GISA-VI 2026 का भव्य समापन: संस्कारम विश्वविद्यालय में शोध, नवाचार और वैश्विक सहयोग को मिली नई दिशा
GISA-VI 2026 में 300 से अधिक शोध प्रस्तुत, आधुनिक तकनीक, मृदा संरक्षण और वैश्विक सहयोग पर विशेषज्ञों का जोर
Agriculture Veterinary Conference: अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ने बनाए नए आयाम
Agriculture Veterinary Conference: संस्कारम विश्वविद्यालय, झज्जर/पाटौदा में आयोजित “ग्लोबल इम्पैक्ट्स ऑफ सस्टेनेबल एग्रीकल्चर एंड वेटरनरी इनोवेशन्स (GISA-VI 2026)” अंतरराष्ट्रीय महासम्मेलन का भव्य समापन हुआ। दो दिवसीय इस सम्मेलन में देश-विदेश से आए वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और विशेषज्ञों ने कृषि एवं पशुपालन के क्षेत्र में नवाचार और आधुनिक तकनीकों पर गहन चर्चा की।
यह आयोजन ज्ञान-विनिमय, अनुसंधान और वैश्विक सहयोग को नई दिशा देने वाला साबित हुआ।
आधुनिक तकनीक से ही कृषि-पशुपालन का विकास
समापन समारोह के मुख्य अतिथि विजय सिंह दहिया (आईएएस) ने कहा कि कृषि और पशुपालन भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उन्होंने जोर दिया कि इन क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और शोध आधारित नवाचार को अपनाना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने विश्वविद्यालय के प्रयासों को सराहते हुए इसे ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।
326 शोधपत्रों ने दिखाया वैज्ञानिक दृष्टिकोण
सम्मेलन में कुल 326 शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इन शोधों में:
- सतत कृषि पद्धतियां
- पशु स्वास्थ्य प्रबंधन
- तकनीकी नवाचार
- जलवायु अनुकूल खेती
जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। तकनीकी सत्रों और पोस्टर प्रस्तुतियों ने प्रतिभागियों को वैश्विक स्तर की जानकारी प्रदान की।
शोध और तकनीक का समन्वय जरूरी
विशिष्ट अतिथि डॉ. कर्नल अजय कुमार गहलोत ने कहा कि आज के दौर में शोध आधारित शिक्षा और आधुनिक तकनीकों का समन्वय बेहद जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों को पारंपरिक ज्ञान से आगे बढ़कर नवाचार और अनुसंधान की दिशा में काम करने के लिए प्रेरित किया।
वैश्विक सहयोग से मिलेगा विकास को बल
डॉ. इंद्रजीत सिंह ने कहा कि कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग बेहद आवश्यक है। इससे इन क्षेत्रों का समग्र विकास संभव होगा।
मृदा स्वास्थ्य पर विशेष जोर
आर.के. सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि मृदा स्वास्थ्य के संरक्षण के बिना सतत कृषि विकास संभव नहीं है। उन्होंने वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से भूमि की उर्वरता बढ़ाने पर जोर दिया।
बायोटेक्नोलॉजी से पशुपालन में क्रांति संभव
डॉ. ओ.पी. छिकारा ने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी पशुधन सुधार का भविष्य है। इसके जरिए पशुपालन क्षेत्र में बड़े बदलाव संभव हैं।
वैज्ञानिक अनुसंधान ही विकास की कुंजी
डॉ. रामेश्वर सिंह ने कहा कि सतत विकास के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान बेहद जरूरी है। उन्होंने युवाओं में वैज्ञानिक सोच विकसित करने पर बल दिया।
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विश्वविद्यालय प्रशासन का आभार
संस्थान के चांसलर डॉ. महिपाल ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन अपने उद्देश्यों को सफलतापूर्वक हासिल करने में सफल रहा।
वहीं प्रो-चांसलर डॉ. गुरुदयाल सिंह और कुलपति डॉ. अजीत सिंह ने इसे ज्ञान और नवाचार का संगम बताया।
प्रगतिशील किसानों का सम्मान
सम्मेलन के समापन अवसर पर आधुनिक तकनीकों को अपनाने वाले प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया। इन्हें कृषि विकास का प्रेरणास्रोत बताते हुए आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में उनकी भूमिका को सराहा गया।
ज्ञान और नवाचार का संगम
यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन न केवल एक शैक्षणिक आयोजन रहा, बल्कि कृषि और पशुपालन के भविष्य को दिशा देने वाला मंच भी साबित हुआ। इससे शोध, तकनीक और वैश्विक सहयोग को नई ऊर्जा मिली है।
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