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Ram Se Ram Tak Katha: दिल्ली में तीन दिन की आध्यात्मिक महाकुंभ, ‘राम से राम तक’ दिव्य कथा और दुर्लभ वैदिक अनुष्ठानों का विराट आयोजन

मानसिक अशांति, रोग और जीवन संघर्षों से जूझ रहे समाज को आध्यात्मिक संबल देने के उद्देश्य से नई दिल्ली के जापानी पार्क में 21 से 23 मार्च तक भव्य धार्मिक आयोजन होगा। जगद्गुरु स्वामी वेद पुत्र जी महाराज के सान्निध्य में 'राम से राम तक' दिव्य कथा, द्वादश ज्योतिर्लिंग रुद्राभिषेक और हनुमान साधना का आयोजन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से किया जाएगा।

Ram Se Ram Tak Katha: वर्तमान समय में जब आम जन मानसिक तनाव, पारिवारिक उलझनों, आर्थिक दबाव और आंतरिक अस्थिरता से जूझ रहा है, ऐसे दौर में आध्यात्मिक मार्गदर्शन की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है। इसी उद्देश्य से आगामी 21, 22 और 23 मार्च को नई दिल्ली के जापानी पार्क में एक भव्य आध्यात्मिक आयोजन किया जा रहा है।
यह आयोजन भैरव पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी वेद पुत्र जी महाराज के पावन सान्निध्य में संपन्न होगा।

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‘राम से राम तक’- केवल कथा नहीं, जीवन दर्शन

इस आयोजन का केंद्रबिंदु ‘राम से राम तक’ दिव्य कथा है, जिसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के आदर्शों से जोड़ना है। यह कथा केवल धार्मिक व्याख्यान नहीं, बल्कि जीवन के संघर्षों, निर्णयों और कर्तव्यों को समझने की एक आध्यात्मिक यात्रा है। मर्यादा, धैर्य, त्याग और आत्मबल जैसे गुणों को व्यवहारिक जीवन से जोड़ते हुए कथा बालकांड से लेकर उत्तरकांड तक संपूर्ण रामायण का सार प्रस्तुत करेगी।

तीन दिन, द्वादश ज्योतिर्लिंग – दुर्लभ रुद्राभिषेक

इस आयोजन की सबसे विशेष बात है तीनों दिनों तक होने वाला द्वादश ज्योतिर्लिंग भावाधारित सामूहिक रुद्राभिषेक। सोमनाथ से घृष्णेश्वर तक सभी 12 ज्योतिर्लिंगों का वैदिक मंत्रों और संकल्प के साथ अभिषेक किया जाएगा। इस साधना के माध्यम से रोग, ऋण, भय, शोक और दीर्घकालीन बाधाओं से मुक्ति तथा जीवन में स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा का संकल्प लिया जाएगा।

हनुमान साधना-आत्मबल जागरण का विशेष माध्यम

आयोजन में श्री हनुमान जी की उपासना को विशेष महत्व दिया गया है।

  • प्रथम दिवस: 108 बार हनुमान चालीसा पाठ
  • द्वितीय दिवस: 108 बार हनुमान अष्टक पाठ
  • तृतीय दिवस: 108 बार बजरंग बाण पाठ

आयोजकों के अनुसार यह त्रिदिवसीय साधना भय नाश, संकट मुक्ति और आत्मविश्वास जागरण के लिए अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।

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दिव्य पुष्पार्चन-भावों की मौन प्रार्थना

दिव्य पुष्पार्चन इस आयोजन का भावनात्मक केंद्र रहेगा, जहां श्रद्धालु शब्दों के बजाय अपने भाव, पीड़ा, प्रार्थना और संकल्प पुष्पों के माध्यम से ईश्वर को अर्पित करेंगे। यह प्रक्रिया आत्मिक शांति और आंतरिक जुड़ाव का माध्यम बनेगी।

देश-विदेश से जुड़ेंगे श्रद्धालु

आयोजन को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आयोजित किया जाएगा। इससे देश-विदेश में बैठे श्रद्धालु भी इस दिव्य कार्यक्रम से जुड़ सकेंगे और वैदिक अनुष्ठानों एवं कथा का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।

एक कार्यक्रम नहीं, सामाजिक संकल्प

आयोजकों का कहना है कि यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को मानसिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक स्थिरता देने का प्रयास है। यह कार्यक्रम व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाकर जीवन की चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा देता है।

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