सावधान! FASTag एनुअल पास के नाम पर बड़ा साइबर फ्रॉड, गूगल पर टॉप दिख रही वेबसाइट भी हो सकती है फर्जी

FASTag phishing scam: जयपुर, 12 फरवरी। अगर आप अपने वाहन के लिए NHAI FASTag का एनुअल पास बनवाने की योजना बना रहे हैं, तो बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। साइबर ठगों ने अब नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की आधिकारिक वेबसाइट की हूबहू नकल कर लोगों को ठगने का नया तरीका अपना लिया है। राजस्थान पुलिस के महानिदेशक (साइबर क्राइम) श्री संजय अग्रवाल ने इस संबंध में एडवाइजरी जारी कर आमजन को आगाह किया है।

गूगल सर्च में ‘Rank 1’ पर दिख रही फर्जी वेबसाइटें

डीजीपी साइबर क्राइम श्री अग्रवाल के अनुसार, साइबर अपराधी अब Google Ads और SEO तकनीक का इस्तेमाल कर अपनी फर्जी वेबसाइटों को गूगल सर्च के टॉप पर दिखा रहे हैं। आमतौर पर लोग गूगल पर आने वाले पहले लिंक को ही असली मान लेते हैं, जबकि ठग Sponsored टैग के साथ अपनी साइट को ऊपर दिखाने के लिए पैसे खर्च करते हैं।

इन फर्जी वेबसाइटों का डिजाइन, लोगो और लेआउट असली NHAI पोर्टल जैसा ही होता है, जिससे आम व्यक्ति के लिए असली और नकली में फर्क करना मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि लोग झांसे में आकर ऑनलाइन भुगतान कर बैठते हैं।

कैसे हो रही है ठगी?

एडवाइजरी के अनुसार, ये फर्जी वेबसाइटें FASTag एनुअल पास के नाम पर करीब 3000 रुपये का भुगतान मांगती हैं। भुगतान के लिए साइट पर एक QR कोड दिया जाता है। जैसे ही व्यक्ति इसे स्कैन करता है, रकम सरकारी खाते में जाने के बजाय साइबर अपराधियों के ‘म्यूल अकाउंट’ में ट्रांसफर हो जाती है।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सरकारी भुगतान कभी भी किसी व्यक्तिगत नाम पर नहीं मांगा जाता। यदि भुगतान करते समय प्राप्तकर्ता के नाम में किसी व्यक्ति का नाम दिखाई दे, तो तुरंत प्रक्रिया रोक दें।

असली और नकली वेबसाइट की पहचान कैसे करें?

साइबर क्राइम विंग ने लोगों को सुरक्षित रहने के लिए कुछ अहम सुझाव दिए हैं:

1. केवल आधिकारिक प्लेटफॉर्म का उपयोग करें
FASTag पास खरीदने या रिन्यू करने के लिए केवल Rajmarg Yatra आधिकारिक ऐप या अधिकृत बैंक पोर्टल का ही इस्तेमाल करें।

2. URL को ध्यान से जांचें
annualtollpass.com या annualtollpasss.com जैसे संदिग्ध लिंक से सावधान रहें। वेबसाइट के एड्रेस में स्पेलिंग की छोटी-सी गलती भी फर्जीवाड़े का संकेत हो सकती है।

3. प्राप्तकर्ता का नाम जांचें
अगर QR कोड स्कैन करने पर ‘सरिता देवी’ या किसी अन्य व्यक्ति का नाम दिखे, तो समझ जाएं कि यह ठगी है। सरकारी भुगतान हमेशा आधिकारिक संस्थान के नाम पर ही होता है।

4. बैंकिंग जानकारी साझा न करें
किसी भी संदिग्ध लिंक या कॉल के माध्यम से अपनी बैंकिंग डिटेल, OTP या कार्ड जानकारी साझा न करें।

ठगी होने पर तुरंत क्या करें?

अगर आप गलती से इस तरह के किसी स्कैम का शिकार हो जाते हैं, तो बिना समय गंवाए तुरंत शिकायत दर्ज कराएं। त्वरित कार्रवाई से आपकी रकम वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

  • राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर: 1930
  • राजस्थान पुलिस हेल्पडेस्क: 9256001930 या 9257510100
  • ऑनलाइन शिकायत पोर्टल: cybercrime.gov.in

पुलिस ने कहा है कि जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। किसी भी ऑनलाइन भुगतान से पहले वेबसाइट की प्रामाणिकता की पूरी जांच करें।

डिजिटल युग में सतर्कता जरूरी

डिजिटल इंडिया के दौर में जहां सुविधाएं बढ़ी हैं, वहीं साइबर अपराधियों के तरीके भी ज्यादा शातिर हो गए हैं। गूगल सर्च में सबसे ऊपर दिखने वाली वेबसाइट भी हमेशा असली हो, यह जरूरी नहीं। इसलिए केवल ‘Rank 1’ देखकर भरोसा न करें।

राजस्थान पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे इस एडवाइजरी को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं, ताकि कोई भी व्यक्ति FASTag एनुअल पास के नाम पर होने वाली इस ठगी का शिकार न बने।

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