क्या इस बार सुलझेगा SYL विवाद? 9 जुलाई को दिल्ली में आमने-सामने होंगे पंजाब-हरियाणा!

SYL Canal Dispute : 9 जुलाई को आमने-सामने होंगे पंजाब-हरियाणा, दिल्ली में होगी चौथी दौर की बैठक

नई दिल्ली – लंबे समय से चले आ रहे सतलुज-यमुना लिंक SYL Canal Dispute पर एक बार फिर पंजाब और हरियाणा आमने-सामने होंगे। 9 जुलाई को दिल्ली में केंद्र सरकार की मध्यस्थता में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखेंगे। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल करेंगे।

यह बैठक इसलिए भी बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि 13 अगस्त को इस मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई निर्धारित है। केंद्र सरकार इससे पहले दोनों राज्यों के बीच सहमति बनाने की कोशिश में जुटी है।

क्या है एसवाईएल नहर का विवाद (SYL Canal Dispute)?

एसवाईएल नहर की योजना 31 दिसंबर 1981 के एक समझौते के तहत बनी थी और 1982 में इसका निर्माण शुरू हुआ था। नहर की कुल लंबाई 214 किलोमीटर है, जिसमें से हरियाणा में 92 किलोमीटर का निर्माण हो चुका है, जबकि पंजाब में 122 किलोमीटर हिस्से का काम ठप पड़ा है।

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान स्पष्ट कर चुके हैं कि राज्य के पास अतिरिक्त पानी नहीं है, जिसे किसी अन्य राज्य को दिया जा सके। उन्होंने कहा कि पंजाब का भूजल स्तर खतरनाक रूप से नीचे जा चुका है – राज्य के 153 में से 115 ब्लॉक डार्क ज़ोन में आ चुके हैं।

वहीं, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार पंजाब को नहर निर्माण पूरा करना चाहिए।

बैठक से पहले की पृष्ठभूमि

इस मुद्दे पर पहले भी तीन बैठकें हो चुकी हैं:

  • पहली बैठक: 18 अगस्त 2020 – चंडीगढ़
  • दूसरी बैठक: 14 अक्टूबर 2022 – चंडीगढ़
  • तीसरी बैठक: 4 जनवरी 2023 – दिल्ली

इन बैठकों में कोई ठोस हल नहीं निकल पाया था।

सुप्रीम कोर्ट ने मई 2024 में केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह पंजाब और हरियाणा के सहयोग से इस विवाद का समाधान निकाले।

पंजाब की स्थिति और यमुना जल पर दावा

मुख्यमंत्री भगवंत मान का कहना है कि पंजाब को भी यमुना का पानी मिलना चाहिए, जो अभी यूपी और हरियाणा से होते हुए पश्चिम बंगाल तक जा रहा है। वह नीति आयोग की बैठक में भी इस मांग को उठा चुके हैं।

पंजाब सरकार ने 2004 में जल समझौते रद्द कर दिए थे और 2016 में अकाली-भाजपा सरकार ने नहर के लिए अधिग्रहित ज़मीन को डिनोटिफाई कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने उस कानून को असंवैधानिक करार देते हुए 30 नवंबर 2016 को स्टेटस-को बनाए रखने का आदेश दिया था।

निष्कर्ष

9 जुलाई को होने वाली बैठक एसवाईएल नहर विवाद के समाधान की दिशा में एक और प्रयास है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले इस बैठक में क्या सहमति बनती है, यह आने वाले समय में पंजाब और हरियाणा दोनों के लिए अहम साबित होगा।

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