये रखे गए थे, जिसे बाद में बढ़ाकर 2,196 करोड़ रुपये कर दिया गया। इससे साफ है कि सरकार बैंकों की लागत को समझते हुए भी यूजर्स पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालना चाहती।
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बड़ी राशि के भुगतान पर भी नहीं लगेगा शुल्क
सरकार ने फिलहाल UPI के जरिए बड़ी राशि के भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगाने के प्रस्ताव को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया है। यानी न तो आम यूजर और न ही छोटे व्यापारी, किसी को भी अभी भुगतान पर चार्ज नहीं देना होगा।
हालांकि इस फैसले से बैंकों और फिनटेक कंपनियों में कुछ निराशा जरूर है, क्योंकि उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था लंबे समय तक टिकाऊ नहीं है।
बैंकों और फिनटेक कंपनियों की क्या है दलील?
बैंकों और भुगतान कंपनियों का कहना है कि:
- हर एक डिजिटल ट्रांजैक्शन पर उन्हें औसतन 2 रुपये की लागत आती है
- रोजाना 30 करोड़ से ज्यादा UPI ट्रांजैक्शन प्रोसेस हो रहे हैं
- इंफ्रास्ट्रक्चर, फ्रॉड रोकथाम और नए फीचर्स पर खर्च लगातार बढ़ रहा है
उनका मानना है कि मौजूदा सब्सिडी भविष्य में अपर्याप्त साबित हो सकती है।
RBI का डेटा क्या कहता है?
आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, 86% UPI ट्रांजैक्शन 500 रुपये से कम के होते हैं।
कम राशि वाले लेनदेन की संख्या ज्यादा होने से सिस्टम पर दबाव और लागत दोनों बढ़ते हैं। इसके बावजूद सरकार ने यूजर्स को राहत देने का रास्ता चुना है।
बड़े व्यापारियों पर शुल्क लगाने का सुझाव
पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया ने सुझाव दिया था कि:
- जिन व्यापारियों का टर्नओवर 10 करोड़ रुपये से अधिक है
- उनसे 0.2% से 0.3% तक शुल्क लिया जा सकता है
हालांकि सरकार ने फिलहाल इस प्रस्ताव को भी स्वीकार नहीं किया है और साफ संकेत दिए हैं कि UPI यूजर्स से कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची UPI की लोकप्रियता
भारत में UPI की लोकप्रियता लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है।
- जनवरी 2026 में 2,170 करोड़ ट्रांजैक्शन
- कुल मूल्य: 28.33 लाख करोड़ रुपये
- रोजाना औसतन 70 करोड़ लेनदेन
ये आंकड़े दिखाते हैं कि UPI अब भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है।
आगे क्या हो सकता है?
वित्त मंत्रालय और RBI के अधिकारियों का कहना है कि
अगर भविष्य में जरूरत पड़ी तो कुछ महीनों बाद शुल्क को लेकर फिर से विचार किया जा सकता है।
लेकिन फिलहाल सरकार का रुख पूरी तरह यूजर्स के पक्ष में है।


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