Deep Tech Governance: डीप टेक और क्वांटम टेक्नोलॉजी बदलेंगे भारत की डिजिटल गवर्नेंस की तस्वीर, विकसित भारत-2047 के लिए जयपुर से बना नया रोडमैप

Deep Tech Governance: जयपुर में आयोजित 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन के तीसरे प्लेनरी सत्र ने यह संकेत दिया कि भारत का डिजिटल भविष्य अब केवल ऑनलाइन सेवाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डीप टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के सहारे शासन व्यवस्था को पूरी तरह नए स्तर पर ले जाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन तकनीकों का सही दिशा में उपयोग किया गया तो विकसित भारत-2047 का लक्ष्य हासिल करने में बड़ी गति मिल सकती है।

राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (आरआईसी) में आयोजित ‘डीप टेक एंड क्वांटम ड्रिवन डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन’ विषयक सत्र में उद्योग, तकनीकी संस्थानों और आईटी क्षेत्र के विशेषज्ञों ने भविष्य की डिजिटल गवर्नेंस को लेकर अपने विचार साझा किए। चर्चा का केंद्र केवल नई तकनीकों का विकास नहीं बल्कि उनका जिम्मेदार, सुरक्षित और नागरिकों की जरूरतों के अनुरूप उपयोग रहा।

तकनीक नहीं, समस्या का समाधान बने प्राथमिकता

सत्र का संचालन नैसकॉम की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट संगीता गुप्ता ने किया। उन्होंने कहा कि डीप टेक भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था और सुशासन की मजबूत आधारशिला बनने जा रही है। सरकार, उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय से इन तकनीकों का लाभ देश के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा सकता है।

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काइंड्रिल इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट परमिंदर काकरिया ने कहा कि किसी भी नई तकनीक को अपनाने से पहले यह देखना जरूरी है कि वह वास्तविक समस्याओं का समाधान करती है या नहीं। उन्होंने केवल तकनीक विकसित करने के बजाय सरकारी कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने, निरंतर स्किल डेवलपमेंट और विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर विशेष जोर दिया।

भारतीय भाषाओं में एआई बनेगा बदलाव का माध्यम

शून्य लैब्स की संस्थापक ऋतु मेहरोत्रा ने कहा कि भारत जैसे विविध भाषाई देश में वॉयस आधारित और बहुभाषी एआई प्लेटफॉर्म भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता हैं। उनका मानना है कि यदि डिजिटल सेवाओं को ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों तक प्रभावी रूप से पहुंचाना है तो स्थानीय भाषाओं और बोलियों को ध्यान में रखकर तकनीक विकसित करनी होगी। इसके साथ ही डेटा संप्रभुता और सुरक्षित एआई प्लेटफॉर्म पर भी विशेष ध्यान देना जरूरी है।

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विकसित भारत-2047 के लिए जयपुर से बना नया रोडमैप

राज्यों को जरूरत के मुताबिक चुननी होगी तकनीक

पीडब्ल्यूसी के पार्टनर संतोष मिश्रा ने कहा कि राज्यों को केवल नई तकनीकों की दौड़ में शामिल होने के बजाय अपनी वास्तविक जरूरतों के अनुसार तकनीकी समाधान अपनाने चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी डिजिटल परियोजना को शुरू करने के बाद उसे बीच में छोड़ने के बजाय संस्थागत सहयोग के साथ उसके सफल क्रियान्वयन तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि सरकारी निवेश का पूरा लाभ आम नागरिकों तक पहुंचे।

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वित्तीय सेवाओं से लेकर प्रशासन तक दिखेगा बड़ा बदलाव

लॉयड्स टेक्नोलॉजी सेंटर इंडिया के डेटा एवं एआई आर्किटेक्चर लीड रवि कप्पागंटु ने कहा कि एआई अब केवल प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाने तक सीमित नहीं है। यह वित्तीय सेवाओं में भरोसेमंद डिजिटल इकोसिस्टम तैयार कर रहा है, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और विश्वसनीय बन रही है। इसका लाभ भविष्य में प्रशासनिक सेवाओं में भी व्यापक रूप से देखने को मिलेगा।

क्वांटम कंप्यूटिंग बनेगी अगली बड़ी क्रांति

आईबीएम क्वांटम इंडिया के कंट्री मैनेजर एवं आईआईटी मद्रास के एडजंक्ट प्रोफेसर डॉ. धिनाकरन विनायगमूर्ति ने कहा कि आने वाले वर्षों में क्वांटम कंप्यूटिंग और एआई शासन, उद्योग तथा अनुसंधान के स्वरूप को पूरी तरह बदल देंगे। इसके लिए अभी से अनुसंधान, नवाचार और उच्चस्तरीय कौशल विकास में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि भारत वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में अग्रणी भूमिका निभा सके।

जिम्मेदार एआई और ग्रीन टेक्नोलॉजी पर रहा विशेष फोकस

सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर, साइबर सुरक्षा, ऊर्जा दक्षता, जल संसाधनों के संतुलित उपयोग और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की। उनका मानना था कि डिजिटल विकास तभी सफल माना जाएगा जब तकनीकी प्रगति के साथ पर्यावरणीय संतुलन भी बना रहे।

विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि डीप टेक का दायरा केवल सरकारी सेवाओं तक सीमित नहीं रहेगा। भविष्य में जल प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, जलवायु परिवर्तन और सार्वजनिक सेवा वितरण जैसे क्षेत्रों में भी इन तकनीकों का व्यापक उपयोग होगा। ऐसे में भारत के लिए यह समय तकनीकी नवाचार, जिम्मेदार एआई और कुशल मानव संसाधन तैयार करने का है, ताकि विकसित भारत-2047 की डिजिटल परिकल्पना को मजबूत आधार मिल सके।

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