कौशल और नैतिकता का संगम: विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह बना प्रेरणा का मंच
जयपुर में आयोजित विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कौशल शिक्षा को नैतिक मूल्यों के साथ जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल तकनीकी दक्षता ही नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण भी जरूरी है। कार्यक्रम में छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं और उन्हें राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया।
Skill education with ethical values: राष्ट्र निर्माण में कौशल शिक्षा की अहम भूमिका
Skill education with ethical values: जयपुर में आयोजित विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कौशल शिक्षा को राष्ट्र के सर्वांगीण विकास का आधार बताया। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति के पास बेहतर कौशल होता है, उसे कभी रोजगार की कमी नहीं होती। ऐसे व्यक्ति हर परिस्थिति में आत्मनिर्भर बने रहते हैं।
उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि कौशल शिक्षा केवल रोजगार तक सीमित न रहकर देश के समग्र विकास का माध्यम बननी चाहिए। विद्यार्थियों को ऐसी शिक्षा दी जानी चाहिए, जिससे वे समाज और राष्ट्र के लिए उपयोगी साबित हों।
नैतिक शिक्षा से बढ़ेगी विकास की गुणवत्ता
राज्यपाल ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि केवल भौतिक विकास पर्याप्त नहीं है। यदि उसमें नैतिक मूल्यों का समावेश न हो, तो विकास अधूरा रहता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में नैतिक शिक्षा को अनिवार्य रूप से बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि विद्यार्थी जिम्मेदार नागरिक बन सकें।
उन्होंने शिक्षकों से भी आह्वान किया कि वे खुद को लगातार अपडेट रखें और विद्यार्थियों में नकल जैसी प्रवृत्तियों को खत्म करने के लिए प्रेरित करें। शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि सही दिशा दिखाना भी होना चाहिए।
नियमित दीक्षांत समारोह पर जोर
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिए कि दीक्षांत समारोह हर वर्ष आयोजित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भले ही आयोजन छोटा हो, लेकिन नियमितता जरूरी है। समय पर डिग्री मिलने से विद्यार्थियों को करियर में आगे बढ़ने की स्पष्ट दिशा मिलती है।

नई शिक्षा नीति का प्रभाव
राज्यपाल ने नई शिक्षा नीति 2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पूरी तरह भारतीय परिप्रेक्ष्य में तैयार की गई है। इसमें विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास के साथ-साथ उनके चरित्र निर्माण और व्यवहारिक कौशल पर भी ध्यान दिया गया है।
उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि अंग्रेजों ने भारत की शिक्षा व्यवस्था को बदलकर गुलाम मानसिकता को बढ़ावा दिया था। अब समय आ गया है कि शिक्षा को भारतीय मूल्यों के अनुरूप पुनर्स्थापित किया जाए।
युवाओं के लिए संदेश: रचनात्मकता और सीखने की आदत
उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपने कौशल को सीमित न रखें। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे हमेशा सीखते रहें और अपनी रचनात्मकता को विकसित करें।
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उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है, ऐसे में युवाओं को भी खुद को उसी के अनुसार ढालना होगा। सफलता पाने के लिए लक्ष्य ऊंचे रखें और निरंतर प्रयास करते रहें।
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विश्वविद्यालय की उपलब्धियां और सम्मान समारोह
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. देवस्वरूप ने संस्थान की उपलब्धियों और कौशल विकास के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। समारोह के दौरान विद्यार्थियों को डिग्रियां और पदक प्रदान किए गए, जिससे उनके परिश्रम को सम्मान मिला।
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यह दीक्षांत समारोह केवल डिग्री वितरण का मंच नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन में आगे बढ़ने के लिए नई दिशा और प्रेरणा देने वाला अवसर भी बना।
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