Shyama Prasad Mukherjee Statue: रोहतक में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान इस बार चर्चा का केंद्र केवल डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (Dr. Shyama Prasad Mukherjee) का स्मरण नहीं रहा, बल्कि उनके सम्मान में स्थायी पहचान स्थापित करने की मांग भी प्रमुखता से सामने आई। कार्यकर्ताओं ने शहर में उनकी आदमकद प्रतिमा लगाने और किसी प्रमुख सड़क का नाम उनके नाम पर रखने का प्रस्ताव रखते हुए इसे राष्ट्र की एकता और अखंडता के प्रति उनके योगदान का उचित सम्मान बताया।
शनिवार को BJP जिला इकाई द्वारा ‘मंगल कमल’ कार्यालय ( Mangal Karyalaya) में आयोजित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मरण पखवाड़ा के अंतर्गत कार्यकर्ता सम्मेलन में बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा जिलाध्यक्ष एडवोकेट रणबीर ढाका (Advocate Ranbir Dhaka) ने की, जबकि वरिष्ठ भाजपा नेता प्रदीप जैन मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद रहे।
डॉ. मुखर्जी के विचार आज भी प्रासंगिक : प्रदीप जैन
अपने संबोधन में वरिष्ठ भाजपा नेता प्रदीप जैन ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन राष्ट्रहित, सिद्धांतों और राष्ट्रीय एकता के प्रति पूर्ण समर्पण का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि देश की अखंडता के लिए उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरणा देता रहेगा।
उन्होंने बताया कि भाजपा पूरे देश में 23 जून से 6 जुलाई तक डॉ. मुखर्जी स्मरण पखवाड़ा मना रही है, जिसके माध्यम से उनके विचारों और राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाया जा रहा है।
शिक्षा से लेकर राजनीति तक छोड़ी अमिट छाप
प्रदीप जैन ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (Dr. Shyama Prasad Mukherjee) केवल राजनीति ही नहीं बल्कि शिक्षा और प्रशासन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किए। मात्र 33 वर्ष की आयु में कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बनकर उन्होंने भारतीय भाषाओं और शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दी।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में उन्होंने कई महत्वपूर्ण औद्योगिक परियोजनाओं की नींव रखी। वर्ष 1950 में नेहरू-लियाकत समझौते का विरोध करते हुए उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया और बाद में भारतीय जनसंघ की स्थापना कर वैचारिक राजनीति की नई दिशा दी।
प्रतिमा और सड़क नामकरण की मांग बनी सम्मेलन की खास चर्चा
सम्मेलन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव रखा कि रोहतक शहर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आदमकद प्रतिमा स्थापित की जाए। साथ ही शहर के किसी प्रमुख मार्ग का नाम उनके नाम पर रखा जाए ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान से प्रेरणा ले सकें।
कार्यकर्ताओं का कहना था कि राष्ट्रीय एकता और अखंड भारत के लिए उनके संघर्ष को स्थायी पहचान मिलनी चाहिए। भाजपा नेत्री ज्योत्सना रोहिल्ला ने भी उनके जीवन को त्याग, साहस और राष्ट्रभक्ति का अद्वितीय उदाहरण बताया।
अनुच्छेद 370 का उल्लेख भी रहा चर्चा में
प्रदीप जैन ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. मुखर्जी का प्रसिद्ध नारा “एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे” आज भी राष्ट्रीय एकता का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया जाना उनके एकात्म भारत के संकल्प की दिशा में महत्वपूर्ण कदम रहा।
प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत कार्यक्रम की तैयारियों पर भी जोर
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जिलाध्यक्ष एडवोकेट रणबीर ढाका ने कार्यकर्ताओं से संगठन को और मजबूत बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी के विचार विकसित भारत के निर्माण की मजबूत आधारशिला हैं। साथ ही उन्होंने आगामी 7 जुलाई को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता के प्रथम रोहतक आगमन पर नई अनाज मंडी में आयोजित स्वागत एवं अभिनंदन समारोह में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील की।
सम्मेलन में पूर्व सहकारिता मंत्री मनीष कुमार ग्रोवर, पूर्व मंत्री कृष्ण मूर्ति हुड्डा, पूर्व मेयर मनमोहन गोयल, शमशेर सिंह खरक, राजकुमार शर्मा, अभिनंदन शर्मा, नितिन जैन, नवीन ढुल, सरिता नारायण, राजेश भालौट, देवराज सांपला, डॉ. अशोक कुमार रंगा, वीर सिंह हुड्डा, दीपक हुड्डा, डॉ. दिनेश घिलौड़, डॉ. प्रेस सिंह हुड्डा, पदम सिंह ढूल सहित बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

