मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत को राहत! रूस ने बढ़ाई तेल सप्लाई की पेशकश

Russia Oil Supply India: होर्मुज संकट और बढ़ती वैश्विक चिंता

Russia Oil Supply India: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता गहराती जा रही है। ईरान द्वारा Strait of Hormuz पर नियंत्रण का दावा किए जाने के बाद कच्चे तेल की आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा चोकपॉइंट्स में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की ढुलाई होती है।

इस घटनाक्रम के बीच भारत जैसे बड़े आयातक देशों के सामने ऊर्जा सुरक्षा की चुनौती खड़ी हो गई है। हालांकि, इस संकट की घड़ी में रूस ने भारत के लिए राहत भरी घोषणा की है।

रूस का बड़ा ऐलान

रूसी उपप्रधानमंत्री Alexander Novak ने इंटरफैक्स न्यूज एजेंसी से बातचीत में कहा कि रूस भारत और चीन को तेल सप्लाई बढ़ाने के लिए तैयार है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब होर्मुज क्षेत्र में सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है।

रूस की इस पेशकश को भारत के लिए संभावित ‘बफर’ के रूप में देखा जा रहा है, जिससे आपूर्ति में किसी भी कमी की भरपाई की जा सके।

भारत को कितना मिल रहा है रूसी तेल?

डेटा एनालिटिक्स फर्म केप्लर के अनुसार, फरवरी महीने में रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना रहा। फरवरी में रूस से भारत को 1 मिलियन बैरल प्रतिदिन (mbd) से थोड़ा अधिक तेल मिला, जो जनवरी के 1.1 mbd से मामूली कम था।

वहीं सऊदी अरब ने रिकॉर्ड शिपमेंट के साथ अपनी आपूर्ति लगभग 30% बढ़ाकर 1 mbd से अधिक कर दी। इसके बावजूद रूस ने शीर्ष आपूर्तिकर्ता का स्थान बरकरार रखा।

क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?

Strait of Hormuz वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण मार्ग है। भारत का लगभग 2.5 से 2.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल इसी रास्ते से आता है। यह तेल मुख्य रूप से इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत से आयात किया जाता है।

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अधिकारियों ने इस जलमार्ग पर नियंत्रण का दावा किया है। इससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और कार्गो मूवमेंट पर खतरा मंडरा रहा है। सैन्य गतिविधियों और संभावित हमलों की चेतावनी ने बाजार में अस्थिरता बढ़ा दी है।

अमेरिका की प्रतिक्रिया

इस बीच अमेरिका के US प्रेसिडेंट Donald Trump के बयान दिया कि अमेरिकी नौसेना तेल टैंकरों को एस्कॉर्ट करने के लिए तैयार है। यह बयान इस बात का संकेत है कि वॉशिंगटन नेविगेशन की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए सक्रिय भूमिका निभा सकता है।

हालांकि, क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों से तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है।

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भारत की रणनीति क्या?

होर्मुज संकट के बीच भारतीय रिफाइनर वैकल्पिक स्रोतों की तलाश में जुटे हैं। रूस से बढ़ी आपूर्ति भारत के लिए राहत का संकेत है, क्योंकि यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस भारतीय बाजार में छूट के साथ तेल उपलब्ध कराता रहा है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपनी ‘डायवर्सिफिकेशन’ रणनीति को आगे बढ़ाते हुए कई देशों से आयात संतुलित करेगा, ताकि किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता कम हो।

क्या तेल की कीमतें बढ़ेंगी?

यदि होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ता है और आपूर्ति बाधित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी संभव है। इसका असर भारत जैसे आयातक देशों की महंगाई और चालू खाता घाटे पर पड़ सकता है।

हालांकि, रूस की अतिरिक्त आपूर्ति की पेशकश से फिलहाल बाजार को कुछ राहत मिल सकती है।

मिडिल ईस्ट के बढ़ते तनाव के बीच रूस का भारत को अतिरिक्त तेल देने का ऐलान ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से सकारात्मक संकेत है। हालांकि हालात तेजी से बदल रहे हैं, ऐसे में भारत को सतर्क रणनीति के साथ आगे बढ़ना होगा।

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