BJP अध्यक्ष बनेंगे या उपराष्ट्रपति? मनोहर खट्टर ने खुद खोल दी बड़ी सच्चाई!

मनोहर खट्टर: भाजपा अध्यक्ष या उपराष्ट्रपति (Manohar Lal Khattar BJP President Vice President) ? खुद दिया चौंकाने वाला जवाब

नई दिल्ली: देश की राजनीति इस समय दो बड़े फैसलों की दहलीज पर खड़ी है। एक तरफ उपराष्ट्रपति का पद खाली हो चुका है, वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष (Manohar Lal Khattar BJP President Vice President) की तलाश में जुटी है। हैरानी की बात ये है कि दोनों ही पदों के लिए एक ही नाम चर्चा में है — मनोहर लाल खट्टर।

संघ की पृष्ठभूमि से आने वाले, दो बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रह चुके और अब केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्यरत खट्टर को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। सवाल है: क्या खट्टर को उपराष्ट्रपति की संवैधानिक कुर्सी मिलेगी या भाजपा अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी?

खट्टर का जवाब: “पद नहीं, जिम्मेदारी मायने रखती है”

एक टीवी कार्यक्रम में जब उनसे यह सीधा सवाल पूछा गया, तो खट्टर ने साफ कहा:

“मैं पद नहीं चुनता, जो जिम्मेदारी दी जाती है, उसे पूरी निष्ठा से निभाता हूं। पद सेवा का माध्यम होता है, उसका आकार नहीं देखा जाता।”

उनका यह जवाब राजनीतिक संकेतों से भरा हुआ है — न इंकार, न पुष्टि।

क्यों चर्चा में हैं खट्टर?

  • आरएसएस से मजबूत जुड़ाव
  • हरियाणा में दो बार मुख्यमंत्री
  • अब केंद्रीय मंत्री के रूप में प्रभावशाली
  • संगठन के जानकार और उत्तर भारत का मजबूत चेहरा

यही कारण है कि वे भाजपा अध्यक्ष और उपराष्ट्रपति दोनों पदों के लिए उपयुक्त माने जा रहे हैं।

उपराष्ट्रपति पद पर नया मोड़

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने हाल ही में स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर इस्तीफा दे दिया। लेकिन सूत्रों की मानें तो एक राजनीतिक मुद्दे पर विपक्ष का समर्थन करने से पार्टी में असहजता बढ़ी, जिससे इस्तीफा देना पड़ा।

इस संदर्भ में खट्टर ने परोक्ष रूप से कहा:

“विपक्ष के प्रस्तावों को स्वीकार करना, सरकार की रणनीति के खिलाफ होता है।”

भाजपा अध्यक्ष पद और जातीय संतुलन

जेपी नड्डा के केंद्र में मंत्री बनने के बाद भाजपा को नया अध्यक्ष चाहिए। पार्टी न सिर्फ अनुभव देख रही है, बल्कि जातीय संतुलन, उत्तर-दक्षिण समीकरण, और आगामी जनगणना व परिसीमन को भी ध्यान में रख रही है।

खट्टर उत्तर भारत से आते हैं, लेकिन उनका संगठन पर नियंत्रण और सधा हुआ नेतृत्व उन्हें दक्षिण भारत में भी एक स्वीकार्य चेहरा बना सकता है।

भाजपा के अंदरूनी हलकों में अब यह सवाल सबसे अहम हो गया है —
मनोहर खट्टर: क्या बनेंगे संगठन के मुखिया या देश के दूसरे सबसे बड़े संवैधानिक पद के उत्तराधिकारी?

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