Panchkula Women Reservation Rally: पंचकूला में निकाली गई मशाल जुलूस यात्रा, शामिल हुए सीएम सैनी और प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली
पंचकूला में महिला आरक्षण के समर्थन में निकली मशाल यात्रा ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली और अन्य नेताओं की मौजूदगी ने इसे चुनावी संदेश का रूप दे दिया। भाजपा ने इसे महिला अधिकारों की लड़ाई बताया, जबकि कांग्रेस पर लगातार हमले कर इसे राजनीतिक बहस का केंद्र बना दिया।
Panchkula Women Reservation Rally: पंचकूला की सड़कों पर निकली मशाल यात्रा ने न केवल महिला आरक्षण के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया, बल्कि इसे राजनीतिक विमर्श के केंद्र में भी ला दिया। राज्यसभा सांसद Rekha Sharma के नेतृत्व में आयोजित इस यात्रा में हरियाणा के मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष Mohan Lal Badoli और संगठन मंत्री Phanindranath Sharma शामिल हुए।
सेक्टर-7-8 लाइट प्वाइंट से डीसी स्कूल तक निकली इस मशाल यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाओं और कार्यकर्ताओं की भागीदारी ने इसे एक शक्ति प्रदर्शन में बदल दिया। हालांकि, यह आयोजन केवल प्रतीकात्मक नहीं रहा, बल्कि इसके जरिए भाजपा ने विपक्ष, खासकर कांग्रेस पर सीधा राजनीतिक हमला भी बोला।
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महिला आरक्षण पर सियासी संग्राम
मुख्यमंत्री सैनी ने अपने संबोधन में कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस का इतिहास निराशाजनक रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने इस दिशा में ठोस पहल नहीं की।
उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा लाए गए ‘नारी शक्ति वंदन’ विधेयक का जिक्र करते हुए कहा कि यह महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी में सशक्त बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। सैनी के अनुसार, विपक्ष का इस बिल के प्रति रवैया महिलाओं के अधिकारों के प्रति उनकी गंभीरता पर सवाल खड़ा करता है।
मशाल जुलूस या राजनीतिक संदेश?
मुख्यमंत्री ने इस मशाल यात्रा को केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकारों के लिए उठी आवाज बताया। उन्होंने कहा कि यह जुलूस उस सोच के खिलाफ है, जो महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित रखती आई है। साथ ही, उन्होंने कांग्रेस और इंडी गठबंधन पर आरोप लगाया कि वे चुनाव के समय महिलाओं से समर्थन लेते हैं, लेकिन जब अधिकार देने की बात आती है तो पीछे हट जाते हैं। उनके अनुसार, यह दोहरा रवैया अब जनता के सामने उजागर हो चुका है।

विधानसभा से लेकर सड़क तक की राजनीति
सैनी ने हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने महिला आरक्षण के समर्थन में ठोस पहल की, लेकिन कांग्रेस ने वहां भी सकारात्मक भूमिका नहीं निभाई। उन्होंने इसे महिलाओं के प्रति असंवेदनशीलता का उदाहरण बताया। इस बयान के जरिए भाजपा ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वह न केवल संसद में बल्कि राज्य स्तर पर भी महिला सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है।
33 प्रतिशत आरक्षण का वादा
प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली ने अपने संबोधन में महिला आरक्षण को भाजपा का संकल्प बताया। उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिलाना केवल एक राजनीतिक वादा नहीं, बल्कि एक लक्ष्य है जिसे हर हाल में पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब तक महिलाओं को उनका पूरा अधिकार नहीं मिल जाता, तब तक इस तरह के जनआंदोलन जारी रहेंगे। बड़ौली ने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे महिलाओं के मुद्दों का इस्तेमाल केवल राजनीतिक फायदे के लिए करते हैं।
बदलता चुनावी नैरेटिव
यह मशाल जुलूस ऐसे समय में आयोजित हुआ है जब चुनावी माहौल धीरे-धीरे बन रहा है। ऐसे में भाजपा ने महिला आरक्षण को एक प्रमुख चुनावी मुद्दे के रूप में आगे बढ़ाने की रणनीति अपनाई है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस तरह के आयोजनों के जरिए भाजपा महिला मतदाताओं को सीधे संबोधित करने की कोशिश कर रही है। वहीं, कांग्रेस के लिए यह चुनौती बन सकती है कि वह इस मुद्दे पर अपनी स्थिति को स्पष्ट और प्रभावी तरीके से पेश करे।
महिला शक्ति बनी केंद्र बिंदु
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं की उपस्थिति ने यह संकेत दिया कि महिला मतदाता अब राजनीति में एक निर्णायक भूमिका निभा रही हैं। भाजपा ने इस आयोजन के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि वह महिलाओं के अधिकारों और भागीदारी को लेकर गंभीर है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मुद्दा आने वाले चुनावों में किस तरह असर डालता है और क्या महिला आरक्षण का सवाल राजनीतिक समीकरणों को बदलने में भूमिका निभाएगा।




