राजस्थान

राजस्थान बोर्ड एक्सीलेंस सेलिब्रेट: विद्या भारती ने मेरिट और वैल्यूज़-बेस्ड एजुकेशन 2026 को ऑनर ​​किया

राजस्थान में आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह ने यह स्पष्ट किया कि शिक्षा केवल परीक्षा परिणाम तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें नैतिकता, संस्कृति और व्यक्तित्व निर्माण की अहम भूमिका है। विद्या भारती के इस आयोजन में मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के मूल्यों और भारतीय ज्ञान परंपरा को केंद्र में रखकर शिक्षा के व्यापक दृष्टिकोण को सामने लाया गया।

Rajasthan Board Excellence: राजस्थान में इस वर्ष माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के परिणामों ने केवल अंकतालिकाओं में ही नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार का संकेत दिया है। इसी बदलते शैक्षिक परिदृश्य को रेखांकित करने के उद्देश्य से विद्या भारती राजस्थान ने बिड़ला ऑडिटोरियम में प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन किया, जो पारंपरिक पुरस्कार वितरण से कहीं अधिक एक वैचारिक मंच बनकर उभरा।

इस आयोजन में मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित करने के साथ-साथ शिक्षा के बदलते स्वरूप पर भी गहन चर्चा की गई। समारोह में श्री श्री 108 ओमदास जी महाराज का सान्निध्य रहा, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में शिक्षा एवं पंचायत राज मंत्री श्री मदन दिलावर ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विद्या भारती के अखिल भारतीय संगठन मंत्री माननीय गोविन्द चन्द्र महंत ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में शिक्षा को केवल परीक्षा परिणामों तक सीमित रखना एक संकीर्ण दृष्टिकोण है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य विद्यार्थियों में नैतिकता, अनुशासन, संस्कार और भारतीय संस्कृति के प्रति जुड़ाव विकसित करना होना चाहिए।

उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 के अनुरूप विद्या भारती पंचपदी शिक्षा पद्धति के माध्यम से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर कार्य कर रही है। इस पद्धति में ज्ञान, व्यवहार, संस्कार और कौशल के संतुलित विकास को प्राथमिकता दी जाती है।

समारोह में यह भी रेखांकित किया गया कि बदलते वैश्विक परिवेश में विद्यार्थियों को केवल स्थानीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सक्षम बनाना आवश्यक है। इसी दृष्टि से संस्था मातृभाषा के साथ-साथ विदेशी भाषाओं के शिक्षण को भी प्रोत्साहित कर रही है, ताकि छात्र वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पीछे न रहें।

मुख्य अतिथि श्री मदन दिलावर ने अपने वक्तव्य में कहा कि राज्य सरकार भी अब शिक्षा प्रणाली में मूल्यों को पुनर्स्थापित करने की दिशा में सक्रिय है। उन्होंने बताया कि सरकारी विद्यालयों में नैतिक शिक्षा, प्रार्थना सभाओं और भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जो शिक्षा के भारतीयकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस अवसर पर कक्षा 10वीं और 12वीं के कुल 47 विद्यार्थियों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। यह सम्मान केवल उनकी उपलब्धियों का उत्सव नहीं था, बल्कि अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बना।

समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में न्यायाधीश श्रीमती कल्पना पारीक और न्यायाधीश लव प्रजापति की उपस्थिति रही। इसके साथ ही विद्या भारती के मंत्री शिवप्रसाद जी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक निम्बाराम जी और हरदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर नन्दकिशोर पाण्डेय ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

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करीब 1300 लोगों की सहभागिता वाले इस आयोजन में शिक्षा, संस्कार और समाज के बीच गहरे संबंध को महसूस किया गया। कार्यक्रम का समापन वंदे मातरम के साथ हुआ, जिसने पूरे वातावरण को एक सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया।

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यह समारोह इस बात का उदाहरण बना कि जब शिक्षा में मूल्य, संस्कृति और आधुनिकता का संतुलन स्थापित होता है, तब ही वास्तविक अर्थों में समाज का समग्र विकास संभव हो पाता है।

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