श्रीमाधोपुर ने अपने वीर सपूत को नम आंखों से दी अंतिम विदाई, राजकीय सम्मान के साथ हुआ शहीद करम सिंह राठौड़ का अंतिम संस्कार
श्रीमाधोपुर, राजस्थान। Shaheed Karam Singh Rathore |
राजस्थान की वीर भूमि ने आज अपने एक और लाल को अंतिम विदाई दी। श्रीमाधोपुर ज़िले के जोरावर सिंह नगर निवासी शहीद करम सिंह राठौड़ का पार्थिव शरीर बुधवार को गांव लाया गया, जहां पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। यह दृश्य हर आंख को नम और हर दिल को गर्व से भर देने वाला था।
तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर पहुंचते ही गूंजे देशभक्ति के नारे
सुबह जैसे ही शहीद करम सिंह राठौड़ का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, पूरा जोरावर सिंह नगर “भारत माता की जय” और “शहीद करम सिंह अमर रहें” के नारों से गूंज उठा। सड़क के दोनों ओर ग्रामीण कतारबद्ध खड़े होकर अपने वीर सपूत को अंतिम प्रणाम करते नजर आए। गांव में हर तरफ शोक और गर्व का अद्भुत संगम दिखाई दिया।
अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब
शहीद को अंतिम दर्शन देने के लिए हजारों की संख्या में ग्रामीण, आसपास के गांवों से आए लोग, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और सामाजिक संगठनों के सदस्य मौजूद रहे। हर कोई नम आंखों से अपने लाल को श्रद्धांजलि अर्पित करता दिखा। महिलाओं की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे, तो वहीं युवाओं के चेहरों पर देश के लिए बलिदान देने वाले सपूत पर गर्व साफ झलक रहा था।
परिजनों का दर्द और शहादत पर गर्व
शहीद करम सिंह राठौड़ के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। माता-पिता, पत्नी और अन्य परिजन बेटे की तस्वीर से लिपटकर फूट-फूटकर रोते नजर आए। हालांकि, इस गहरे दुख के बीच उनके शब्दों में गर्व भी झलक रहा था। परिजनों ने कहा कि करम सिंह ने देश की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है और उनका यह त्याग हमेशा याद रखा जाएगा।
गार्ड ऑफ ऑनर और सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
शहीद करम सिंह राठौड़ को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। सेना और पुलिस के जवानों ने उन्हें अंतिम सलामी दी। राष्ट्रध्वज तिरंगा पूरे सम्मान के साथ परिजनों को सौंपा गया। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार और सैन्य परंपराओं के अनुसार शहीद का अंतिम संस्कार किया गया। चिता की अग्नि के साथ ही पूरा वातावरण भावुक हो उठा।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने दी श्रद्धांजलि
अंतिम संस्कार के दौरान स्थानीय विधायक, जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी और समाजसेवी संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने शहीद को पुष्पांजलि अर्पित की और परिजनों को ढांढस बंधाया। अधिकारियों ने परिवार को सरकार की ओर से मिलने वाली हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया।
देशभक्ति के रंग में डूबा पूरा गांव
अंतिम यात्रा के दौरान गांव का हर रास्ता देशभक्ति नारों से गूंजता रहा। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी हाथों में तिरंगा लिए चलते नजर आए। आंखों में आंसू थे, लेकिन दिलों में शहीद के प्रति अपार सम्मान और गर्व था। जोरावर सिंह नगर का हर नागरिक आज खुद को शहीद करम सिंह राठौड़ के परिवार का हिस्सा मान रहा था।
शहादत बनी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा
शहीद करम सिंह राठौड़ का बलिदान न केवल उनके परिवार या गांव के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है। उनकी शहादत आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति, कर्तव्य और साहस का मार्ग दिखाती रहेगी।




