उत्तर प्रदेश

चूहों के बाद अब कुत्तों का आतंक! मरीजों के बीच बेड पर सोते दिखे आवारा कुत्ते, गोंडा जिला अस्पताल की बदहाली उजागर

Gonda Hospital Negligence: उत्तर प्रदेश के Gonda स्थित Gonda Medical College से जुड़े जिला अस्पताल की अव्यवस्थाएं थमने का नाम नहीं ले रहीं। कुछ दिन पहले ऑक्सीजन पाइप पर चूहों के दौड़ने का वीडियो सामने आया था और अब एक और चौंकाने वाला मामला सामने आ गया है। इस बार अस्पताल के वार्ड में मरीजों के बेड के बीच खाली पड़े बेड पर तीन कुत्ते आराम से लेटे नजर आ रहे हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

वायरल वीडियो ने खोली पोल (Gonda Hospital Negligence)

वायरल वीडियो किसी अज्ञात व्यक्ति ने बनाया बताया जा रहा है। वीडियो में साफ दिखता है कि वार्ड में मरीज भर्ती हैं और उनके ठीक पास खाली बेड पर आवारा कुत्ते चैन की नींद सो रहे हैं। वीडियो बनाने वाला स्थानीय बोली में अस्पताल प्रशासन पर नाराजगी जाहिर करता सुनाई देता है—
“ई कुकुर बिलार हमारे जिला अस्पताल के माहौल है… पेशेंट लोग लेटा है और कुकुर बिलार बेड पर पड़े हैं।”

हालांकि, Aaj Tak ने इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है, लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाएं अस्पताल की बदहाली को बयां करने के लिए काफी हैं।

चूहों के बाद कुत्ते, एक ही दिन की घटनाएं

सूत्रों के मुताबिक, कुत्तों वाला यह वीडियो उसी दिन का बताया जा रहा है, जिस दिन ऑक्सीजन पाइप पर चूहों के दौड़ने का वीडियो सामने आया था। यानी एक ही दिन में दो बड़े खुलासे—

  • जीवनरक्षक ऑक्सीजन लाइन पर चूहे
  • मरीजों के बीच अस्पताल के बेड पर कुत्ते

इन घटनाओं ने न सिर्फ अस्पताल प्रशासन बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है।

मरीजों की सुरक्षा पर खतरा

अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर आवारा जानवरों की मौजूदगी संक्रमण फैलने का बड़ा कारण बन सकती है। मरीज पहले से कमजोर इम्युनिटी के साथ भर्ती होते हैं और ऐसे हालात में उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अस्पताल परिसर में स्वच्छता और सुरक्षा में जरा-सी चूक भी बड़ी स्वास्थ्य आपदा बन सकती है।

जांच के बाद कर्मचारियों पर कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. धनंजय सिंह कोटास्थाने ने दोनों वायरल वीडियो का संज्ञान लिया और तत्काल जांच के आदेश दिए।
जांच पूरी होने के बाद—

  • ऑर्थो वार्ड की स्टाफ नर्स इंचार्ज
  • दो ड्यूटी नर्स
  • एक वार्ड बॉय

को सस्पेंड कर दिया गया है। प्रिंसिपल ने साफ कहा कि मरीजों की सुरक्षा और अस्पताल की व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

एजेंसियों को सख्त चेतावनी

डॉ. कोटास्थाने ने बताया कि अस्पताल से जुड़ी आउटसोर्स एजेंसियों को भी कड़ी चेतावनी दी गई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा सामने आई, तो संबंधित एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा।

नगर पालिका पर भी उठे सवाल

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि आवारा जानवरों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। इसके समाधान के लिए नगर पालिका को कई बार पत्र लिखे गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी वजह से कुत्ते और अन्य जानवर अस्पताल परिसर में बेरोकटोक घूमते रहते हैं।

पुरानी बिल्डिंग बनी बड़ी समस्या

प्रिंसिपल ने यह भी स्वीकार किया कि अस्पताल की पुरानी इमारत जर्जर हालत में है। दीवारों, खिड़कियों और दरवाजों की हालत खराब होने के कारण जानवरों का अंदर आना आसान हो जाता है। उन्होंने कहा कि बिल्डिंग के नवीनीकरण की सख्त जरूरत है।

15 दिन में नई बिल्डिंग में शिफ्टिंग का दावा

हालात को काबू में लाने के लिए अस्पताल प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। अगले 15 दिनों के भीतर सभी ओपीडी और कुछ वार्डों को नई बिल्डिंग में शिफ्ट किया जाएगा, ताकि मरीजों को सुरक्षित और बेहतर इलाज मिल सके।

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