एक क्लिक और खाली खाता! UPI फ्रॉड से 805 करोड़ की ठगी, संसद में चौंकाने वाला खुलासा
देश में डिजिटल पेमेंट जितना आसान हो गया है, उतना ही खतरनाक भी साबित हो रहा है। संसद में पेश किए गए ताजा आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि यूपीआई फ्रॉड अब एक गंभीर चुनौती बन चुका है। चालू वित्तीय वर्ष में नवंबर तक साइबर ठगों ने 805 करोड़ रुपये की ठगी कर ली है, जिसमें 10 लाख से ज्यादा लोग शिकार बने। सरकार का कहना है कि सिस्टम सुरक्षित है, लेकिन एक छोटी सी लापरवाही भारी नुकसान करा सकती है।
UPI fraud in India: स्मार्टफोन बना बटुआ, लेकिन खतरा भी बढ़ा
आज स्मार्टफोन सिर्फ कॉलिंग का साधन नहीं रहा, बल्कि पूरा बैंक बन चुका है। शॉपिंग, बिल पेमेंट, ट्रांसफर—सब कुछ UPI से हो रहा है। लेकिन यही सुविधा अब साइबर अपराधियों के लिए सबसे बड़ा हथियार बन गई है।
संसद में खुलासा: 805 करोड़ की ठगी
लोकसभा में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि
वित्तीय वर्ष 2025-26 में नवंबर तक UPI फ्रॉड से 805 करोड़ रुपये की ठगी हो चुकी है।
पिछले वर्षों के आंकड़े:
- 2023-24: ₹1,087 करोड़, 13.42 लाख केस
- 2024-25: ₹981 करोड़, 12.64 लाख केस
- 2025-26 (Nov तक): ₹805 करोड़
सरकार के अनुसार रकम में थोड़ी गिरावट आई है, लेकिन खतरा अब भी बना हुआ है।
ठगी क्यों नहीं रुक रही?
सरकार का कहना है कि UPI सिस्टम में कोई तकनीकी कमी नहीं है। असली वजह है
डिजिटल लेन-देन की बेतहाशा बढ़ती संख्या।
केवल नवंबर में:
- 20.47 अरब UPI ट्रांजैक्शन
- ₹26.32 लाख करोड़ की वैल्यू
इसी भीड़ में ठग फर्जी कॉल, मैसेज और लिंक से लोगों को फंसा लेते हैं।
सरकार का एक्शन प्लान
UPI यूजर्स की सुरक्षा के लिए सरकार और बैंकों ने कई कदम उठाए हैं:
✔ AI आधारित निगरानी – संदिग्ध ट्रांजैक्शन पर नजर
✔ ‘चक्षु’ पोर्टल – फर्जी कॉल/मैसेज की रिपोर्ट
✔ हेल्पलाइन 1930 – ठगी होते ही तुरंत कॉल करें
ध्यान रखें: कभी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और UPI PIN किसी को न बताएं।




