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NHAI ने रचा इतिहास: हाईवे निर्माण में बने 4 गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड, भारत की इंजीनियरिंग क्षमता को मिली वैश्विक पहचान

NHAI Guinness World Record

NHAI Guinness World Record: भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने हाईवे निर्माण के क्षेत्र में एक साथ चार गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर दुनिया को भारत की तकनीकी और इंजीनियरिंग ताकत का लोहा मनवाया है। यह रिकॉर्ड बेंगलुरु–कडप्पा–विजयवाड़ा इकोनॉमिक कॉरिडोर के पैकेज-2 और पैकेज-3 में लगातार बिटुमिनस कंक्रीट पाविंग के दौरान बनाए गए।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि को देश के सड़क निर्माण इतिहास की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक माना जा रहा है। इस मौके पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने NHAI की पूरी टीम और कंसेशनायर कंपनी

एक साथ बने चार गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड

NHAI ने हाईवे निर्माण में निरंतर बिटुमिनस कंक्रीट बिछाने के दौरान चार अलग-अलग श्रेणियों में Guinness World Records अपने नाम किए।
इन रिकॉर्ड्स के तहत—

  • 156 लेन-किलोमीटर सड़क पर
  • लगभग 57,500 मीट्रिक टन बिटुमिनस कंक्रीट
  • बेहद कम समय में
  • बिना गुणवत्ता से समझौता किए

लगातार बिछाई गई। यह आंकड़ा पहले के विश्व रिकॉर्ड 84.4 लेन-किलोमीटर से लगभग दोगुना है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपलब्धि सड़क निर्माण तकनीक में भारत की बड़ी छलांग को दर्शाती है।

नितिन गडकरी बोले—विश्वस्तरीय हाईवे बना रहा भारत

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस रिकॉर्ड को भारत की इंजीनियरिंग क्षमता का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा—

“यह उपलब्धि आधुनिक तकनीक, अत्याधुनिक मशीनरी और सख्त गुणवत्ता मानकों के कारण संभव हो पाई है। भारत अब केवल सड़कें नहीं बना रहा, बल्कि विश्वस्तरीय हाईवे नेटवर्क तैयार कर रहा है।”

उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में अभूतपूर्व परिवर्तन देखने को मिल रहा है। समय पर बड़े प्रोजेक्ट पूरे करना और वैश्विक मानकों को छूना अब भारत की पहचान बन चुका है।

दक्षिण भारत की कनेक्टिविटी को मिलेगा बड़ा फायदा

NHAI अधिकारियों के मुताबिक, बेंगलुरु–कडप्पा–विजयवाड़ा इकोनॉमिक कॉरिडोर के पूरा होने से दक्षिण भारत की कनेक्टिविटी को जबरदस्त मजबूती मिलेगी।
इस कॉरिडोर से—

  • बेंगलुरु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के प्रमुख शहर सीधे जुड़ेंगे
  • माल और यात्री परिवहन तेज होगा
  • लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी
  • उद्योग और व्यापार को नई रफ्तार मिलेगी

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कॉरिडोर दक्षिण भारत की आर्थिक गतिविधियों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा।

आधुनिक तकनीक और गुणवत्ता का अनूठा उदाहरण

इस प्रोजेक्ट में इस्तेमाल की गई तकनीक और मशीनरी को खासतौर पर रिकॉर्ड-स्तरीय कार्य के लिए तैयार किया गया था।
NHAI के मुताबिक—

  • हाई-कैपेसिटी पावर्स
  • रियल-टाइम मॉनिटरिंग
  • मौसम के अनुसार निर्माण रणनीति
  • और सख्त गुणवत्ता जांच

ने इस ऐतिहासिक सफलता में अहम भूमिका निभाई।

इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में मील का पत्थर

इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि भारत के विकास मॉडल का प्रतिबिंब है।
जहां पहले सड़क परियोजनाएं वर्षों में पूरी होती थीं, वहीं अब—

  • समय
  • लागत
  • और गुणवत्ता

तीनों पर समान फोकस किया जा रहा है।

भारत की बढ़ती वैश्विक साख

चार गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर NHAI ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण में किसी भी विकसित देश से पीछे नहीं है। यह उपलब्धि आने वाले वर्षों में भारत को वैश्विक इंफ्रास्ट्रक्चर हब बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।

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