सांगानेर-बगरू की 87 कॉलोनियों में बढ़ा आक्रोश, दो लाख लोग जन आंदोलन की तैयारी में
Sanganer colonies protest : जयपुर के सांगानेर और बगरू क्षेत्र की दशकों पुरानी कॉलोनियों के निवासी नियमन और राहत की मांग को लेकर लामबंद हो गए हैं। संघर्ष समिति ने सरकार को चेतावनी दी है कि जल्द समाधान नहीं हुआ तो व्यापक जन आंदोलन और मतदान बहिष्कार जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
Sanganer colonies protest: सांगानेर और बगरू विधानसभा क्षेत्र की करीब 87 कॉलोनियों में रहने वाले लोगों ने अपनी मांगों को लेकर बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी दी है। इन कॉलोनियों के निवासियों का कहना है कि उन्होंने सहकारी समितियों से वैध रूप से भूखंड खरीदकर अपने घर बनाए हैं, लेकिन अब उन्हें अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।
निवासियों के अनुसार, यदि सरकार जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लेती है तो वे संगठित होकर बड़ा जन आंदोलन शुरू करेंगे और आने वाले निकाय चुनावों में मतदान बहिष्कार जैसे कदम भी उठा सकते हैं।
35-40 साल पुरानी कॉलोनियों में रह रहे हजारों परिवार
संघर्ष समिति के अनुसार, सांगानेर और बगरू क्षेत्र में कई कॉलोनियां 35 से 40 वर्षों से बसी हुई हैं। इन कॉलोनियों में रहने वाले लोगों ने सरकार द्वारा पंजीकृत सहकारी समितियों से भूखंड खरीदकर अपने घर बनाए हैं।
लोगों का कहना है कि उन्होंने अपनी जीवनभर की कमाई और वित्तीय संस्थानों से लिए गए ऋण के सहारे अपने आशियाने तैयार किए हैं। समय के साथ ये कॉलोनियां पूरी तरह विकसित हो चुकी हैं और वर्तमान में लगभग 80 से 100 प्रतिशत तक आबाद हैं।
कई योजनाओं का पहले हो चुका है नियमन
संघर्ष समिति का दावा है कि राज्य की पूर्ववर्ती सरकारों ने समय-समय पर सर्कुलर जारी कर ऐसी योजनाओं का नियमन किया है।

बताया जा रहा है कि इन 87 कॉलोनियों में से लगभग 20 से 25 कॉलोनियों का पहले ही नियमन किया जा चुका है। वहीं करीब 27 योजनाओं के लिए मंडल द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी जारी किया जा चुका है।
निवासियों का कहना है कि यदि कुछ कॉलोनियों को नियमन का लाभ मिल सकता है, तो बाकी कॉलोनियों के साथ अलग व्यवहार क्यों किया जा रहा है।
सभी मूलभूत सुविधाएं पहले से उपलब्ध
इन कॉलोनियों में रहने वाले लोगों के मुताबिक, सरकार द्वारा यहां बिजली, पानी, सीवरेज और सड़क जैसी सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।
इससे साफ है कि ये क्षेत्र लंबे समय से आबाद और विकसित हैं। ऐसे में अचानक इन कॉलोनियों की स्थिति पर सवाल उठना यहां के लोगों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
हाईकोर्ट के आदेश पर जताई आपत्ति
संघर्ष समिति ने 12 अगस्त 2025 को आए उच्च न्यायालय के आदेश पर भी सवाल उठाए हैं। समिति का कहना है कि यह निर्णय एक पक्ष को सुने बिना दिया गया है, जिससे बड़ी संख्या में आम लोगों के हित प्रभावित हो सकते हैं।
समिति का मानना है कि जनहित याचिका का उद्देश्य आम जनता के हितों की रक्षा करना होता है, लेकिन इस मामले में लाखों लोगों के हितों को पर्याप्त रूप से नहीं सुना गया।
शांतिपूर्ण पैदल मार्च और समर्थन

संघर्ष समिति ने अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए कई प्रयास किए हैं। इसी क्रम में 8 मार्च को क्षेत्र के लोगों ने शांतिपूर्ण पैदल मार्च निकाला।
इस मार्च का स्थानीय व्यापारिक संगठनों ने भी समर्थन किया। श्योपुर व्यापार मंडल ने आंदोलन के समर्थन में बाजार बंद रखा और पैदल मार्च के साथ-साथ सद्बुद्धि यज्ञ का आयोजन भी किया गया।
आंदोलनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी तरह का टकराव नहीं बल्कि सरकार तक अपनी समस्या पहुंचाना है।
आंदोलन की चेतावनी और मतदान बहिष्कार की तैयारी
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि सरकार जल्द कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो लगभग दो लाख लोग बड़े स्तर पर जन आंदोलन शुरू करेंगे।
उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले निकाय चुनावों में इन कॉलोनियों के निवासी मतदान का बहिष्कार करने पर भी विचार कर सकते हैं।
समिति के महासचिव परशुराम चौधरी, अध्यक्ष रघुनंदन सिंह हाड़ा, मीडिया प्रभारी ललित किशोर शर्मा और सचिव राजेंद्र सिंह राजावत सहित अन्य पदाधिकारियों ने सरकार से जल्द हस्तक्षेप कर जनहित में समाधान निकालने की मांग की है।
सरकार से जल्द निर्णय की मांग
संघर्ष समिति का कहना है कि सरकार को मौके की वास्तविक स्थिति और रिकॉर्ड को ध्यान में रखते हुए उच्च न्यायालय में मजबूत पक्ष रखना चाहिए।
साथ ही सरकार अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए इन कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को राहत प्रदान करे, ताकि वर्षों से बसे परिवारों को अपने घरों को लेकर असमंजस की स्थिति का सामना न करना पड़े।




