JDA Illegal Colony
जयपुर में फिर उठे अवैध कॉलोनियों पर सवाल
JDA Illegal Colony: राजधानी जयपुर में एक बार फिर कथित अवैध कॉलोनी निर्माण का मामला चर्चा में है। इस बार विवाद ग्राम खो-नागोरियान, गोनेर रोड स्थित कृषि भूमि खसरा नंबर 225 को लेकर सामने आया है। आरोप है कि सरकारी रिकॉर्ड में रास्ते और कृषि भूमि के रूप में दर्ज इस जमीन पर नियमों की अनदेखी करते हुए आवासीय कॉलोनी विकसित की जा रही है। मामले ने जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) की कार्यप्रणाली और अवैध निर्माण पर कार्रवाई को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय निवासी ने लगाए गंभीर आरोप
स्थानीय निवासी मूलचंद मीणा ने प्रेस वार्ता के दौरान दावा किया कि संबंधित भूमि पर “भंवर विहार” नाम से कॉलोनी विकसित की जा रही है, जबकि यह जमीन नियमानुसार आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत नहीं है। उनका आरोप है कि श्रीलक्ष्मी नगर गृह निर्माण सहकारी समिति लिमिटेड के नाम पर भूखंड आवंटित कर निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने छह लोगों—देवीसहाय मीणा, हंसराज मीणा, बाबूलाल मीणा, रामू मीणा, सोहन मीणा पुत्र भौरीलाल मीणा तथा सोहन मीणा पुत्र रामचंद्र मीणा—के खिलाफ अवैध कॉलोनी बसाने और प्लॉट बेचने के आरोप लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
निर्माण कार्य जारी रहने का दावा
शिकायतकर्ता का कहना है कि देवीसहाय मीणा द्वारा प्लॉट नंबर 27A तथा हंसराज मीणा की पत्नी अनिता देवी के नाम आवंटित प्लॉट नंबर 27 पर तेजी से निर्माण कार्य कराया जा रहा है। उनका आरोप है कि अन्य नामजद लोग भी कथित रूप से प्लॉटों की बिक्री कर रहे हैं, जिससे अवैध निर्माण लगातार बढ़ रहा है।

पहले भी दर्ज है विवादित प्रकरण
मूलचंद मीणा का दावा है कि इसी भूमि से संबंधित अब्दुल रहमान का एक प्रकरण पहले से लंबित है। इसके बावजूद निर्माण गतिविधियां जारी रहने से प्रशासनिक निगरानी और कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो सरकारी भूमि को भारी नुकसान हो सकता है।
शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप
शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने 16 जून 2026 को प्रवर्तन अधिकारी और संबंधित तहसीलदार को लिखित शिकायत देकर पूरे मामले की जानकारी दी थी। उनका आरोप है कि शिकायत के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई और इस दौरान निर्माण कार्य लगातार जारी रहा।
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उनका कहना है कि यदि शुरुआती स्तर पर ही कार्रवाई की जाती तो कथित अवैध निर्माण को रोका जा सकता था।

नियमों के उल्लंघन का दावा
शिकायत में कहा गया है कि संबंधित भूमि कृषि एवं रास्ते के रूप में दर्ज है। ऐसे में बिना स्वीकृत लेआउट, बिना नक्शा पास कराए और बिना आवश्यक अनुमतियों के कॉलोनी विकसित करना नियमानुसार संभव नहीं है। यह क्षेत्र JDA के जोन-10 के अंतर्गत आता है, जहां विकास कार्यों के लिए निर्धारित नियमों का पालन अनिवार्य है।
सात दिन का अल्टीमेटम
मूलचंद मीणा ने प्रशासन से कथित अवैध निर्माण तत्काल हटाने, भूखंडों पर चल रहे निर्माण कार्य को रोकने तथा नामजद लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर प्रभावी कार्रवाई नहीं होती तो वे मुख्यमंत्री कार्यालय और जयपुर विकास प्राधिकरण के आयुक्त कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन करेंगे।
प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
यह मामला फिलहाल शिकायतकर्ता के आरोपों पर आधारित है और संबंधित विभाग की ओर से आधिकारिक कार्रवाई या विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना शेष है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि जयपुर विकास प्राधिकरण और जिला प्रशासन शिकायत की जांच के बाद क्या कदम उठाते हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला राजधानी में अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई की दिशा में एक महत्वपूर्ण परीक्षा साबित हो सकता है।

