Colors of Rajasthan: जयपुर में आयोजित 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन का पहला दिन केवल डिजिटल गवर्नेंस और नई तकनीकों की चर्चाओं तक सीमित नहीं रहा। दिनभर नीति, नवाचार और तकनीकी बदलावों पर मंथन के बाद शाम को राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (आरआईसी) का माहौल पूरी तरह बदल गया, जब ‘कलर्स ऑफ राजस्थान’ शीर्षक से आयोजित सांस्कृतिक संध्या ने प्रदेश की लोक संस्कृति के रंगों से पूरे सभागार को सराबोर कर दिया। देशभर से आए प्रतिनिधियों ने राजस्थान की पारंपरिक कला, संगीत और लोक नृत्यों का ऐसा जीवंत संगम देखा, जिसने सम्मेलन को एक नई सांस्कृतिक पहचान भी दी।
राजस्थान की प्रसिद्ध लोक कलाकार अनिता प्रधान के निर्देशन में प्रस्तुत इस विशेष कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि आधुनिक तकनीक और सांस्कृतिक विरासत एक-दूसरे के पूरक हैं। डिजिटल इंडिया की दिशा में आगे बढ़ते भारत के बीच राजस्थान ने अपनी समृद्ध परंपराओं का ऐसा परिचय दिया, जिसने देशभर से आए अतिथियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
लोक संस्कृति के रंगों से सजा मंच
सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत भगवान शिव को समर्पित शिव स्तुति से हुई, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। इसके बाद राजस्थान के सबसे लोकप्रिय लोकनृत्य घूमर की प्रस्तुति ने दर्शकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। रंग-बिरंगे परिधानों और पारंपरिक संगीत की मधुर धुनों पर कलाकारों की लयबद्ध प्रस्तुति ने सभागार में उत्साह का माहौल बना दिया।
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इसके बाद चरी नृत्य ने अपनी अनूठी शैली से सभी को प्रभावित किया। सिर पर जलते दीपों से सजी चरी लेकर कलाकारों ने संतुलन, कौशल और लोक परंपरा का अद्भुत प्रदर्शन किया। वहीं भवाई नृत्य ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया, जब कलाकारों ने सिर पर कई मटकियां संतुलित रखते हुए शानदार प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में मंजीरा नृत्य और कथक की मनोहारी प्रस्तुतियों ने भी लोक और शास्त्रीय कला का सुंदर संगम पेश किया।
देशभर से आए प्रतिनिधियों ने की खुलकर सराहना
कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए सम्मेलन के डेलिगेट्स, ई-गवर्नेंस पुरस्कार विजेता, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, स्टार्टअप जगत से जुड़े प्रोफेशनल्स और बड़ी संख्या में युवा मौजूद रहे। सभी ने कलाकारों की प्रस्तुति को उत्साहपूर्वक सराहा।
प्रदर्शन के दौरान कई बार ऐसा अवसर आया जब पूरे सभागार में तालियों की गूंज सुनाई दी। कार्यक्रम के समापन पर दर्शकों ने खड़े होकर कलाकारों का स्टैंडिंग ओवेशन देकर सम्मान किया। यह सम्मान कलाकारों की प्रस्तुति के प्रति दर्शकों की भावनाओं और राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर के प्रति उनके सम्मान का प्रतीक बन गया।
तकनीक और संस्कृति का अनूठा संगम
राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य डिजिटल गवर्नेंस, नवाचार और तकनीकी विकास पर विचार-विमर्श करना है, लेकिन सांस्कृतिक संध्या ने यह भी साबित किया कि किसी भी राज्य की पहचान केवल तकनीकी उपलब्धियों से नहीं बल्कि उसकी सांस्कृतिक विरासत से भी बनती है।
राजस्थान सरकार ने इस आयोजन के माध्यम से देशभर से आए प्रतिनिधियों को प्रदेश की लोक परंपराओं, कला, संगीत और सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराने का सफल प्रयास किया। इससे सम्मेलन को केवल प्रशासनिक या तकनीकी मंच ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संवाद का भी स्वरूप मिला।
राजस्थान की पहचान बनी सबसे बड़ी मेजबान
‘कलर्स ऑफ राजस्थान’ की प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि राजस्थान केवल ऐतिहासिक धरोहरों और पर्यटन स्थलों का प्रदेश नहीं, बल्कि जीवंत लोक संस्कृति, पारंपरिक कलाओं और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भी केंद्र है। सम्मेलन में शामिल अतिथियों ने राजस्थान की मेहमाननवाजी और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की खुलकर सराहना की।
सांस्कृतिक संध्या ने राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन के पहले दिन को यादगार बना दिया। तकनीक और परंपरा के इस अनूठे संगम ने यह साबित किया कि डिजिटल युग में भी भारतीय संस्कृति की जड़ें उतनी ही मजबूत हैं और यही विविधता भारत की सबसे बड़ी पहचान है।

