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Global War Impact India Trade: वैश्विक तनाव से भारत का व्यापार चिंतित, सतीश बंसल ने प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की

दिल्ली में अखिल भारतीय व्यापार संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश बंसल ने कहा कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते युद्ध और तेल आपूर्ति को लेकर बन रहे दबाव का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और व्यापार पर पड़ रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से कूटनीतिक पहल कर स्थिति को संभालने और व्यापारिक हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की।

Global War Impact India Trade: दिल्ली में अखिल भारतीय व्यापार संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश बंसल ने वैश्विक हालात को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे युद्ध जैसे हालात और देशों के बीच बढ़ते तनाव का प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था और व्यापारिक गतिविधियों पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में केंद्र सरकार को सक्रिय कूटनीतिक भूमिका निभानी चाहिए ताकि व्यापारिक अस्थिरता को कम किया जा सके।

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वैश्विक तनाव और भारत पर असर

सतीश बंसल ने कहा कि जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध या बड़े संघर्ष की स्थिति बनती है, उसका सीधा असर तेल की कीमतों, आयात-निर्यात और मुद्रा विनिमय दर पर पड़ता है।भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो जाती है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से परिवहन लागत बढ़ती है, जिससे वस्तुओं के दाम प्रभावित होते हैं। इसका असर छोटे और मध्यम व्यापारियों से लेकर बड़े उद्योगों तक देखने को मिलता है।

उन्होंने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार-विमर्श करना चाहिए और आवश्यक हो तो अन्य देशों के साथ बातचीत कर समाधान निकालना चाहिए।

दिल्ली अखिल भारतीय व्यापार संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश बंसल

व्यापार जगत की बढ़ती बेचैनी

व्यापारिक संगठनों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता से निवेश प्रभावित होता है। बाजार में अस्थिरता बढ़ने से कारोबारी निर्णय टलते हैं और नई परियोजनाएं धीमी पड़ सकती हैं।

बंसल ने कहा कि छोटे व्यापारी पहले ही महंगाई और मांग में कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में यदि अंतरराष्ट्रीय हालात और बिगड़ते हैं, तो स्थिति और कठिन हो सकती है। उन्होंने सरकार से अपील की कि व्यापारिक हितों की सुरक्षा के लिए ठोस रणनीति बनाई जाए।

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कूटनीतिक पहल की जरूरत

सतीश बंसल ने कहा कि भारत एक वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है और उसकी आवाज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सुनी जाती है। ऐसे में भारत को शांति और स्थिरता के पक्ष में पहल करनी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि समय रहते कूटनीतिक प्रयास किए जाएं तो संभावित आर्थिक नुकसान को कम किया जा सकता है। सरकार और व्यापारिक संगठनों के बीच संवाद बढ़ाने की भी आवश्यकता है, ताकि जमीनी स्तर की समस्याएं सीधे नीति-निर्माताओं तक पहुंच सकें।

दिल्ली में व्यापारिक समुदाय द्वारा उठाई गई यह आवाज इस बात का संकेत है कि वैश्विक घटनाक्रम का असर अब घरेलू बाजार पर स्पष्ट रूप से महसूस किया जा रहा है। व्यापार जगत चाहता है कि सरकार सक्रिय संवाद और रणनीतिक निर्णयों के माध्यम से आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करे। आने वाले समय में केंद्र सरकार की कूटनीतिक और आर्थिक नीतियां यह तय करेंगी कि भारत वैश्विक चुनौतियों के बीच अपने व्यापारिक हितों की कितनी मजबूती से रक्षा कर पाता है।

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