जोधपुर के विकास कार्यों की अनदेखी पर अशोक गहलोत का सरकार पर हमला, मुख्यमंत्री को लिखा विस्तृत पत्र
Jodhpur development issues :: जोधपुर के विकास कार्यों की अनदेखी पर अशोक गहलोत का सरकार पर हमला, मुख्यमंत्री को लिखा विस्तृत पत्र
विरासत, बुनियादी ढांचे और जनसेवाओं को लेकर जताई गंभीर चिंता
जयपुर, 08 फरवरी 2026।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने जोधपुर शहर में लंबित विकास कार्यों, ऐतिहासिक धरोहरों की उपेक्षा और बुनियादी सुविधाओं की बदहाली को लेकर मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा को एक विस्तृत पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जोधपुर जैसे ऐतिहासिक शहर की अनदेखी दुर्भाग्यपूर्ण है और सरकार को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर जनहित में तत्काल निर्णय लेने चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने मांग की है कि आगामी राज्य बजट में जोधपुर के लिए पर्याप्त प्रावधान किया जाए, ताकि वर्षों से अटकी योजनाओं को धरातल पर उतारा जा सके।
सीवरेज व्यवस्था और ऐतिहासिक तालाबों की उपेक्षा
अशोक गहलोत ने पत्र में जोधपुर की सीवरेज व्यवस्था को लेकर गहरी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि शहर में सीवरेज सुधार के लिए तैयार की गई लगभग 300 करोड़ रुपये की महत्वपूर्ण योजना जांच के नाम पर लंबे समय से लंबित है। इसके चलते शहर के कई इलाकों में जलभराव, गंदगी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं।
इसके साथ ही उन्होंने रानीसर, पदमसर, गुलाबसागर और फतेहसागर जैसे ऐतिहासिक तालाबों के संरक्षण का मुद्दा भी उठाया। गहलोत ने कहा कि इन जलस्रोतों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए पहले से स्वीकृत राशि अब तक जारी नहीं की गई, जिससे जोधपुर की विरासत खतरे में पड़ती जा रही है।
युवाओं से जुड़ी परियोजनाएं अधर में
पूर्व मुख्यमंत्री ने खेल और शिक्षा से जुड़ी परियोजनाओं में देरी को सरकार की उदासीनता करार दिया।
उन्होंने विशेष रूप से स्टेट स्पोर्ट्स आवासीय सेंटर का उल्लेख किया, जो लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से तैयार है। इसके बावजूद केवल 3.8 करोड़ रुपये की बचत राशि की फाइल लंबित होने के कारण स्वीमिंग पूल और इंडोर हॉल जैसे महत्वपूर्ण कार्य अधूरे हैं।
उन्होंने बताया कि नवनिर्मित खिलाड़ी हॉस्टल्स का हैंडओवर नहीं होने से खिलाड़ी आज भी जर्जर भवनों में रहने को मजबूर हैं।
इसी तरह, सुमेर पब्लिक लाइब्रेरी का नया भवन पूरी तरह तैयार होने के बावजूद बजट और स्टाफ की कमी के कारण शुरू नहीं हो पा रहा है, जिससे छात्रों और शोधार्थियों को भारी नुकसान हो रहा है।
चिकित्सा सेवाओं की बदहाली पर गंभीर सवाल
पत्र में जोधपुर की स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को भी गंभीर बताया गया है।
एमडीएम अस्पताल में लगभग 81 करोड़ रुपये की बकाया देनदारी के चलते वेंडर्स ने आवश्यक उपकरण और सूचर्स की आपूर्ति रोक दी है, जिससे मरीजों के इलाज पर सीधा असर पड़ रहा है।
इसके अलावा मारवाड़ मेडिकल यूनिवर्सिटी, जिसकी अनुमानित लागत 500 करोड़ रुपये है, उसका निर्माण कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि मंडोर, चौपासनी हाउसिंग बोर्ड और प्रताप नगर जैसे जिला अस्पतालों में डॉक्टरों के पद खाली हैं और आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की भारी कमी बनी हुई है।
सड़क, जल वितरण और अधूरे भवनों का मुद्दा
अशोक गहलोत ने जोधपुर की बदहाल सड़कों और जल वितरण व्यवस्था में सुधार के लिए विशेष पैकेज की मांग की है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि चैनपुरा स्टेडियम, राजकीय आयुर्वेद नर्सिंग सेंटर का ऑडिटोरियम और सूचना केंद्र का मिनी ऑडिटोरियम जैसे कई विकास कार्य पूर्ण हो चुके हैं, लेकिन अब तक आमजन के लिए नहीं खोले गए हैं।
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विकास को राजनीति से ऊपर रखने की अपील
