e-Governance Conference: जयपुर में आयोजित 29वीं राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस कॉन्फ्रेंस का समापन भविष्य की डिजिटल शासन व्यवस्था के स्पष्ट रोडमैप के साथ हुआ। सम्मेलन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार उपयोग, नागरिक-केंद्रित सेवाओं, प्रशासनिक नवाचार और डिजिटल गवर्नेंस को नई दिशा देने पर जोर दिया गया। साथ ही विशेषज्ञों के सुझावों को राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू करने की घोषणा और राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कारों का वितरण भी किया गया।
जयपुर में आयोजित 29वीं राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस कॉन्फ्रेंस (NCEG) का समापन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि देश में डिजिटल गवर्नेंस के अगले चरण की शुरुआत का संकेत बन गया। सम्मेलन के अंतिम दिन केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका जिम्मेदार और बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग ही भविष्य के सुशासन की वास्तविक पहचान बनेगा। वहीं राजस्थान सरकार ने सम्मेलन के दौरान सामने आए नवाचारों और सुझावों को जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू करने की घोषणा कर इस आयोजन को सीधे कार्यान्वयन से जोड़ दिया।
एआई का भविष्य जिम्मेदार उपयोग पर निर्भर
समापन समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तकनीक आधारित शासन प्रणाली विकसित कर रही है। उन्होंने कहा कि आज एआई शासन व्यवस्था का वैकल्पिक नहीं बल्कि अनिवार्य हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसका उपयोग कितनी जिम्मेदारी और विवेक के साथ किया जाता है।
उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सुधारों के तहत केंद्र सरकार ने कई पुराने और अप्रासंगिक कानून समाप्त कर प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाया है। मिशन कर्मयोगी और सीपीग्राम्स जैसी पहलें आज भारत के सुशासन मॉडल की पहचान बन चुकी हैं, जिन्हें कई देशों ने भी अपनाना शुरू किया है।
भारत@2047 के साथ छोटे लक्ष्य भी जरूरी
डॉ. सिंह ने राज्यों से अपील की कि वे केवल वर्ष 2047 के दीर्घकालिक विजन तक सीमित न रहें, बल्कि अल्पकालिक और मापने योग्य लक्ष्य भी तय करें। उन्होंने तेजी से बदलती तकनीक का उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ दशक पहले तक आम जीवन का हिस्सा रहे वीसीआर और एसटीडी बूथ आज इतिहास बन चुके हैं। इसी तरह आने वाले वर्षों में सरकारी कार्यप्रणाली भी डिजिटल तकनीकों के कारण पूरी तरह बदल सकती है।
राजस्थान में लागू होंगे सम्मेलन के नवाचार
राजस्थान के सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि यह सम्मेलन केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं रहेगा। विशेषज्ञों द्वारा साझा किए गए सुझावों, नवाचारों और सफल मॉडलों का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा तथा उपयोगी योजनाओं को राज्य के विभिन्न जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि भारत आज केवल एआई की चर्चा नहीं कर रहा, बल्कि जिम्मेदार और समावेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। तकनीक का वास्तविक उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक बेहतर सेवाएं पहुंचाना है।
डिजिटल गवर्नेंस को मिला नया मंच
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि ई-गवर्नेंस अब केवल सरकारी सिस्टम के प्रबंधन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि नई संभावनाओं को साकार करने का माध्यम बन चुका है। उन्होंने बताया कि दो दिवसीय सम्मेलन में करीब 200 विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए, जबकि लगभग 100 डिजिटल प्लेटफॉर्म और तकनीकी समाधानों का प्रदर्शन किया गया। इससे राज्यों को नई तकनीकों और सफल मॉडलों को समझने का अवसर मिला।
केंद्रीय प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग की सचिव निवेदिता शुक्ला वर्मा ने बताया कि इस वर्ष राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कारों के लिए 1.65 लाख ग्राम पंचायतों से नामांकन प्राप्त हुए, जो यह दर्शाता है कि डिजिटल नवाचार अब ग्रामीण भारत तक मजबूत तरीके से पहुंच चुके हैं।
17 उत्कृष्ट परियोजनाओं को मिला राष्ट्रीय सम्मान
सम्मेलन के दौरान राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 भी प्रदान किए गए। सात श्रेणियों में कुल 17 परियोजनाओं को सम्मानित किया गया, जिनमें 10 स्वर्ण, 6 रजत और एक जूरी पुरस्कार शामिल रहे।
स्वर्ण पुरस्कार पाने वाली प्रमुख परियोजनाओं में कृषि मंत्रालय का एग्री स्टैक, उपभोक्ता मामलों का ई-जागृति प्लेटफॉर्म, प्रयागराज महाकुंभ-2025 डिजिटल प्रबंधन, स्वास्थ्य मंत्रालय की एआई-सक्षम ई-संजीवनी सेवा, केरल हाईकोर्ट की डिजिटल केस मैनेजमेंट प्रणाली, आईसीएमआर, इसरो, मध्य प्रदेश की ई-नगरपालिका परियोजना और बैंक ऑफ बड़ौदा की डिजिटल बैंकिंग पहल शामिल रहीं।
सम्मेलन के दौरान जयपुर डिक्लेरेशन जारी किया गया तथा साइटेशन बुकलेट, एक्सीलेंस बुकलेट और कंपेंडियम का भी विमोचन हुआ। इसके साथ ही 29वीं राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस कॉन्फ्रेंस ने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत का अगला प्रशासनिक बदलाव केवल डिजिटल नहीं, बल्कि जिम्मेदार, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित तकनीक पर आधारित होगा।

