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ईरान में हालात बेकाबू: कई शहरों में उग्र प्रदर्शन, इंटरनेट-फोन सेवाएं ठप; अब तक 62 लोगों की मौत

ईरान में हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। देश के कई प्रमुख शहरों में जारी उग्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान अब तक कम से कम 62 लोगों की मौत हो चुकी है

Iran Protests Deaths: मध्य पूर्व के देश ईरान में हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। देश के कई प्रमुख शहरों में जारी उग्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान अब तक कम से कम 62 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया है। बढ़ती हिंसा को देखते हुए सरकार ने कई इलाकों में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद कर दी हैं, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।

अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन Human Rights Activists News Agency (HRANA) ने शुक्रवार को यह आंकड़े जारी किए। संगठन का कहना है कि ये आंकड़े जमीनी सूत्रों, प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय रिपोर्ट्स के आधार पर जुटाए गए हैं।

62 लोगों की मौत, आंकड़ा और बढ़ने की आशंका

HRANA के अनुसार, प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में अब तक कम से कम 62 लोगों की जान जा चुकी है। इनमें छात्र, मजदूर और आम नागरिक शामिल हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का दावा है कि कई मामलों में सुरक्षाबलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया, जिससे मौतों की संख्या में इजाफा हुआ।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी पाबंदियों और सूचना पर रोक के चलते वास्तविक मृतकों की संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है।

2,300 से ज्यादा गिरफ्तारियां, जेलें भरने लगीं

विरोध प्रदर्शनों के दौरान अब तक 2,300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार लोगों में विश्वविद्यालयों के छात्र, फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूर, महिला कार्यकर्ता और आम नागरिक शामिल हैं। कई परिवारों का आरोप है कि उन्हें यह तक नहीं बताया जा रहा कि उनके परिजनों को कहां रखा गया है।

मानवाधिकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों से हालात और बिगड़ सकते हैं।

आखिर क्यों भड़का जनआक्रोश?

ईरान में जारी इन प्रदर्शनों की जड़ में कई गंभीर सामाजिक और आर्थिक कारण हैं।
मुख्य वजहें इस प्रकार हैं:

  • लगातार बढ़ती महंगाई
  • बेरोजगारी और घटते रोजगार के अवसर
  • आर्थिक प्रतिबंधों से कमजोर होती अर्थव्यवस्था
  • सरकारी नीतियों और प्रशासनिक फैसलों से नाराजगी

हाल के महीनों में खाद्य पदार्थों, ईंधन और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम जनता का जीवन मुश्किल हो गया है। यही गुस्सा अब सड़कों पर दिखाई दे रहा है।

सरकार की सख्ती, इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद

प्रदर्शनों को रोकने के लिए ईरानी सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। कई शहरों में इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह बंद कर दी गई हैं, जबकि कुछ इलाकों में मोबाइल नेटवर्क भी ठप है। इसके अलावा:

  • संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई
  • रात के समय कर्फ्यू जैसे हालात
  • सार्वजनिक सभाओं और रैलियों पर रोक

सरकार का कहना है कि ये कदम “कानून-व्यवस्था बनाए रखने” के लिए जरूरी हैं, जबकि मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि यह आवाज दबाने की कोशिश है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और प्रतिक्रिया

ईरान में बढ़ती हिंसा और मौतों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ती जा रही है। कई देशों और वैश्विक मानवाधिकार संगठनों ने ईरानी सरकार से संयम बरतने की अपील की है।

संयुक्त राष्ट्र और अन्य संगठनों ने मांग की है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के अधिकारों की रक्षा की जाए और इंटरनेट बंद करने जैसे कदमों पर पुनर्विचार किया जाए।

आगे क्या?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच संवाद नहीं हुआ, तो हालात और विस्फोटक हो सकते हैं। आर्थिक संकट और जनता का गुस्सा फिलहाल थमता नहीं दिख रहा, ऐसे में आने वाले दिनों में ईरान के लिए स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

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