Shaurya Sandhya: जयपुर में 78वें सेना दिवस के अवसर पर आयोजित शौर्य संध्या कार्यक्रम देशभक्ति, साहस और बलिदान का जीवंत प्रतीक बन गया। सवाई मानसिंह स्टेडियम में आयोजित इस भव्य आयोजन में राजनाथ सिंह (Minister of Defence of India Rajnath Singh)ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर अभी समाप्त नहीं हुआ है। जब तक आतंकी सोच का पूरी तरह खात्मा नहीं हो जाता, तब तक शांति के प्रयास जारी रहेंगे।”
उन्होंने कहा कि राजस्थान की धरती ने सदैव भारत की सैन्य परंपरा को मजबूती दी है और यहां का इतिहास शौर्य, पराक्रम और त्याग की अमर गाथाओं से भरा हुआ है।

सेना दिवस: बलिदान और संकल्प का प्रतीक
रक्षा मंत्री ने कहा कि सेना दिवस उन जवानों के अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान को स्मरण करने का अवसर है, जिनके कारण आज भारत सुरक्षित है। वर्ष 1949 में 15 जनवरी को जनरल के.एम. करियप्पा द्वारा पहले भारतीय सेना प्रमुख के रूप में कार्यभार संभालना, औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक था।
उन्होंने कहा कि यह दिन केवल उत्सव का नहीं, बल्कि आत्ममंथन और संकल्प का भी दिन है।
ऑपरेशन सिंदूर: साहस और संतुलन का प्रतीक
राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की सैन्य शक्ति के साथ-साथ उसके राष्ट्रीय स्वभाव को भी दर्शाता है। यह अभियान केवल सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि साहस, संवेदनशीलता और संतुलन का उदाहरण है।
उन्होंने दोहराया कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई सोच-समझकर और मानवीय मूल्यों को ध्यान में रखते हुए की गई है।

भारतीय सैनिक: योद्धा ही नहीं, दार्शनिक भी
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय सैनिक सिर्फ युद्ध लड़ने वाला योद्धा नहीं, बल्कि एक दार्शनिक और कुशल प्रबंधक भी होता है। सैनिक का जीवन दर्शन “सेवा परमो धर्मः” पर आधारित है।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे सैनिकों से निस्वार्थ सेवा, अनुशासन और टीमवर्क का गुण सीखें।
विविधता में एकता की मिसाल है भारतीय सेना
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सेना विविधता में एकता का सजीव उदाहरण है। देश के हर कोने से आए युवा अलग-अलग भाषा, संस्कृति और पहनावे के बावजूद एक लक्ष्य के लिए एकजुट होकर राष्ट्र की रक्षा करते हैं।
सेना केवल सीमाओं की रक्षा नहीं करती, बल्कि आपदा राहत, मानवीय सहायता और राष्ट्र निर्माण में भी अहम भूमिका निभाती है।
2047 तक विश्व की सबसे सशक्त सेना का लक्ष्य
रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सेना के आधुनिकीकरण, सुधार और आत्मनिर्भरता पर तेजी से काम हो रहा है। बदलते वैश्विक हालात में सेनाओं की मजबूती किसी भी देश के अस्तित्व के लिए अनिवार्य है।
उन्होंने महिलाओं की भूमिका बढ़ाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया—एनडीए में बेटियों का प्रवेश और महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन इसका उदाहरण हैं।
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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भजनलाल शर्मा (CM Bhajanlal Sharma)ने कहा कि राजस्थान शौर्य, भक्ति और शक्ति की भूमि है। देश की सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा राजस्थान में है और यहां का हर घर सेना के प्रति समर्पित है।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद आयोजित यह पहली आर्मी डे परेड, भारतीय सेना की जीत का उत्सव है।
शौर्य संध्या में दिखा पराक्रम का भव्य प्रदर्शन
शौर्य संध्या कार्यक्रम में नेपाल सेना के बैंड, पैरामोटर फ्लाईपास्ट, कलरीपयट्टु और मल्लखंब की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
भव्य ड्रोन शो में राष्ट्रीय और ऐतिहासिक आकृतियों के साथ राष्ट्रगान की प्रस्तुति कार्यक्रम का शिखर रही। हजारों दर्शक एकटक आकाश की ओर निहारते रहे।
78वां सेना दिवस और शौर्य संध्या कार्यक्रम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सैन्य शक्ति, राष्ट्रीय एकता और अटूट संकल्प का प्रतीक बन गया। राजनाथ सिंह का संदेश साफ है—आतंकवाद के खिलाफ भारत का संघर्ष निर्णायक और सतत रहेगा।
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