दो साल तक सेवा देने वाले कर्मचारियों ने लगाए गंभीर आरोप
Jaipuriya Hospital Contract Employees: जयपुर के प्रतिष्ठित जयपुरिया अस्पताल में संविदा कर्मचारियों से जुड़ा एक विवाद सामने आया है। अस्पताल में पिछले लगभग दो वर्षों से कार्यरत करीब 30 संविदा कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें अचानक बिना किसी पूर्व सूचना, लिखित नोटिस या कारण बताए ड्यूटी से प्रभावी रूप से अलग कर दिया गया है। कर्मचारियों का कहना है कि पिछले तीन दिनों से उन्हें न तो उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर करने दिया जा रहा है और न ही बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज करने की अनुमति दी जा रही है।
कर्मचारियों का दावा है कि इस दौरान अस्पताल प्रशासन की ओर से उन्हें किसी प्रकार का आधिकारिक आदेश भी उपलब्ध नहीं कराया गया। इससे कर्मचारियों के सामने नौकरी, वेतन और भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
30 कर्मचारियों के साथ उनके परिवार भी प्रभावित
इस पूरे घटनाक्रम का असर केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। प्रभावित कर्मचारियों का कहना है कि उनके परिवारों की आजीविका भी इन्हीं नौकरियों पर निर्भर है। अचानक ड्यूटी से रोक दिए जाने के कारण आर्थिक अनिश्चितता बढ़ गई है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।
कर्मचारियों ने बताया अपना सेवा रिकॉर्ड
संविदा कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले दो वर्षों से अस्पताल की विभिन्न सेवाओं में पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ कार्य कर रहे थे। उनके अनुसार इस अवधि में उनके खिलाफ किसी प्रकार की अनुशासनहीनता, कार्य में लापरवाही या शिकायत का कोई मामला सामने नहीं आया। ऐसे में बिना कारण बताए ड्यूटी से रोकना उनके लिए बेहद निराशाजनक है।
कर्मचारियों का यह भी कहना है कि उन्होंने अस्पताल प्रशासन से कई बार स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया, लेकिन अब तक उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।
श्रम अधिकारों को लेकर उठे सवाल
इस मामले ने संविदा कर्मचारियों के अधिकारों और रोजगार सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। श्रम मामलों से जुड़े जानकारों का मानना है कि किसी भी कर्मचारी को कार्य से अलग करने या सेवा समाप्त करने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों और कानूनी प्रावधानों के अनुसार पूरी की जानी चाहिए। सामान्य परिस्थितियों में कर्मचारी को कारण बताना, उचित नोटिस देना और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक माना जाता है।
हालांकि इस मामले में अस्पताल प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
मानसिक तनाव और भविष्य को लेकर बढ़ी चिंता
प्रभावित कर्मचारियों का कहना है कि लगातार तीन दिनों से ड्यूटी नहीं करने देने के कारण वे मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें यह भी नहीं बताया गया कि आगे उनकी सेवाएं जारी रहेंगी या नहीं। ऐसे में भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
कर्मचारियों का कहना है कि वे अस्पताल की व्यवस्थाओं का हमेशा जिम्मेदारी के साथ हिस्सा रहे हैं और मरीजों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने में अपनी भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में अचानक इस तरह की कार्रवाई से उनका मनोबल प्रभावित हुआ है।
निष्पक्ष जांच और बहाली की मांग
प्रभावित कर्मचारियों ने मांग की है कि उन्हें तत्काल प्रभाव से दोबारा बायोमेट्रिक और उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर करने की अनुमति दी जाए। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि बिना किसी लिखित आदेश के उन्हें ड्यूटी से क्यों रोका गया।
कर्मचारियों ने प्रशासन और संबंधित विभागों से भी हस्तक्षेप की मांग की है ताकि उनके रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और भविष्य में किसी भी कर्मचारी के साथ ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।
फिलहाल अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रबंधन का पक्ष आने के बाद मामले की पूरी तस्वीर और अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

