Delhi Blast Jaish-e-Mohammed Connection! दिल्ली ब्लास्ट में डॉक्टर शाहीन की गिरफ्तारी के बाद फिर चर्चा में आया जैश-ए-मोहम्मद — कहां से शुरू हुई पूरी कहानी?
Delhi Blast Jaish-e-Mohammed Connection: दिल्ली के लाल क़िला क्षेत्र में हुए ब्लास्ट ने पूरे देश को झकझोर दिया। इस धमाके में 10 लोगों की मौत और 20 से अधिक लोग घायल हुए। मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए। इसी कड़ी में फरीदाबाद की डॉक्टर शाहीन शाहिद को गिरफ्तार किया गया, जिसकी भूमिका ने जांच एजेंसियों को पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद तक पहुंचा दिया।
जांच अधिकारियों के अनुसार, शाहीन भारत में जैश के महिला संगठन ‘जमात-उल-मोमिनात’ की जिम्मेदारी संभाल रही थी। वह महिलाओं की भर्ती, कट्टरपंथ फैलाने और ग्राउंड नेटवर्क मजबूत करने का काम कर रही थी। इस गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ गया — आखिर यह संगठन कैसे शुरू हुआ और भारत पर हमले करने में इसकी क्या भूमिका रही?

कैसे शुरू हुई जैश-ए-मोहम्मद की कहानी?
जैश-ए-मोहम्मद की नींव रखने वाला मसूद अजहर 90 के दशक की शुरुआत में पाकिस्तान के बहावलपुर में सक्रिय हुआ। वह पहले हरकत-उल-मुजाहिद्दीन से जुड़ा था, जहां उसे अफगानिस्तान में ट्रेनिंग के लिए भेजा गया।
शारीरिक रूप से कमजोर होने के कारण वह ट्रेनिंग तो पूरी नहीं कर पाया, लेकिन उसकी स्पीच देने की क्षमता ने उसे संगठन के भीतर लोकप्रिय बना दिया।
उसे आतंकी गतिविधियों को महिमामंडित करने वाली मैगजीन ‘सदा-ए-मुजाहिद’ की जिम्मेदारी दी गई, जो आतंकी भर्ती का प्रमुख हथियार थी।

1994 में मसूद अजहर की भारत में एंट्री
29 जनवरी 1994 को मसूद ने फर्जी पुर्तगाली पासपोर्ट के सहारे दिल्ली में प्रवेश किया। इसके बाद वह देवबंद, सहारनपुर, लखनऊ और दिल्ली के कई स्थानों पर रुका।
8 फरवरी 1994 को वह कश्मीर पहुंचा जहां उसे स्थानीय आतंकी ठिकानों से मिलवाया गया।
लेकिन 11 फरवरी 1994 को वह भारतीय सेना और J&K पुलिस द्वारा चेकपोस्ट पर गिरफ्तार कर लिया गया।
जेल में उगले कई राज
जांच रिपोर्टों के अनुसार, तिहाड़ और कोट बलवल जेल में मसूद ने:
- पाकिस्तान के आतंकी ढांचे
- हरकत-उल-मुजाहिद्दीन और हरकत-उल-जिहाद का विलय
- PoK में आतंकी ट्रेनिंग कैंप
- भारत के खिलाफ उनकी रणनीतियां
जैसी कई अहम जानकारियां दीं।
कई कोशिशों के बाद मसूद को छुड़वाया गया
- 1994 – ब्रिटिश और अमेरिकी नागरिकों का अपहरण करवाया गया, लेकिन साजिश नाकाम।
- 1999 – कोट बलवल जेल से सुरंग बनाकर भागने की कोशिश, असफल।
- 24 दिसंबर 1999 –
जैश ने IC-814 विमान का कंधार हाईजैक किया और बदले में मसूद अजहर को रिहा करने की मांग रखी।
भारत को यात्रियों की सुरक्षा के लिए मसूद को रिहा करना पड़ा।
2000 में बनी जैश-ए-मोहम्मद
रिहाई के एक साल के भीतर ही मसूद ने जैश-ए-मोहम्मद (JeM) की स्थापना की।
इसके बाद भारत में कई बड़े आतंकी हमले हुए:
- 2001 – संसद हमला
- 2016 – पठानकोट हमला
- 2019 – पुलवामा हमला
जमात-उल-मोमिनात — जैश का महिला विंग
पाकिस्तान में मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर इस संगठन का नेतृत्व करती है।
उनका दावा है कि महिलाओं को उतनी ही ट्रेनिंग दी जाती है जितनी पुरुष आतंकियों को।
ट्रेनिंग चरण:
- दौरा-ए-तस्किया (15 दिन)
- दौरा-आयत-उल-निसा (धार्मिक कट्टरपंथ)
इसी ऑनलाइन मॉड्यूल से जुड़कर डॉ. शाहीन शाहिद भारत में महिला नेटवर्क संचालित कर रही थी।
डॉ. शाहीन क्या कर रही थी?
जांच एजेंसियों के अनुसार:
- जैश की विचारधारा फैलाना
- महिलाओं की भर्ती
- दिल्ली-NCR में ग्राउंड सेल सक्रिय करना
- पाकिस्तान स्थित सादिया अजहर से संपर्क
डॉक्टर होने के कारण वह समाज में आसानी से अपना प्रभाव बना लेती थी, जिससे भर्ती अभियान को बढ़ावा मिलता था।
दिल्ली ब्लास्ट ने एक बार फिर यह उजागर कर दिया कि कैसे पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद भारत में अपने नेटवर्क को धीमे-धीमे फैलाते हैं।
डॉ. शाहीन की गिरफ्तारी इस बात का प्रमाण है कि अब यह संगठन महिला विंग का भी सक्रिय रूप से इस्तेमाल कर रहा है।
जांच एजेंसियां अब उस पूरे मॉड्यूल को ट्रैक कर रही हैं, जो दिल्ली ब्लास्ट और कश्मीर–फरीदाबाद कनेक्शन को जोड़ता है।




