Gram Panchayat Development: ग्राम संसद में राज्यपाल का संदेश | सरपंच बनें गांव विकास के भागीरथ, सुनियोजित योजना से बदलेगा राजस्थान

Gram Panchayat Development: जयपुर, 23 फरवरी। जयपुर में आयोजित “ग्राम संसद” कार्यक्रम में हरिभाऊ बागडे ने सरपंचों को गांव विकास की धुरी बताते हुए उन्हें भारत विकास का संवाहक बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सरपंच केवल गांव के सुख-दुख के सहभागी न रहें, बल्कि विकास के सच्चे भागीरथ बनकर योजनाबद्ध तरीके से गांवों को आगे बढ़ाएं।

सुनियोजित योजना से ही होगा गांवों का समग्र विकास

राज्यपाल ने कहा कि गांवों का विकास तभी संभव है जब योजनाएं स्पष्ट दृष्टि और दीर्घकालिक सोच के साथ बनाई जाएं। ग्राम पंचायतों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में जरूरतमंद, वंचित और पिछड़े वर्ग तक पहुंचे।

उन्होंने जल, विद्युत और आधारभूत सुविधाओं की सर्वसुलभता को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। राज्यपाल ने कहा कि गांवों में सड़क, आवास और पेयजल जैसी सुविधाएं विकास की बुनियाद हैं।

प्राथमिक शिक्षा पर विशेष जोर

राज्यपाल बागडे ने विद्यालयों की स्थिति और बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्राथमिक शिक्षा बच्चों की बौद्धिक क्षमता निर्माण की नींव है। यदि इस स्तर पर मजबूत आधार तैयार किया जाए तो बच्चे आगे चलकर सिविल सेवाओं और उच्च पदों की परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

उन्होंने सरपंचों से कहा कि वे विद्यालय भवनों की स्थिति पर निगरानी रखें, शिक्षण व्यवस्था को प्रभावी बनाएं और बच्चों में आत्मविश्वास का संचार करें।

राजस्थान की पंचायत परंपरा का गौरव

ग्राम संसद में राज्यपाल का आह्वान: सरपंच बनें गांव विकास के सच्चे भागीरथ

राज्यपाल ने कहा कि राजस्थान को इस बात का गौरव है कि देश में सबसे पहले पंचायत राज व्यवस्था नागौर जिले के एक गांव से प्रारंभ हुई थी।

उन्होंने पंचायतीराज व्यवस्था को ग्राम लोकतंत्र की मजबूत कड़ी बताते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत के कार्यकाल में गांव विकास की कई महत्वपूर्ण योजनाओं की शुरुआत हुई थी, जिनसे ग्रामीण ढांचे को मजबूती मिली।

‘हर घर जल’ और आधारभूत ढांचे पर जोर

राज्यपाल ने कहा कि भारत सरकार की ‘हर घर जल’ योजना का उद्देश्य गांव के प्रत्येक घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है। सरपंचों को इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने मार्ग निर्माण, आवास योजनाओं और सार्वजनिक भवनों के रखरखाव में सक्रिय भूमिका निभाने की भी अपील की।

पर्यावरण संरक्षण की प्रेरक पहल

राज्यपाल ने पिपलांत्री पंचायत समिति का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां बेटियों के जन्म पर पेड़ लगाने की परंपरा प्रेरणादायक है। एक सरपंच द्वारा एक करोड़ पेड़ लगाकर उनका संरक्षण करना उल्लेखनीय उपलब्धि है।

उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक ग्राम पंचायत पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दे, तो ग्रामीण क्षेत्र हरित और समृद्ध बन सकते हैं।

देशभर में ग्राम पंचायतों की अहम भूमिका

राज्यपाल ने बताया कि देश में लगभग 2 लाख 55 हजार ग्राम पंचायतें हैं, जबकि राजस्थान में 11 हजार 266 ग्राम पंचायतें कार्यरत हैं। यदि ये सभी पंचायतें विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता बनाएं, तो भारत तीव्र गति से प्रगति कर सकता है।

उन्होंने सरपंचों से गांव के लोगों के प्रति श्रद्धा और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का आह्वान किया।

उत्कृष्ट कार्य करने वालों का सम्मान

कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने गांवों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विशिष्टजनों को सम्मानित भी किया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास अन्य पंचायतों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनते हैं।

“ग्राम संसद” कार्यक्रम में सरपंच संवाद के माध्यम से राज्यपाल ने स्पष्ट संदेश दिया कि ग्राम स्तर पर सशक्त नेतृत्व ही राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव रख सकता है।

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