क्यों ‘Divorce Month’ कहलाता है जनवरी? नए साल की शुरुआत में ही क्यों टूटने लगते हैं रिश्ते
जनवरी में तलाक के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी जाती है क्योंकि छुट्टियां खत्म होने के बाद जोड़े अपने नाखुश वैवाहिक जीवन का पुनर्मूल्यांकन करते हैं। विशेषज्ञ इस वैश्विक प्रवृत्ति के पीछे भावनात्मक, वित्तीय और मनोवैज्ञानिक कारणों का खुलासा करते हैं, जिसे तलाक का महीना कहा जाता है।
Divorce Month January: नई शुरुआत की चाह या अधूरे रिश्तों का बोझ? जानिए जनवरी में तलाक के मामलों के पीछे छिपे मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारण
नया साल आते ही लोग अपनी जिंदगी में बदलाव की उम्मीद करते हैं। “New Year, New Life” और “New Beginnings” जैसे जुमले हर तरफ सुनाई देते हैं। लोग नई आदतें अपनाने, पुरानी गलतियों को सुधारने और बेहतर भविष्य की ओर बढ़ने का संकल्प लेते हैं। लेकिन इसी सकारात्मक माहौल के बीच जनवरी का महीना कई शादियों के लिए अंत की शुरुआत भी बन जाता है। यही वजह है कि दुनियाभर में जनवरी को अनौपचारिक रूप से ‘Divorce Month January’ यानी तलाक का महीना कहा जाने लगा है।
जनवरी वह समय होता है जब लोग बीते साल की पूरी भावनात्मक तस्वीर को सामने रखकर अपने रिश्तों का मूल्यांकन करते हैं। कई कपल्स इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि वे लंबे समय से एक ऐसे रिश्ते में फंसे हुए हैं, जो उन्हें खुशी नहीं दे रहा।

जनवरी को ‘तलाक का महीना’ (Divorce Month January) क्यों कहा जाता है?
रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स के अनुसार, दिसंबर के त्योहार—क्रिसमस, न्यू ईयर और फैमिली गैदरिंग—लोगों को कुछ समय के लिए भावनात्मक रूप से जोड़े रखते हैं। इस दौरान कपल्स अक्सर बच्चों, परिवार और सामाजिक दबाव के चलते अपने मतभेदों को नजरअंदाज कर देते हैं।
लेकिन जैसे ही छुट्टियां खत्म होती हैं और रोजमर्रा की जिंदगी शुरू होती है, तब रिश्तों की असल स्थिति सामने आने लगती है। जनवरी लोगों को यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या वे आने वाला पूरा साल भी उसी तनाव और असंतोष के साथ बिताना चाहते हैं।
आंकड़े क्या कहते हैं?
कई अंतरराष्ट्रीय स्टडीज़ और फैमिली लॉ एक्सपर्ट्स के अनुसार, जनवरी के महीने में तलाक के मामलों में लगभग 33% तक की बढ़ोतरी दर्ज की जाती है। इसके उलट नवंबर और दिसंबर में तलाक के केस अपेक्षाकृत कम होते हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि त्योहारों के दौरान लोग “अब नहीं, बाद में” का रवैया अपनाते हैं। लेकिन नया साल आते ही वे अपने लिए फैसला लेने का साहस जुटा पाते हैं।
जनवरी ही क्यों बनता है फैसलों का महीना?
जनवरी केवल तलाक फाइल करने का महीना नहीं होता, बल्कि यह योजना बनाने का समय होता है। इस महीने लोग:
- वकीलों से संपर्क करते हैं
- कानूनी सलाह लेते हैं
- वित्तीय स्थिति का आकलन करते हैं
- बच्चों और भविष्य की प्लानिंग करते हैं
यही कारण है कि तलाक की कानूनी प्रक्रिया फरवरी और मार्च में तेजी पकड़ती है। इसी वजह से कई विशेषज्ञ इसे ‘Divorce Season’ भी कहते हैं। जनवरी में इंटरनेट पर “How to get divorce” जैसे सर्च की संख्या में भी तेज उछाल देखा जाता है।
तलाक के पीछे असली कारण क्या होते हैं?
यह समझना जरूरी है कि सिर्फ महीना ही तलाक का कारण नहीं बनता। सर्वे और काउंसलिंग रिपोर्ट्स के अनुसार, तलाक के पीछे मुख्य रूप से ये कारण होते हैं:
- पार्टनर की बेवफाई
- विचारों और जीवन-लक्ष्यों का मेल न होना
- पैसों को लेकर लगातार विवाद
- इमोशनल सपोर्ट और संवाद की कमी
- लंबे समय से चला आ रहा मानसिक तनाव
जनवरी सिर्फ वह समय होता है जब लोग इन समस्याओं से आंखें मूंदने के बजाय उनका सामना करने का फैसला लेते हैं।
क्या हर कपल के लिए जनवरी खतरे की घंटी है?
बिल्कुल नहीं। कई कपल्स जनवरी को रिश्ते सुधारने का अवसर भी मानते हैं। काउंसलिंग लेना, खुलकर बातचीत करना और आपसी समझ बढ़ाना भी इसी समय शुरू होता है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सही संवाद और समय पर मदद से कई शादियां टूटने से बच सकती हैं।
जनवरी को तलाक का महीना इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह आत्ममंथन, सच्चाई और फैसलों का समय होता है। नया साल लोगों को यह हिम्मत देता है कि वे अपनी जिंदगी में जरूरी बदलाव करें—चाहे वह खुद को बेहतर बनाना हो या एक ऐसे रिश्ते से बाहर निकलना, जो अब सिर्फ बोझ बन चुका है।




