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LPG की कमी से उद्योग पर संकट, मजदूर लौट रहे गांव; ऑटो कंपोनेंट सेक्टर चिंतित

एलपीजी सिलेंडर की कमी के कारण फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूर अपने गांव लौट रहे हैं, जिससे ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री चिंतित।

LPG shortage impact industry: देश में एलपीजी की कमी का असर अब आम लोगों के साथ-साथ उद्योगों पर भी दिखने लगा है। गैस सिलेंडर की कमी के कारण कई फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूर अपने गांव लौटने लगे हैं। इससे ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री में उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

भारतीय वाहन कलपुर्जा विनिर्माता संघ (ACMA) ने इस स्थिति को लेकर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि हालात अभी कोविड महामारी जितने गंभीर नहीं हैं, लेकिन यदि समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ तो उद्योग को बड़ा नुकसान हो सकता है।

मजदूरों के गांव लौटने से उत्पादन पर असर

ऑटो कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों का कहना है कि एलपीजी सिलेंडर की कमी के कारण मजदूरों को भोजन बनाने में कठिनाई हो रही है। कई मजदूर फैक्ट्री के पास छोटे गैस बर्नर का इस्तेमाल करके खाना बनाते थे, लेकिन अब गैस की उपलब्धता कम होने से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।

ऐसी स्थिति में कई मजदूर अपने गांव लौटने लगे हैं। इससे फैक्ट्रियों में कामगारों की संख्या कम हो रही है, जिसके कारण उत्पादन प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।

कैंटीन बंद होने से बढ़ी परेशानी

ACMA की महानिदेशक विन्नी मेहता के अनुसार, पहले कई मजदूर फैक्ट्रियों की कैंटीन पर निर्भर रहते थे। लेकिन कुछ जगहों पर कैंटीन सेवाएं भी बंद हो चुकी हैं।

इसके अलावा वायु प्रदूषण को देखते हुए लकड़ी जलाकर खाना बनाने को भी हतोत्साहित किया जा रहा है। ऐसे में एलपीजी की कमी मजदूरों के लिए बड़ी समस्या बन गई है और वे मजबूर होकर अपने गांव लौट रहे हैं।

ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री का बड़ा कारोबार

भारत की ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। वित्त वर्ष 2024-25 में इस उद्योग का कुल कारोबार लगभग 80.2 अरब डॉलर रहा।

इसमें 22.9 अरब डॉलर का निर्यात शामिल था, जबकि करीब 50 करोड़ डॉलर का व्यापार अधिशेष दर्ज किया गया। ACMA के अनुसार, संगठन 1,064 से अधिक कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है और ये कंपनियां संगठित क्षेत्र में ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री के कुल कारोबार का 90 प्रतिशत से अधिक योगदान देती हैं।

घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता

वर्तमान संकट के दौरान सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी है। इसके चलते उद्योगों को मिलने वाली कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित हुई है।

उद्योग जगत का कहना है कि यदि गैस की उपलब्धता जल्द सामान्य नहीं हुई तो उत्पादन और निर्यात दोनों पर असर पड़ सकता है।

सरकार ने बनाई समिति

उद्योग की समस्याओं को देखते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 9 मार्च को एक समिति का गठन किया है। यह समिति उद्योग से मिलने वाली शिकायतों और सुझावों पर विचार करेगी।

पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के कारण गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।

उद्योग संगठनों ने सरकार से मांगी मदद

ACMA ने हाल ही में भारी उद्योग मंत्रालय को एक पत्र लिखकर इस मुद्दे पर ध्यान देने की अपील की है। संगठन का कहना है कि ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री वैश्विक वाहन आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी हुई है।

यदि समय पर सहायता नहीं मिली, तो इससे भारत के निर्यात और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए उद्योग जगत ने सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग की है।

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