पत्र के अंत में पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री से अपील की कि विकास कार्यों को किसी सरकार की पहचान न बनाकर जनता का अधिकार समझा जाए। उन्होंने आग्रह किया कि सभी पूर्ण परियोजनाओं का तुरंत उद्घाटन कर उन्हें जनसेवा के लिए समर्पित किया जाए और लंबित योजनाओं को शीघ्र गति दी जाए। विरासत, बुनियादी ढांचे और जनसेवाओं को लेकर जताई गंभीर चिंता
जयपुर, 08 फरवरी 2026।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने जोधपुर शहर में लंबित विकास कार्यों, ऐतिहासिक धरोहरों की उपेक्षा और बुनियादी सुविधाओं की बदहाली को लेकर मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा को एक विस्तृत पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जोधपुर जैसे ऐतिहासिक शहर की अनदेखी दुर्भाग्यपूर्ण है और सरकार को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर जनहित में तत्काल निर्णय लेने चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने मांग की है कि आगामी राज्य बजट में जोधपुर के लिए पर्याप्त प्रावधान किया जाए, ताकि वर्षों से अटकी योजनाओं को धरातल पर उतारा जा सके।
सीवरेज व्यवस्था और ऐतिहासिक तालाबों की उपेक्षा
अशोक गहलोत ने पत्र में जोधपुर की सीवरेज व्यवस्था को लेकर गहरी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि शहर में सीवरेज सुधार के लिए तैयार की गई लगभग 300 करोड़ रुपये की महत्वपूर्ण योजना जांच के नाम पर लंबे समय से लंबित है। इसके चलते शहर के कई इलाकों में जलभराव, गंदगी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं।
इसके साथ ही उन्होंने रानीसर, पदमसर, गुलाबसागर और फतेहसागर जैसे ऐतिहासिक तालाबों के संरक्षण का मुद्दा भी उठाया। गहलोत ने कहा कि इन जलस्रोतों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए पहले से स्वीकृत राशि अब तक जारी नहीं की गई, जिससे जोधपुर की विरासत खतरे में पड़ती जा रही है।
युवाओं से जुड़ी परियोजनाएं अधर में
पूर्व मुख्यमंत्री ने खेल और शिक्षा से जुड़ी परियोजनाओं में देरी को सरकार की उदासीनता करार दिया।
उन्होंने विशेष रूप से स्टेट स्पोर्ट्स आवासीय सेंटर का उल्लेख किया, जो लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से तैयार है। इसके बावजूद केवल 3.8 करोड़ रुपये की बचत राशि की फाइल लंबित होने के कारण स्वीमिंग पूल और इंडोर हॉल जैसे महत्वपूर्ण कार्य अधूरे हैं।
उन्होंने बताया कि नवनिर्मित खिलाड़ी हॉस्टल्स का हैंडओवर नहीं होने से खिलाड़ी आज भी जर्जर भवनों में रहने को मजबूर हैं।
इसी तरह, सुमेर पब्लिक लाइब्रेरी का नया भवन पूरी तरह तैयार होने के बावजूद बजट और स्टाफ की कमी के कारण शुरू नहीं हो पा रहा है, जिससे छात्रों और शोधार्थियों को भारी नुकसान हो रहा है।
चिकित्सा सेवाओं की बदहाली पर गंभीर सवाल
पत्र में जोधपुर की स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को भी गंभीर बताया गया है।
एमडीएम अस्पताल में लगभग 81 करोड़ रुपये की बकाया देनदारी के चलते वेंडर्स ने आवश्यक उपकरण और सूचर्स की आपूर्ति रोक दी है, जिससे मरीजों के इलाज पर सीधा असर पड़ रहा है।
इसके अलावा मारवाड़ मेडिकल यूनिवर्सिटी, जिसकी अनुमानित लागत 500 करोड़ रुपये है, उसका निर्माण कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि मंडोर, चौपासनी हाउसिंग बोर्ड और प्रताप नगर जैसे जिला अस्पतालों में डॉक्टरों के पद खाली हैं और आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की भारी कमी बनी हुई है।
सड़क, जल वितरण और अधूरे भवनों का मुद्दा
अशोक गहलोत ने जोधपुर की बदहाल सड़कों और जल वितरण व्यवस्था में सुधार के लिए विशेष पैकेज की मांग की है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि चैनपुरा स्टेडियम, राजकीय आयुर्वेद नर्सिंग सेंटर का ऑडिटोरियम और सूचना केंद्र का मिनी ऑडिटोरियम जैसे कई विकास कार्य पूर्ण हो चुके हैं, लेकिन अब तक आमजन के लिए नहीं खोले गए हैं।
विकास को राजनीति से ऊपर रखने की अपील
पत्र के अंत में पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री से अपील की कि विकास कार्यों को किसी सरकार की पहचान न बनाकर जनता का अधिकार समझा जाए। उन्होंने आग्रह किया कि सभी पूर्ण परियोजनाओं का तुरंत उद्घाटन कर उन्हें जनसेवा के लिए समर्पित किया जाए और लंबित योजनाओं को शीघ्र गति दी जाए।




