सेवा से संघर्ष तक: जयपुर पहुंची संविदा नर्सेज की न्याय यात्रा, स्थाई भर्ती की मांग पर बढ़ा टकराव

Contract Nurses Protest: जयपुर। राजस्थान में संविदा नर्सेज, एएनएम और पैरामेडिकल कर्मियों का लंबे समय से चल रहा रोजगार और भर्ती संबंधी संघर्ष अब निर्णायक चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है। प्रदेश के विभिन्न जिलों से जुड़े हजारों स्वास्थ्य कर्मियों ने स्थाई भर्ती प्रक्रिया में अनुभव आधारित बोनस अंक और मेरिट को प्राथमिकता देने की मांग को लेकर राजधानी जयपुर में प्रदर्शन किया।

भरतपुर क्षेत्र से शुरू हुई न्याय पदयात्रा कई दिनों की यात्रा के बाद जयपुर पहुंची। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य सरकार तक अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से पहुंचाना था। वे मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी मांगों और वर्षों की सेवाओं को लेकर पक्ष रखना चाहते थे।

स्वास्थ्य कर्मियों ने उठाए भर्ती प्रक्रिया पर सवाल

आंदोलन में शामिल संविदा कर्मियों का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सीमित वेतन पर सेवाएं दी हैं। कोरोना महामारी के दौरान भी उन्होंने अग्रिम पंक्ति में रहकर कार्य किया, लेकिन अब नियमित भर्ती प्रक्रिया में उनके अनुभव को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग है कि आगामी भर्ती विज्ञापनों में अनुभव के आधार पर 10, 20 और 30 बोनस अंक दिए जाएं ताकि लंबे समय से सेवाएं दे रहे कर्मियों को उचित अवसर मिल सके।

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जयपुर में बढ़ा तनाव, कई कर्मियों को हिरासत में लिया गया

राजधानी पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ना चाहते थे। इसी दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बन गई। आंदोलन से जुड़े लोगों का आरोप है कि उन्हें आगे बढ़ने से रोका गया और बल प्रयोग किया गया।

घटना के बाद कुछ आंदोलनकारी नेताओं को हिरासत में लिए जाने की भी जानकारी सामने आई है। इसके बाद बड़ी संख्या में संविदा कर्मी जयपुर के शहीद स्मारक स्थल पर एकत्रित हो गए, जहां उन्होंने अपना विरोध जारी रखा।

स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है असर

संघर्ष से जुड़े संगठनों का कहना है कि यदि सरकार जल्द समाधान नहीं निकालती है तो आंदोलन का दायरा बढ़ सकता है। स्वास्थ्य कर्मियों ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में प्रदेशव्यापी प्रदर्शन और कार्य बहिष्कार जैसे कदमों पर भी विचार किया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में संविदा कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में भर्ती और रोजगार से जुड़े मुद्दों का समय पर समाधान नहीं होने पर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

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सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद की जरूरत

वर्तमान स्थिति में सबसे बड़ी आवश्यकता सरकार और आंदोलनकारी पक्षों के बीच सकारात्मक संवाद की मानी जा रही है। स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि उनका उद्देश्य टकराव नहीं बल्कि अपनी मांगों के लिए न्यायपूर्ण समाधान प्राप्त करना है। वहीं प्रशासन के सामने भी चुनौती है कि बढ़ते असंतोष को बातचीत के माध्यम से शांत किया जाए।

फिलहाल जयपुर में जारी यह आंदोलन केवल भर्ती प्रक्रिया का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह उन हजारों संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की उम्मीदों और भविष्य से जुड़ा विषय बन चुका है जो वर्षों से स्थाई रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

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