UGC को खत्म करने वाला बिल कहां अटका? जानिए ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान’ विधेयक का पूरा स्टेटस
शीतकालीन सत्र में पेश VBSA विधेयक संयुक्त संसदीय समिति के पास लंबित, UGC समानता नियम 2026 विवाद के बीच बढ़ी हलचल
VBSA Bill Status: उच्च शिक्षा नियामक ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी के बीच केंद्र सरकार द्वारा लाया गया ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान’ (VBSA) विधेयक फिलहाल संसद की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास समीक्षा के लिए लंबित है। इसी के साथ University Grants Commission (UGC) को समाप्त कर एक नए शीर्ष आयोग के गठन का प्रस्ताव चर्चा में है।
UGC समानता नियम 2026 को लेकर देशभर में चल रही बहस और सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद इस विधेयक की स्थिति को लेकर लोगों में जिज्ञासा बढ़ गई है।
क्या है विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल?
केंद्र सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र 2025 में ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान’ विधेयक पेश किया था। इस प्रस्तावित कानून के तहत UGC, All India Council for Technical Education (AICTE) और National Council of Educational Research and Training (NCERT) जैसे संस्थानों की जगह एक एकीकृत शीर्ष कानूनी आयोग बनाने का प्रावधान है।
इस नए आयोग के अधीन तीन अलग-अलग परिषदें होंगी, जो उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और पाठ्यक्रम से जुड़े मामलों में नीति निर्धारण और समन्वय का कार्य करेंगी। सरकार का तर्क है कि इससे नियामक ढांचे में एकरूपता आएगी और निर्णय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी व प्रभावी होगी।
संसद में कहां फंसा है विधेयक?
विधेयक को लोकसभा में पेश किए जाने के बाद विपक्षी दलों ने कई आपत्तियां उठाईं। उनका कहना था कि इतने बड़े संस्थागत बदलाव पर व्यापक चर्चा और विशेषज्ञ परामर्श जरूरी है।
इन चिंताओं के बाद सरकार ने विधेयक को संसद की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेज दिया। फिलहाल यही इसकी मौजूदा स्थिति है—बिल पर अंतिम निर्णय से पहले JPC इसकी विस्तृत समीक्षा करेगी और अपनी रिपोर्ट संसद को सौंपेगी।
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JPC की अध्यक्षता कौन कर रहा है?
विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल की समीक्षा के लिए गठित JPC की अध्यक्षता भाजपा सांसद D. Purandeswari कर रही हैं। समिति में कुल 31 सदस्य शामिल हैं, जो लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों से हैं।
समिति के प्रमुख सदस्यों में Digvijaya Singh, Sagarika Ghose, Sasmit Patra, Sanjay Kumar Jha, Ram Gopal Yadav, Tejasvi Surya, Anurag Singh Thakur, Varsha Eknath Gaikwad, Sougata Ray और T. R. Baalu शामिल हैं।
JPC क्या करेगी?
JPC का दायित्व है कि वह विधेयक के सभी प्रावधानों की गहन जांच करे। समिति राज्य सरकारों, विश्वविद्यालयों, शिक्षाविदों और अन्य हितधारकों से सुझाव मांग सकती है।
समिति की रिपोर्ट के आधार पर बिल में संशोधन संभव है। अभी तक JPC ने अपनी औपचारिक कार्यवाही शुरू नहीं की है, लेकिन उम्मीद है कि आने वाले सत्रों में इस पर चर्चा आगे बढ़ेगी।
UGC समानता नियम 2026 पर क्या स्थिति है?
UGC समानता नियम 2026 को लेकर विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर अस्थायी रोक लगा दी थी और सुधार के लिए नई समिति गठित करने के निर्देश दिए थे। तब तक UGC समानता नियम 2012 को लागू रखने का आदेश दिया गया है।
हालांकि, देश के कई हिस्सों में नए नियमों के समर्थन और विरोध में प्रदर्शन जारी हैं। संसद के बजट सत्र के दौरान भी इस मुद्दे पर राजनीतिक गर्माहट देखने को मिली।
आगे क्या?
जब तक JPC अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपती और संसद में उस पर बहस नहीं होती, तब तक विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल कानून नहीं बन सकता।
यदि बिल पारित होता है, तो भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था में यह सबसे बड़ा संस्थागत बदलाव होगा। फिलहाल सभी की नजरें JPC की सिफारिशों और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।
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