देवनगर में विराट हिंदू सम्मेलन: भक्ति, संस्कृति और राष्ट्रभाव का भव्य संगम
देवनगर स्थित सामुदायिक केंद्र में वसुंधरा नगर बस्ती और सुभाष नगर बस्ती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन श्रद्धा, उत्साह और सामाजिक एकता के अद्भुत भाव के साथ भव्य रूप से संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक आयोजन में हजारों की संख्या में हिंदू समाज के भाई-बहनों ने भाग लेकर सांस्कृतिक
Virat Hindu Sammelan: कलश यात्रा, संत प्रवचन और 1100 दीपकों की आरती ने रचा ऐतिहासिक दृश्य
जयपुर। देवनगर स्थित सामुदायिक केंद्र में वसुंधरा नगर बस्ती और सुभाष नगर बस्ती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन श्रद्धा, उत्साह और सामाजिक एकता के अद्भुत भाव के साथ भव्य रूप से संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक आयोजन में हजारों की संख्या में हिंदू समाज के भाई-बहनों ने भाग लेकर सांस्कृतिक, धार्मिक और राष्ट्रीय चेतना का सशक्त परिचय दिया।
यह सम्मेलन न केवल एक धार्मिक आयोजन था, बल्कि समाज को संस्कार, सेवा और राष्ट्रभक्ति के सूत्र में बांधने का एक प्रभावशाली प्रयास भी रहा।
कलश यात्रा से हुआ सम्मेलन का शुभारंभ
सम्मेलन की शुरुआत विभिन्न मंदिरों से निकली भव्य कलश यात्रा के साथ हुई, जो पूरे क्षेत्र से होती हुई सामुदायिक केंद्र पहुंची। इस यात्रा में हजारों महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में उत्साहपूर्वक भाग लिया। सिर पर कलश धारण किए श्रद्धालु महिलाओं की यह यात्रा आस्था, अनुशासन और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी।
दीप प्रज्वलन और गणेश वंदना से आरंभ हुआ कार्यक्रम
सामुदायिक केंद्र पहुंचने के बाद कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं गणेश वंदना के साथ किया गया। वातावरण में मंत्रोच्चार और भक्ति संगीत की गूंज से पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। मंच पर विराजमान संतों और अतिथियों ने आयोजन को सफल बनाने के लिए आयोजकों की सराहना की।
संतों के प्रवचन से मिला संस्कार और सेवा का संदेश
विराट हिंदू सम्मेलन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे संतों ने अपने प्रेरणादायी प्रवचनों से श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया। संतों ने कहा कि हिंदू समाज की शक्ति उसकी संस्कृति, संस्कार और सेवा भावना में निहित है। उन्होंने युवाओं और समाज के हर वर्ग से राष्ट्रहित, सामाजिक समरसता और नैतिक मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया।
संतों के आशीर्वचनों ने उपस्थित जनसमूह को आध्यात्मिक रूप से जागृत करने के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारियों का भी बोध कराया।
राधा-कृष्ण नृत्य और 1100 दीपकों की भव्य आरती
कार्यक्रम के दौरान राधा-कृष्ण की मनमोहक नृत्य प्रस्तुति ने सभी दर्शकों का मन मोह लिया। कलाकारों की भावपूर्ण प्रस्तुति पर श्रद्धालु देर तक तालियां बजाते रहे। इसके बाद 1100 दीपकों से भव्य महाआरती का आयोजन किया गया, जिसने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। दीपों की रोशनी में सजा यह दृश्य श्रद्धा और आस्था का अनुपम उदाहरण बना।
अखंड भारत का नक्शा और राष्ट्र एकता का संदेश
सम्मेलन के दौरान अखंड भारत का भव्य नक्शा तैयार किया गया, जिसके माध्यम से राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सांस्कृतिक गौरव का संदेश दिया गया। यह प्रस्तुति दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही और लोगों ने इसे देशभक्ति की भावना से जोड़कर देखा।
महिलाओं और बच्चों की देशभक्ति प्रस्तुतियां
कार्यक्रम में महिलाओं और बच्चों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीतों और नृत्य कार्यक्रमों ने सभी को भावविभोर कर दिया। इन प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि राष्ट्रप्रेम और सांस्कृतिक चेतना की भावना नई पीढ़ी में भी मजबूती से विकसित हो रही है।
सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ से हुआ समापन
सम्मेलन का समापन सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ, राष्ट्रभक्ति कार्यक्रमों और सामाजिक एकता से जुड़ी गतिविधियों के साथ हुआ। पूरे आयोजन में अनुशासन, समर्पण और सांस्कृतिक गौरव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
आयोजकों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज को जोड़ने, संस्कृति को सहेजने और राष्ट्रभाव को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।




