Scholarship Test Haryana: संस्कारम् विश्वविद्यालय में आयोजित स्कॉलरशिप टेस्ट इस बार केवल एक प्रवेश परीक्षा नहीं रहा, बल्कि ग्रामीण और मध्यमवर्गीय परिवारों के विद्यार्थियों के लिए बड़े सपनों का मंच बनकर सामने आया। हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न जिलों से आए 998 विद्यार्थियों ने इस परीक्षा में भाग लेकर बेहतर शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य के प्रति अपनी गंभीरता दिखाई। विश्वविद्यालय परिसर पूरे दिन विद्यार्थियों और अभिभावकों की उत्साहपूर्ण मौजूदगी से गुलजार रहा।
इस स्कॉलरशिप टेस्ट में दिल्ली, बहादुरगढ़, रोहतक, भिवानी, रेवाड़ी, नारनौल, धारूहेड़ा, तावडू, सोहना, हिसार, बेरी, फरुखनगर, हांसी, कलानौर, महेंद्रगढ़, झज्जर, चरखी दादरी, पानीपत और गुरुग्राम सहित कई क्षेत्रों से विद्यार्थी पहुंचे। परीक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और तकनीकी ढांचे का अवलोकन भी कराया गया, जिसने सभी को प्रभावित किया।
रोजगारोन्मुख कोर्सों के प्रति दिखा बढ़ता रुझान
इस दौरान विद्यार्थियों में बीएएमएस, फार्मेसी, फिजियोथैरेपी, वेटरनरी साइंस, कंप्यूटर साइंस, लैब टेक्नोलॉजी और लॉ जैसे रोजगारोन्मुख कोर्सों को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। खासतौर पर टेक्नोलॉजी और मेडिकल शिक्षा से जुड़े विभाग विद्यार्थियों के आकर्षण का केंद्र बने रहे।
गुरुग्राम से आई छात्रा महक ने बताया कि विश्वविद्यालय का कंप्यूटर साइंस विभाग और टेक्नोलॉजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है, जो विद्यार्थियों को इंडस्ट्री के अनुरूप तैयार करने में मदद करेगा। वहीं रेवाड़ी से अपने बेटे प्रतीक को परीक्षा दिलाने पहुंचे अभिभावक अंशुल जैन ने कहा कि अब छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी महानगरों जैसी शिक्षा सुविधाएं मिलने लगी हैं, जो एक सकारात्मक बदलाव है।

आधुनिक सुविधाओं ने जीता अभिभावकों का भरोसा
स्कॉलरशिप टेस्ट के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन ने अभिभावकों को मेडिकल कॉलेज, ऑडिटोरियम, मीडिया सेंटर, ऑपरेशन थिएटर, ट्रॉमा सेंटर, सीमेन सेंटर, आधुनिक लैब, वाई-फाई युक्त परिसर, खेल मैदान, जिम, छात्रावास और सुसज्जित पुस्तकालय सहित विभिन्न सुविधाओं का भ्रमण कराया। अभिभावकों ने माना कि विश्वविद्यालय का वातावरण शिक्षा और व्यक्तित्व विकास दोनों के लिए अनुकूल है।
‘ग्रामीण भारत की प्रतिभाओं को मंच देना हमारा उद्देश्य’
विश्वविद्यालय के चांसलर डॉ. महिपाल ने कहा कि संस्कारम् विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर, तकनीकी रूप से सक्षम और वैश्विक नेतृत्व के योग्य बनाना इसका प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए यह स्कॉलरशिप टेस्ट एक सुनहरा अवसर है, जहां वे अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीण भारत में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल सही अवसर और संसाधनों की है। विश्वविद्यालय इसी दिशा में लगातार कार्य कर रहा है ताकि हर छात्र अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ सके।
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विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष फोकस
विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डॉ. अजीत सिंह ने कहा कि यह परीक्षा विद्यार्थियों के सपनों को नई दिशा देने का प्रयास है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय केवल शैक्षणिक शिक्षा तक सीमित न रहकर कौशल विकास, व्यक्तित्व निर्माण, रिसर्च और व्यावहारिक प्रशिक्षण पर भी विशेष ध्यान देता है।
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उन्होंने कहा कि आने वाले समय में उच्च शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक तथा उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुसार तैयार करना बेहद जरूरी है। संस्कारम् विश्वविद्यालय इसी विजन के साथ शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहा है।
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