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Stray Dogs Order: सार्वजनिक सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, आवारा कुत्तों को लेकर राज्यों को चेतावनी

Stray Dogs Order: नई दिल्ली- देशभर में बढ़ते डॉग बाइट मामलों और रैबीज के खतरे को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के आदेश में बदलाव की मांग की गई थी। कोर्ट ने साफ कर दिया कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि सार्वजनिक संस्थानों के परिसरों में आवारा कुत्तों की मौजूदगी लोगों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन चुकी है। अदालत ने कहा कि राज्यों को पहले ही Animal Birth Control Rules का सही तरीके से पालन करना चाहिए था, लेकिन लापरवाही के कारण हालात गंभीर हो गए।

डॉग बाइट के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने कई राज्यों से चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए गए। राजस्थान के श्रीगंगानगर, सीकर, उदयपुर और भीलवाड़ा जैसे शहरों में डॉग बाइट की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज हुई है। कोर्ट ने कहा कि केवल श्रीगंगानगर में एक महीने के भीतर 1084 लोगों को कुत्तों ने काटा, जिनमें कई छोटे बच्चे भी शामिल हैं।

तमिलनाडु में पिछले चार महीनों में लगभग दो लाख डॉग बाइट के मामले सामने आए। वहीं दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर भी जनवरी से अब तक 31 लोगों को आवारा कुत्तों ने काटा। अदालत ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि देश के सबसे व्यस्त एयरपोर्ट पर ऐसी घटनाएं प्रशासनिक विफलता को दर्शाती हैं।

विदेशी पर्यटक भी हुए शिकार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कई विदेशी पर्यटक भी आवारा कुत्तों के हमलों का शिकार हुए हैं। गुजरात के सूरत में एक जर्मन यात्री को कुत्ते ने काट लिया था। अदालत ने कहा कि ऐसी घटनाएं देश की छवि और शहरी प्रशासन पर जनता के भरोसे को कमजोर करती हैं।

कोर्ट ने यह भी माना कि रैबीज से होने वाली मौतों के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती है। अदालत ने कहा कि यह केवल पशु संरक्षण का मामला नहीं बल्कि नागरिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है।

राज्यों को दी अवमानना कार्रवाई की चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके आदेशों का पालन नहीं करने वाले राज्यों और अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई शुरू की जा सकती है। अदालत ने सभी हाई कोर्ट को भी निर्देश दिया कि वे अपने-अपने राज्यों में इन आदेशों के पालन की निगरानी करें।

कोर्ट ने कहा कि नगर निकायों और संबंधित विभागों के कर्मचारियों को उचित ट्रेनिंग दी जाए और एंटी रैबीज वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही NHAI को निर्देश दिया गया कि हाईवे पर घूमने वाले आवारा पशुओं को हटाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

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गंभीर और संक्रमित कुत्तों पर विशेष कार्रवाई

अदालत ने कहा कि जिन इलाकों में आवारा कुत्तों की समस्या ज्यादा गंभीर है, वहां विशेषज्ञों की मदद से समाधान निकाला जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि जो कुत्ते गंभीर रूप से संक्रमित हैं और जिनका इलाज संभव नहीं है, उन्हें यूथेनेशिया देने पर विचार किया जा सकता है।

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सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को सार्वजनिक सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि पशु प्रेमी संगठनों ने इस पर चिंता जताई है, लेकिन अदालत ने साफ कर दिया कि इंसानी सुरक्षा और स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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