लाइफस्टाइल

कहीं आप भी तो नहीं फंस गए हैं ‘Situationship’ के जाल में? इन आसान संकेतों से करें पहचान

न दोस्ती, न प्यार और न ही कोई साफ कमिटमेंट—अगर आपका रिश्ता भी इसी उलझन में अटका हुआ है, तो हो सकता है आप Situationship में हों। आज के दौर में रिश्तों को एक नाम देना जितना मुश्किल हो गया है

Situationship: कहीं आप भी तो नहीं फंस गए हैं ‘Situationship’ के जाल में? इन आसान संकेतों से करें पहचान


न दोस्ती, न प्यार और न ही कोई साफ कमिटमेंट—अगर आपका रिश्ता भी इसी उलझन में अटका हुआ है, तो हो सकता है आप Situationship में हों। आज के दौर में रिश्तों को एक नाम देना जितना मुश्किल हो गया है, उतना ही मुश्किल उन्हें समझना भी। हम साथ समय बिताते हैं, बातें शेयर करते हैं, कभी-कभी एक-दूसरे के बिना दिन अधूरा लगता है, लेकिन जब रिश्ते को ऑफिशियल करने की बात आती है, तो कदम पीछे खिंच जाते हैं। Gen Z के बीच ट्रेंड कर रहा यह शब्द ऐसे ही कन्फ्यूजिंग रिश्तों की पहचान बन चुका है। अगर आपको भी अपने रिश्ते को लेकर कन्फ्यूजन है, तो नीचे दिए गए संकेत आपकी मदद कर सकते हैं।

Situationship क्या होता है?

Situationship ऐसा रिश्ता होता है, जो दोस्ती और रिलेशनशिप के बीच लटका रहता है। इसमें इमोशन्स होते हैं, साथ होने की आदत होती है, लेकिन भविष्य को लेकर कोई स्पष्टता नहीं होती। यह रिश्ता न तो पूरी तरह डेटिंग कहलाता है और न ही ऑफिशियल रिलेशनशिप। इसी अधूरी परिभाषा की वजह से लोग अक्सर भावनात्मक थकान का शिकार हो जाते हैं।

1. कमिटमेंट का साफ अभाव

Situationship का सबसे बड़ा संकेत है कमिटमेंट की कमी। आप अक्सर सोचते हैं—“हम आखिर हैं क्या?” लेकिन इस सवाल का जवाब कभी साफ नहीं मिलता। जब भी भविष्य या रिश्ते की दिशा की बात होती है, सामने वाला टालमटोल कर देता है। अगर आपके रिश्ते में सवाल ज्यादा और जवाब कम हैं, तो यह सिचुएशनशिप हो सकती है।

2. जरूरत पड़ने पर ही संपर्क

अगर आपका पार्टनर आपसे सिर्फ तब संपर्क करता है, जब उसे किसी काम में मदद चाहिए या अकेलापन महसूस हो रहा हो, तो यह भी एक बड़ा रेड फ्लैग है। Situationship में रिश्ता अक्सर सुविधा तक सीमित रहता है। जबकि सच्चे रिश्तों में पार्टनर एक-दूसरे की जरूरत बनते हैं, न कि सिर्फ जरूरत के समय का ऑप्शन।

3. रिश्ते को पब्लिक न करना

क्या आपका पार्टनर आपको दोस्तों, परिवार या सोशल मीडिया पर इंट्रोड्यूस करने से बचता है? अगर आप दोनों साथ हैं, लेकिन दुनिया से छिपकर, तो यह साफ संकेत है कि रिश्ता अभी भी ऑफिशियल नहीं है। Situationship में अक्सर एक पक्ष रिश्ते को प्राइवेट रखता है ताकि किसी तरह की जिम्मेदारी न लेनी पड़े।

4. फ्यूचर प्लानिंग से दूरी

सच्चे रिश्तों में भविष्य की बातें स्वाभाविक होती हैं—ट्रिप्स, करियर सपोर्ट, साथ रहने के प्लान या शादी तक की चर्चा। लेकिन Situationship में पार्टनर लॉन्ग-टर्म प्लानिंग से बचते हैं। अगर आपका रिश्ता सिर्फ “आज” तक सीमित है और “कल” की बात आते ही असहजता बढ़ जाती है, तो यह चेतावनी का संकेत है।

5. बार-बार बदलता व्यवहार

Situationship में पार्टनर का मूड अक्सर रोलर-कोस्टर की तरह होता है। आज बहुत करीब, कल बिल्कुल दूर। कभी प्यार भरे मैसेज और तारीफें, तो कभी अचानक चुप्पी और दूरी। यह उतार-चढ़ाव आपको इमोशनली कन्फ्यूज और एंग्जायटी में डाल सकता है। अगर यह पैटर्न बार-बार दोहराया जा रहा है, तो इसे हल्के में न लें।

इसे पहचानना क्यों जरूरी है?

Situationship गलत नहीं है, लेकिन लंबे समय तक इसमें फंसे रहना मानसिक और भावनात्मक थकान का कारण बन सकता है। जब रिश्ते की स्थिति साफ नहीं होती, तो उम्मीदें भी अधूरी रह जाती हैं। इसे पहचानना जरूरी है ताकि आप अपने लिए सही फैसला ले सकें—चाहे रिश्ते को साफ दिशा देनी हो या खुद को इससे बाहर निकालना हो।

आगे क्या करें?

  • खुलकर बातचीत करें और अपनी अपेक्षाएं साफ रखें
  • अगर जवाब गोल-मोल हों, तो खुद की वैल्यू समझें
  • अपनी भावनात्मक सेहत को प्राथमिकता दें
  • जरूरत पड़े तो दूरी बनाना भी एक समझदारी भरा फैसला है

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button