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Union Budget 2026: उड़ान योजना को बड़ा बूस्ट, लेकिन धालभूमगढ़ एयरपोर्ट अब भी अधर में

Dhalbhumgarh Airport Project | केंद्र सरकार के Union Budget 2026 में क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करने वाली उड़ान (UDAN) योजना को 27

उड़ान योजना को 550 करोड़, फिर भी जमशेदपुर को क्यों नहीं मिल पा रही उड़ान?

Dhalbhumgarh Airport Project | केंद्र सरकार के Union Budget 2026 में क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करने वाली उड़ान (UDAN) योजना को 27 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 550 करोड़ रुपये का आवंटन मिला है। इस योजना का उद्देश्य छोटे शहरों और दूरदराज़ इलाकों में सस्ती हवाई सेवाओं का विस्तार करना है। लेकिन तमाम घोषणाओं और बजट बढ़ोतरी के बावजूद जमशेदपुर के धालभूमगढ़ एयरपोर्ट (Dhalbhumgarh Airport Project) का भविष्य अब भी अधर में लटका हुआ है।

उड़ान योजना: छोटे शहरों के लिए बड़ी उम्मीद

केंद्रीय बजट में नागरिक उड्डयन मंत्रालय को कुल 4,699.92 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसमें उड़ान योजना के लिए राशि पिछले वर्ष के 434.50 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 550 करोड़ कर दी गई है। सरकार का दावा है कि इससे असेवित और कम सेवा वाले एयरस्ट्रिप्स को विकसित किया जाएगा और छोटे शहरों को देश की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा।

यह योजना हवाई किराए को किफायती बनाने के साथ-साथ क्षेत्रीय आर्थिक विकास को भी गति देने का लक्ष्य रखती है।

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2018 में नींव, 2026 में भी इंतजार

धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना की नींव वर्ष 2018-19 में रखी गई थी। उम्मीद थी कि यह एयरपोर्ट जमशेदपुर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों के लिए गेमचेंजर साबित होगा। लेकिन छह साल बीत जाने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका

हर बजट के साथ उम्मीदें जगती हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत जस की तस बनी हुई है।

150 किमी नियम: सबसे बड़ी कानूनी अड़चन

धालभूमगढ़ एयरपोर्ट के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा है सिविल एविएशन पॉलिसी का 150 किलोमीटर नियम। इस नियम के तहत किसी भी चालू एयरपोर्ट से 150 किमी के दायरे में नया ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट नहीं बनाया जा सकता।

धालभूमगढ़, रांची एयरपोर्ट से लगभग 130–140 किमी की दूरी पर स्थित है, जिस कारण यह नियम परियोजना पर भारी पड़ रहा है।

पर्यावरण और एलिफेंट कॉरिडोर का संकट

परियोजना की दूसरी बड़ी चुनौती है पर्यावरणीय स्वीकृति। प्रस्तावित एयरपोर्ट क्षेत्र घने जंगल में स्थित है और यह इलाका एलिफेंट कॉरिडोर का हिस्सा माना जाता है।

इसी कारण वन विभाग ने अब तक एनओसी देने से इनकार कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि एयरपोर्ट बनने से हाथियों की आवाजाही और जैव विविधता पर गंभीर असर पड़ सकता है।

पर्यावरण मंत्रालय ने मांगा स्पष्टीकरण

जनवरी 2023 में यह मामला फिर से सामने आया था। जुलाई 2023 तक 3.5 किमी अप्रोच रोड का निर्माण जरूर हुआ, लेकिन मुख्य परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी।

प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स संजय श्रीवास्तव के अनुसार, एलिफेंट कॉरिडोर की जांच अभी जारी है। वहीं, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने झारखंड सरकार से कई बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) की ओर से जरूरी जानकारी जल्द देने की बात कही गई है।

आर्थिक राजधानी, लेकिन हवाई कनेक्टिविटी कमजोर

जमशेदपुर को झारखंड की आर्थिक राजधानी कहा जाता है, लेकिन हवाई कनेक्टिविटी के मामले में शहर काफी पीछे है। फिलहाल लोग सोनारी एयरपोर्ट पर निर्भर हैं, जहां केवल छोटे विमान ही उतर सकते हैं।

बड़े विमानों के लिए यात्रियों को रांची या कोलकाता जाना पड़ता है, जिससे समय, खर्च और असुविधा बढ़ जाती है।

सवाल वही: कब उड़ान भरेगा धालभूमगढ़?

बजट में उड़ान योजना को बूस्ट मिलने के बावजूद धालभूमगढ़ एयरपोर्ट की राह आसान नहीं दिख रही। जब तक 150 किमी नियम में छूट और पर्यावरणीय मंजूरी नहीं मिलती, तब तक यह परियोजना फाइलों में ही उड़ान भरती रहेगी।

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