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दुनिया का पहला ऐतिहासिक और विवादित ट्रांसप्लांट! एक मरीज को मारा, दूसरे को दी जिंदगी — नैतिकता पर छिड़ी नई बहस

Canada MAiD Heart Transplant: मरीज की मौत के 7 मिनट बाद निकला दिल, दी दूसरे को जिंदगी | MAiD Heart Transplant Controversy

कनाडा में हुआ इतिहास का पहला विवादास्पद हार्ट ट्रांसप्लांट

Canada MAiD Heart Transplant: कनाडा ने चिकित्सा इतिहास में एक ऐसा अध्याय लिखा है जिसने पूरे विश्व को झकझोर दिया है। यहां पहली बार Medically Assisted Death (MAiD) यानी चिकित्सकीय सहायता से मृत्यु प्राप्त व्यक्ति का हृदय सफलतापूर्वक दूसरे मरीज में प्रत्यारोपित किया गया।

यह घटना न केवल चिकित्सा विज्ञान के लिए मील का पत्थर है, बल्कि नैतिकता, मानवाधिकार और अंगदान की पारदर्शिता पर गहरी बहस भी शुरू कर चुकी है।

कैसे हुआ यह ‘भयंकर’ ट्रांसप्लांट?

ओंटारियो प्रांत के 38 वर्षीय ALS (Amyotrophic Lateral Sclerosis) रोगी ने टोरंटो जनरल हॉस्पिटल में MAiD के तहत अपनी जीवन-लीला समाप्त करने का निर्णय लिया।
उनकी मृत्यु के सिर्फ सात मिनट बाद, उनका हृदय “पुनर्जीवित (Reanimated)” किया गया और एयरलिफ्ट करके अमेरिका के पिट्सबर्ग भेजा गया।

वहां यूनिवर्सिटी ऑफ पिट्सबर्ग मेडिकल सेंटर (UPMC) में इसे एक 50 वर्षीय गंभीर हृदय रोगी में प्रत्यारोपित किया गया — और ट्रांसप्लांट पूरी तरह सफल रहा।

कनाडा बना MAiD के बाद अंगदान करने वाला अग्रणी देश

रिपोर्ट के अनुसार,

  • अब तक हुए वैश्विक ODE (Organ Donation after Euthanasia) मामलों में से लगभग 47% कनाडा में हुए।
  • 2024 में देश में हुए कुल अंगदानों में से 5% अंग MAiD मरीजों से लिए गए।
  • वर्ष 2023 में 13,000 से अधिक लोगों ने MAiD के तहत जीवन समाप्त किया।

कनाडा अब वह देश बन गया है जहां मृत्यु और अंगदान के बीच एक नई, विवादास्पद कड़ी स्थापित हो चुकी है।

विशेषज्ञों ने जताई चिंता — “मानवाधिकारों पर खतरा”

विशेषज्ञों और नैतिक दार्शनिकों का कहना है कि इस प्रक्रिया से मानवाधिकारों और चिकित्सा नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

“ऐसे मरीज जो खुद को समाज पर बोझ समझते हैं, वे अंगदान के बहाने मृत्यु को चुनने के लिए प्रेरित हो सकते हैं।”

कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि MAiD और अंगदान को जोड़ने से कमजोर और मानसिक रूप से अस्थिर लोगों पर अप्रत्यक्ष दबाव बन सकता है।

“कनाडा अब ऐसी स्थिति में है जहां किसी की मृत्यु को दूसरों के जीवन के लिए ‘साधन’ बनाया जा रहा है,” – नैतिक विशेषज्ञों का मत।

सोशल मीडिया पर गरम बहस

इस मामले ने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी है।
कुछ लोग इसे “मानवता की सेवा का साहसिक कदम” बता रहे हैं, जबकि कई इसे “मौत का व्यावसायिकरण” कह रहे हैं।

Jason Gregor ने लिखा —

“जब तक आप उस पीड़ा से नहीं गुजरे, आप नहीं समझ सकते। MAiD एक इंसान के लिए गरिमा से मृत्यु पाने का रास्ता है।”

वहीं Tybernicus ने सवाल उठाया —

“क्या उस समय कनाडा में किसी को दिल की जरूरत नहीं थी? या यह दिल सबसे ऊंची बोली लगाने वाले को बेचा गया?”

नैतिकता बनाम विज्ञान — क्या मौत अब ‘उपयोगी’ बना दी गई है?

कनाडा की यह चिकित्सा उपलब्धि अब एक गंभीर नैतिक संकट का प्रतीक बन गई है।

सवाल उठ रहे हैं —

  • क्या अंगदान के नाम पर मौत को “उपयोगी साधन” बना देना सही है?
  • क्या आर्थिक या सामाजिक दबाव में मरीज “स्वेच्छा से मृत्यु” चुन रहे हैं?
  • क्या यह मानवाधिकारों की भावना के खिलाफ नहीं है?

निष्कर्ष — चिकित्सा की जीत या नैतिकता की हार?

कनाडा का यह ट्रांसप्लांट विज्ञान की सीमा को आगे बढ़ाने वाला चमत्कार भी है और मानवता की चेतना को झकझोर देने वाला प्रश्न भी।

यह घटना अब केवल चिकित्सा तक सीमित नहीं रही —
यह सवाल बन चुकी है कि “क्या जीवन देने के नाम पर मौत को वैध बना देना सही है?”

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