सांगानेर में परशुराम जन्मोत्सव पर सामाजिक एकता का संदेश, ब्राह्मण महासभा ने लिया धर्म-संस्कृति रक्षा का संकल्प
भगवान परशुराम जन्मोत्सव के अवसर पर प्रताप नगर सांगानेर में राजस्थान ब्राह्मण महासभा द्वारा भव्य पूजन और महाआरती का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाज के प्रमुख लोगों ने एकजुट होकर सनातन परंपराओं, सामाजिक मूल्यों और राष्ट्रहित के संरक्षण का संकल्प लिया। आयोजन में परिवारों की सक्रिय भागीदारी ने इसे केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक जागरूकता का केंद्र बना दिया।
Parshuram Jayanti Sanganer Event: सांगानेर के प्रताप नगर क्षेत्र में रविवार, 19 अप्रैल 2026 को भगवान परशुराम जी के जन्मोत्सव को एक विशेष सामाजिक और सांस्कृतिक स्वरूप में मनाया गया। राजस्थान ब्राह्मण महासभा, प्रताप नगर इकाई द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ समाज में एकता और जागरूकता का संदेश भी प्रसारित किया।
सांगानेर में परशुराम जयंती पर सामाजिक एकजुटता का अनूठा संदेश
कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत पूजन से हुई, जिसमें भगवान परशुराम जी की प्रतिमा के समक्ष वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धापूर्वक आराधना की गई। इसके बाद आयोजित महाआरती में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से भाग लिया। पूरे वातावरण में धार्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार स्पष्ट रूप से महसूस किया गया।
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ पूजन एवं महाआरती
इस आयोजन की खास बात यह रही कि इसे केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित न रखते हुए सामाजिक एकता और जिम्मेदारी का मंच बनाया गया। कार्यक्रम में मौजूद गणमान्य व्यक्तियों ने समाज के विकास, राष्ट्रहित और सनातन धर्म की रक्षा को लेकर सामूहिक संकल्प लिया। इस पहल ने आयोजन को एक नई दिशा दी, जो वर्तमान समय में सामाजिक समरसता की आवश्यकता को दर्शाती है।
गणमान्य व्यक्तियों की रही विशेष उपस्थिति
कार्यक्रम में महानगर अध्यक्ष गोविंद जौहरी जी सहित बिरधीचंद शर्मा, जगदीश नारायण पटेल, विष्णु कुमार शर्मा, एन डी शर्मा, ब्रह्मा शर्मा, पं. सुधाकर शर्मा, शीतल बाबू शर्मा और रजनी शर्मा जैसे कई प्रमुख समाजसेवी उपस्थित रहे। इन सभी ने अपने विचार साझा करते हुए समाज में शिक्षा, संस्कार और एकजुटता के महत्व पर जोर दिया।
विशेष रूप से यह आयोजन पारिवारिक सहभागिता के लिए भी उल्लेखनीय रहा। बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और बच्चे भी कार्यक्रम में शामिल हुए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि नई पीढ़ी भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने के लिए उत्साहित है। इस प्रकार के आयोजन सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने भगवान परशुराम जी के जीवन से प्रेरणा लेते हुए धर्म, न्याय और साहस के मूल्यों को अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज को इन आदर्शों की पहले से अधिक आवश्यकता है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत और संस्कारित समाज का निर्माण किया जा सके।
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धर्म, समाज और राष्ट्रहित पर दिया गया जोर
अंत में सभी उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया कि वे समाज के उत्थान, राष्ट्र की प्रगति और सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य करेंगे। यह आयोजन केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि सामाजिक जागरूकता और एकजुटता का प्रतीक बनकर उभरा।
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