Instagram का बड़ा फैसला! अब बच्चों तक नहीं पहुंचेगा अश्लील कंटेंट, पैरेंट्स रख सकेंगे पूरा कंट्रोल

Instagram New Update : अब बच्चों को नहीं दिखेगा अश्लील या अनुचित कंटेंट

Instagram New Update : सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म Instagram ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अपने कंटेंट नियमों को और सख्त कर दिया है। अब 13 से 17 साल के यूजर्स को केवल PG-13 फिल्मों जैसा हल्का-फुल्का और उम्र के अनुकूल कंटेंट ही दिखेगा। इस कदम का मकसद नाबालिगों तक पहुंचने वाले अश्लील, हिंसक या खतरनाक कंटेंट को रोकना है।

अब सभी Teen Accounts रहेंगे ‘13+ मोड’ में

Instagram की पैरेंट कंपनी Meta ने बताया कि अब से सभी टीनेज अकाउंट्स को ऑटोमैटिकली ‘13+ मोड’ में रखा जाएगा।
👉 यानी जो भी यूजर 18 साल से कम उम्र के हैं, वे इस सेटिंग को माता-पिता की अनुमति के बिना बदल नहीं पाएंगे।

⚙️ क्या-क्या बदला गया है?

1️⃣ अब शराब, तंबाकू, नशा, हिंसा, गाली-गलौज और खतरनाक स्टंट जैसे कंटेंट 13-17 साल के यूजर्स को नहीं दिखेंगे।
2️⃣ एडल्ट या अनुचित अकाउंट्स को अब किशोर फॉलो नहीं कर पाएंगे।

  • यदि पहले से फॉलो किया है, तो उनके पोस्ट और मैसेज ऑटोमैटिक ब्लॉक हो जाएंगे।
    3️⃣ Instagram का नया AI फ़िल्टर सिस्टम अब यूजर की उम्र और रुचि के अनुसार कंटेंट स्क्रीन करेगा, ताकि कोई भी वयस्क या अनुचित सामग्री बच्चों तक न पहुंचे।

पैरेंट्स को मिलेगा ज्यादा कंट्रोल

Meta के मुताबिक अब माता-पिता अपने बच्चे के अकाउंट को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए ‘Strict Mode’ सक्षम कर सकेंगे।
इस फीचर से —

  • बच्चे को केवल सुरक्षित और सीमित कंटेंट दिखाई देगा।
  • पैरेंट्स किसी भी पोस्ट या वीडियो को रिपोर्ट कर सकेंगे जो उन्हें अनुचित लगे।
  • वे यह भी देख पाएंगे कि बच्चा कितना समय Instagram पर बिता रहा है और किस तरह का कंटेंट देख रहा है।

Meta सर्वे: 95% पैरेंट्स ने बताया उपयोगी कदम

Meta द्वारा किए गए एक सर्वे में —

  • 95% माता-पिता ने माना कि यह फीचर बच्चों के लिए सुरक्षित और मददगार है।
  • 90% पैरेंट्स ने कहा कि इससे उन्हें यह समझने में आसानी होगी कि बच्चे सोशल मीडिया पर क्या देख रहे हैं और किससे इंटरैक्ट कर रहे हैं।

Instagram का लक्ष्य: सुरक्षित डिजिटल स्पेस बनाना

Meta का कहना है कि उसका मकसद Instagram को सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं बल्कि एक सुरक्षित और शिक्षाप्रद डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म बनाना है।
अब यह कदम न केवल बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाएगा, बल्कि डिजिटल दुनिया में जिम्मेदार उपयोग की संस्कृति को भी बढ़ावा देगा।

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