Rajasthan Energy Self-Reliance: जयपुर। राजस्थान सरकार ने वर्ष 2027 तक प्रदेश को बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ऊर्जा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि राज्य को बिजली खरीदने वाले प्रदेश की छवि से आगे बढ़ाकर ऊर्जा उत्पादन और आपूर्ति के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करना प्राथमिकता होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित बैठक में ऊर्जा उत्पादन, प्रसारण व्यवस्था, वितरण नेटवर्क और भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक का मुख्य फोकस प्रदेश की बढ़ती बिजली मांग को स्थानीय उत्पादन के माध्यम से पूरा करने और बाहरी निर्भरता को कम करने पर रहा।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान के पास सौर और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। इन संसाधनों का अधिकतम उपयोग करते हुए राज्य को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि थर्मल, हाइड्रो, सोलर और विंड ऊर्जा स्रोतों के बीच संतुलित विकास सुनिश्चित किया जाए ताकि किसानों, उद्योगों और घरेलू उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति मिल सके।
बिजली खरीद में आई उल्लेखनीय कमी
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों ने ऊर्जा प्रबंधन के क्षेत्र में राज्य सरकार की उपलब्धियों को भी रेखांकित किया। पिछले वर्ष मई माह में राजस्थान को अपनी कुल बिजली आवश्यकता का लगभग 8 प्रतिशत हिस्सा बाहरी स्रोतों से खरीदना पड़ा था। लेकिन इस वर्ष प्रभावी योजना और बेहतर प्रबंधन के चलते यह आंकड़ा घटकर केवल 2 प्रतिशत रह गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव राज्य की उत्पादन क्षमता में सुधार और ऊर्जा संसाधनों के बेहतर उपयोग का संकेत है। इससे न केवल आर्थिक बचत हुई है बल्कि भविष्य में ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा भी मजबूत हुई है।
रिकॉर्ड बिजली उत्पादन से बढ़ा भरोसा
उत्पादन निगम की कोयला आधारित विद्युत इकाइयों ने 2 जून को 7,171 मेगावाट बिजली उत्पादन कर नया रिकॉर्ड बनाया। यह उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है जब गर्मी के कारण बिजली की मांग अपने उच्च स्तर पर बनी हुई है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि विद्युत उत्पादन इकाइयों की कार्यक्षमता बढ़ाने और नई तकनीकों को अपनाने पर विशेष ध्यान दिया जाए ताकि भविष्य की मांगों को भी आसानी से पूरा किया जा सके।
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बिजली ढांचे के विस्तार पर सरकार का फोकस
राज्य सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में बिजली अवसंरचना के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। इस दौरान 400 केवी, 220 केवी और 132 केवी क्षमता के 60 ग्रिड सब स्टेशन स्थापित किए गए हैं जबकि 151 नए जीएसएस का निर्माण कार्य जारी है।
इसके अतिरिक्त 33 केवी के 444 सब स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं और 211 अन्य सब स्टेशनों पर काम प्रगति पर है। इन परियोजनाओं से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
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किसानों और उपभोक्ताओं को मिलेगा सीधा लाभ
मुख्यमंत्री ने 26 जिलों में किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराने की व्यवस्था का उल्लेख करते हुए शेष जिलों में भी इसे जल्द लागू करने के निर्देश दिए। साथ ही प्रधानमंत्री कुसुम योजना और प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना का अधिकतम लाभ पात्र उपभोक्ताओं तक पहुंचाने पर जोर दिया।
उन्होंने डिस्कॉम कंपनियों को शिकायत निवारण प्रणाली को तकनीकी रूप से और अधिक प्रभावी बनाने तथा उपभोक्ता सेवाओं में सुधार लाने के निर्देश भी दिए।
ऊर्जा क्षेत्र में नई पहचान की ओर राजस्थान
बैठक से यह स्पष्ट संकेत मिला कि राज्य सरकार आने वाले वर्षों में राजस्थान को केवल बिजली उपभोक्ता राज्य नहीं बल्कि ऊर्जा उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान दिलाने की दिशा में काम कर रही है। उत्पादन क्षमता, हरित ऊर्जा, ट्रांसमिशन नेटवर्क और उपभोक्ता सेवाओं पर समान फोकस के साथ प्रदेश ऊर्जा क्षेत्र में एक नए दौर की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।

