वो आख़िरी 26 मिनट: एटीसी से टूटे संपर्क ने ली अजित पवार की जान
बारामती विमान हादसे की गहराई में जाएं। आखिरी 26 मिनट का पूरा टाइमलाइन, एटीसी से टूटा संपर्क, लो विजिबिलिटी की चुनौती और अनियंत्रित हवाई क्षेत्र की सच्चाई। जानिए कैसे त्रासदी ने अपना रूप लिया।
Ajit Pawar plane crash timeline: महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन से जुड़े विमान हादसे का आखिरी 26 मिनट का विस्तृत टाइमलाइन सामने आया है। सिविल एविएशन मंत्रालय के बयान से पता चलता है कि लैंडिंग की अनुमति मिलने के बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) से संपर्क टूटना घातक साबित हुआ।
टाइमलाइन: क्रैश के आखिरी 26 मिनट
08:18 AM: पहला संपर्क और पहली चुनौती
- विमान ने बारामती एयरपोर्ट से 30 नॉटिकल मील दूर एटीसी से संपर्क स्थापित किया।
- लो विजिबिलिटी (केवल 3,000 मीटर दृश्यता) की स्थिति में पायलट को स्वयं निर्णय की सलाह दी गई।
- पायलट ने पहले प्रयास में रनवे न दिखने की बात कही।
08:43 AM: रनवे दिखा, पर संपर्क टूटा
- चक्कर लगाने के बाद पायलट ने रनवे 11 दिखने की पुष्टि की।
- एटीसी ने तुरंत लैंडिंग की अनुमति दे दी।
- खतरनाक मोड़: अनुमति मिलने के बाद विमान ने कोई ‘रीड-बैक’ कन्फर्मेशन नहीं दिया।
08:44 AM: आग की लपटें और त्रासदी
- एटीसी ने रनवे 11 के किनारे आग की लपटें देखीं।
- इमरजेंसी सेवाएं अलर्ट हुईं, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
- विमान खाई में गिरकर आग के गोले में बदल गया।
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क्यों हुआ ऐसा? तीन बड़े कारण
1. अनियंत्रित हवाई क्षेत्र की सीमाएं
- बारामती एक ‘अनियंत्रित हवाई क्षेत्र’ (Uncontrolled Airspace) है।
- एयर ट्रैफिक जानकारी स्थानीय प्रशिक्षक पायलट देते हैं।
- वीआईपी उड़ानों और प्रशिक्षण के लिए प्राथमिक उपयोग।
2. विजिबिलिटी का संकट
- सुबह के समय कुहासे और सीमित दृश्यता।
- पायलट को दो बार चक्कर लगाने पड़े।
- मौसम संबंधी दृश्य स्थितियों में उतरने का जोखिम।
3. संचार की खाई
- सबसे गंभीर त्रुटि: लैंडिंग अनुमति का कन्फर्मेशन न मिलना।
- एटीसी और पायलट के बीच अंतिम क्षणों में संपर्क टूटना।
- रीयल-टाइम समन्वय की विफलता।
राष्ट्रीय शोक और जांच
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना को “राष्ट्र की अपूरणीय क्षति” बताया। सिविल एविएशन मंत्रालय ने विस्तृत जांच शुरू की है, जो तकनीकी खामियों, मौसम संबंधी चुनौतियों और प्रोटोकॉल पालन पर केंद्रित है।
इस त्रासदी ने भारतीय विमानन सुरक्षा प्रोटोकॉल, विशेषकर अनियंत्रित हवाई क्षेत्रों और खराब मौसम में वीआईपी उड़ानों के प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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