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Youth Debt Crisis: ₹30000 हजार की सैलरी पर 40,00,000 लाख का कर्ज! युवा पीढ़ी कर्ज के जाल में, चेक बाउंस केस में बड़ा उछाल

Youth Debt Crisis: देश में तेजी से बदलती लाइफस्टाइल और आसान डिजिटल लोन सुविधा ने युवा पीढ़ी को कर्ज की ओर तेजी से धकेला है। हालात यह हैं कि 30 से 40 हजार रुपये महीना कमाने वाले कई युवा 30 से 40 लाख रुपये तक का लोन उठा चुके हैं। बढ़ती EMI, क्रेडिट कार्ड बकाया और चेक बाउंस के मामलों ने वित्तीय व्यवस्था को चिंता में डाल दिया है।

Gen Z में कर्ज लेने की बढ़ती प्रवृत्ति

25 से 35 वर्ष की उम्र के युवा, जिन्हें आमतौर पर Generation Z या Gen Z कहा जाता है, आज क्रेडिट मार्केट में सबसे सक्रिय वर्ग बन चुके हैं।

TransUnion CIBIL की रिपोर्ट के अनुसार नए क्रेडिट लेने वालों में 41% हिस्सेदारी Gen Z की है। वहीं CRIF High Mark और UFF की रिपोर्ट बताती है कि जून 2025 तक NBFC-फिनटेक प्लेटफॉर्म से लोन लेने वालों में 65% से अधिक 26-35 वर्ष आयु वर्ग के हैं।

छोटे टिकट साइज (50,000 रुपये से कम) के लोन में डिफॉल्ट दर सबसे ज्यादा पाई गई है। करीब 26% खाते 90 दिनों से अधिक समय से बकाया हैं।

डिजिटल लोन ऐप्स: राहत या जोखिम?

आज मोबाइल ऐप्स और फिनटेक प्लेटफॉर्म्स के जरिए पर्सनल लोन, क्रेडिट लाइन और ‘बाय नाउ पे लेटर’ जैसी सुविधाएं बेहद आसान हो गई हैं। कम दस्तावेज और बिना गारंटी मिलने वाले ये असुरक्षित लोन शुरुआत में राहत देते हैं, लेकिन समय पर भुगतान न होने पर भारी ब्याज और पेनल्टी जुड़ जाती है।

यहीं से कर्ज का चक्र शुरू होता है—पुराना लोन चुकाने के लिए नया लोन लेना। धीरे-धीरे यह आदत आर्थिक जाल में बदल जाती है।

EMI का गणित कैसे बिगाड़ता है बजट?

जब लोन की राशि बढ़ती है, तो मासिक EMI भी बढ़ती है। EMI की गणना समझने के लिए देखें यह फॉर्मूला:

यहां P मूलधन, r मासिक ब्याज दर और n महीनों की संख्या है। यदि आय स्थिर रहे और EMI बढ़ती जाए, तो बजट असंतुलित होना तय है। यही कारण है कि सीमित वेतन में अधिक कर्ज लेने वाले युवा जल्दी डिफॉल्ट की स्थिति में पहुंच जाते हैं।

चेक बाउंस के 43 लाख से ज्यादा मामले लंबित

देश में चेक बाउंस के मामलों में भी तेज उछाल देखा गया है। आंकड़ों के अनुसार 43 लाख से अधिक मामले लंबित हैं। चेक बाउंस पर दो साल तक की सजा का प्रावधान है, फिर भी मामलों में कमी नहीं आई है।

सबसे अधिक मामले महाराष्ट्र में दर्ज हैं, जहां 5.6 लाख से ज्यादा केस लंबित हैं। इसके बाद गुजरात का स्थान है।

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने मामलों के त्वरित निपटारे के लिए व्हाट्सएप नोटिस और 20% अंतरिम भुगतान जैसे दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

बढ़ता NPA और क्रेडिट कार्ड डिफॉल्ट

बैंकों और NBFC के लिए बढ़ता NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) चिंता का विषय बन चुका है। माइक्रो लोन, पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड बकाया में डिफॉल्ट दर तेजी से बढ़ रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि लाइफस्टाइल खर्च—जैसे महंगे गैजेट्स, ट्रैवल और ऑनलाइन शॉपिंग—आय से अधिक बढ़ रहे हैं। जब खर्च आय से आगे निकल जाता है, तो वित्तीय असंतुलन बढ़ता है।

युवाओं के लिए सबक क्या है?

कर्ज लेना गलत नहीं है, लेकिन आय और खर्च के बीच संतुलन जरूरी है।

  • EMI कुल मासिक आय के 30-40% से अधिक न हो।
  • आपातकालीन फंड जरूर बनाएं।
  • क्रेडिट कार्ड का उपयोग सीमित रखें।
  • केवल जरूरत के लिए लोन लें, लाइफस्टाइल के लिए नहीं।

वित्तीय अनुशासन ही कर्ज संकट से बचने का सबसे बड़ा उपाय है। छोटी EMI भी लंबे समय में बड़ा बोझ बन सकती है, इसलिए समझदारी से वित्तीय फैसले लेना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।

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