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क्या बिच्छू के बच्चे जन्म के बाद मां को खा जाते हैं? वायरल दावे की पूरी सच्चाई जानिए

सोशल मीडिया पर फैली कहानी का सच; जानें बिच्छू की प्रजनन प्रक्रिया, मां की भूमिका और वैज्ञानिक शोध क्या कहते हैं

Scorpion mother myth: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक चौंकाने वाला दावा तेजी से वायरल हो रहा है—कि बिच्छू के बच्चे जन्म लेते ही अपनी मां को खा जाते हैं। इस कहानी को मां की ममता और बलिदान से जोड़कर पेश किया जाता है। कई लोग इसे प्रकृति की अनोखी मिसाल बताकर शेयर कर रहे हैं। लेकिन क्या वाकई ऐसा होता है? वैज्ञानिक तथ्यों और विशेषज्ञों की राय इस वायरल दावे से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करती है। आइए जानते हैं सच्चाई क्या है।

कैसे होता है बिच्छू का प्रजनन?

सबसे पहले समझना जरूरी है कि बिच्छू की प्रजनन प्रक्रिया क्या होती है। मादा बिच्छू अंडे नहीं देती, बल्कि सीधे जीवित बच्चों को जन्म देती है। इन नवजात बच्चों को स्कॉर्पलिंग कहा जाता है।

एक बार में मादा बिच्छू 10 से 100 तक बच्चों को जन्म दे सकती है। जन्म के समय ये बच्चे बेहद नरम और कमजोर होते हैं। उनका बाहरी कवच (एक्सोस्केलेटन) पूरी तरह सख्त नहीं हुआ होता। इसलिए वे तुरंत अपनी मां की टांगों पर चढ़कर उसकी पीठ पर सवार हो जाते हैं।

मां की पीठ पर 10–20 दिन तक रहता है सहारा

जन्म के बाद लगभग 10 से 20 दिनों तक बच्चे मां की पीठ पर ही रहते हैं। इस दौरान:

  • मां उन्हें शिकारियों से बचाती है
  • खुद कम हिलती-डुलती है
  • कई बार भोजन भी कम लेती है

इस समय बच्चे खुद शिकार नहीं करते, बल्कि जन्म के समय मिली ऊर्जा पर निर्भर रहते हैं। जब उनका पहला मोल्ट (केंचुली बदलना) पूरा हो जाता है, तब वे मां की पीठ से उतरकर स्वतंत्र जीवन शुरू करते हैं।

क्या सच में बच्चे मां को खा जाते हैं?

अब सबसे बड़ा सवाल—क्या बच्चे अपनी मां को खा जाते हैं?

वैज्ञानिक अध्ययनों और पशु व्यवहार विशेषज्ञों के अनुसार, बिच्छुओं में ऐसा व्यवहार सामान्य रूप से नहीं पाया जाता। एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी और अन्य शोध रिपोर्ट्स के मुताबिक, संतान द्वारा मां को खाने की घटना बिच्छुओं में प्रचलित नहीं है।

यह व्यवहार कुछ मकड़ियों और स्यूडोस्कॉर्पियन्स में जरूर देखा गया है, जहां भोजन की कमी होने पर बच्चे मां के शरीर से पोषण लेते हैं। लेकिन बिच्छुओं के मामले में ऐसा कोई प्रमाणित वैज्ञानिक आधार नहीं मिलता।

इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल यह दावा कि बिच्छू के बच्चे मां को खा जाते हैं—तथ्यात्मक रूप से गलत है।

लेकिन सच्चाई का एक दूसरा पहलू भी है

हालांकि बच्चे मां को नहीं खाते, लेकिन प्रकृति का एक कठोर नियम जरूर है। यदि भोजन की भारी कमी हो जाए, तो कुछ दुर्लभ परिस्थितियों में मादा बिच्छू अपने कमजोर या बीमार बच्चों को खा सकती है।

इस व्यवहार को वैज्ञानिक भाषा में कैनिबलिज़्म कहा जाता है, जो कई जीवों में संकट की स्थिति में देखा जाता है। इसका उद्देश्य बाकी बच्चों को बचाने और मां की ऊर्जा बनाए रखने से जुड़ा होता है।

यानी मां बच्चों का भोजन बनती नहीं, बल्कि कभी-कभी विपरीत परिस्थिति में कमजोर बच्चों को खाकर बाकी संतानों को बचाती है।

वायरल दावे क्यों फैलते हैं?

सोशल मीडिया पर अक्सर भावनात्मक या चौंकाने वाली कहानियां तेजी से फैलती हैं। बिच्छू के बच्चों द्वारा मां को खाने की कहानी भी शायद इसी वजह से लोकप्रिय हुई। इसमें ‘मां का बलिदान’ जैसी भावनात्मक बात जोड़ दी गई, जिससे लोग बिना तथ्य जांचे इसे सच मानने लगे।

लेकिन विज्ञान तथ्यों पर आधारित होता है, न कि भावनाओं या वायरल वीडियो पर।

सच जानकर हैरान रह जाएंगे

बिच्छू के बच्चे जन्म के बाद अपनी मां को नहीं खाते। यह दावा वैज्ञानिक रूप से गलत है। हां, मादा बिच्छू कभी-कभी भोजन की कमी में कमजोर बच्चों को खा सकती है, लेकिन यह एक दुर्लभ और परिस्थितिजन्य व्यवहार है।

इसलिए अगली बार जब आपको ऐसा कोई चौंकाने वाला दावा दिखे, तो उसे शेयर करने से पहले उसके पीछे के वैज्ञानिक तथ्यों को जरूर परख लें।

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