‘Not Me, But You’ की गूंज: संस्कारम विश्वविद्यालय में NSS ओथ सेरेमनी, युवाओं ने लिया राष्ट्र सेवा का संकल्प
संस्कारम विश्वविद्यालय परिसर में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) से जुड़े विद्यार्थियों के लिए ओथ सेरेमनी का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को उनकी सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना था।
NSS Oath Ceremony: संस्कारम विश्वविद्यालय परिसर में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) से जुड़े विद्यार्थियों के लिए ओथ सेरेमनी का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को उनकी सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम के दौरान सेवा भावना, अनुशासन, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया गया। विश्वविद्यालय परिसर देशभक्ति और सामाजिक चेतना के संदेशों से गूंज उठा।
NSS का उद्देश्य और ‘Not Me, But You’ का संदेश
ओथ सेरेमनी के दौरान विद्यार्थियों को राष्ट्रीय सेवा योजना के उद्देश्यों से अवगत कराया गया। NSS का मूल मंत्र “Not Me, But You” स्वयं से पहले समाज को प्राथमिकता देने की प्रेरणा देता है।
कार्यक्रम में बताया गया कि NSS केवल एक शैक्षणिक गतिविधि नहीं, बल्कि एक जीवन मूल्य है, जो युवाओं को जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में मार्गदर्शन देता है। स्वयंसेवकों को समझाया गया कि सेवा के माध्यम से ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।
साइबर अपराध पर जागरूकता नाटक
कार्यक्रम की विशेष आकर्षण विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत एक प्रभावशाली नाटक रहा, जिसमें सोशल नेटवर्किंग के माध्यम से बढ़ते साइबर अपराधों पर जन-जागरूकता का संदेश दिया गया।
डिजिटल युग में बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड, डेटा चोरी और साइबर ठगी जैसे अपराधों के प्रति सजग रहने का संदेश नाटक के माध्यम से दिया गया। उपस्थित जनसमूह ने इस प्रस्तुति की सराहना की और इसे समय की जरूरत बताया।

चांसलर डॉ. महिपाल का प्रेरक संबोधन
विश्वविद्यालय के चांसलर Dr. Mahipal ने अपने संबोधन में कहा कि NSS विद्यार्थियों को केवल समाज सेवा का अवसर नहीं देता, बल्कि उन्हें संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा भी देता है।
उन्होंने युवाओं से समाज के कमजोर वर्गों की सहायता करने, पर्यावरण संरक्षण में भाग लेने और डिजिटल युग में सजग नागरिक की भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण में युवा शक्ति की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
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वाइस चांसलर डॉ. गुरुदयाल का संदेश
विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर Dr. Gurudayal ने कहा कि देश के विकास में युवाओं की भागीदारी अनिवार्य है।
उन्होंने कहा कि NSS जैसी गतिविधियाँ विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और सामाजिक चेतना का विकास करती हैं। युवाओं को सामाजिक सरोकारों से जोड़कर ही एक मजबूत और जागरूक समाज का निर्माण संभव है।
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सेवा, सहयोग और समर्पण का मंत्र
NSS कार्यक्रम अधिकारी Prof. Subhash Gupta ने स्वयंसेवकों को सेवा, सहयोग और समर्पण की भावना को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि NSS केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक सकारात्मक सोच है। यह युवाओं को समाज में बदलाव लाने की शक्ति प्रदान करता है। यदि युवा संगठित होकर कार्य करें, तो सामाजिक चुनौतियों का समाधान संभव है।
शिक्षकों और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, विद्यार्थी और अन्य सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने राष्ट्र सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन किया।
ओथ सेरेमनी के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह प्रण लिया कि वे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझेंगे और हर परिस्थिति में सेवा की भावना को सर्वोपरि रखेंगे।
युवाओं के माध्यम से राष्ट्र निर्माण
आज के दौर में जब समाज अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे में NSS जैसे मंच युवाओं को सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं। संस्कारम विश्वविद्यालय का यह आयोजन न केवल विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में सहायक सिद्ध होगा, बल्कि समाज में जागरूकता और सहयोग की भावना को भी मजबूत करेगा।
इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि जब युवा ‘मैं’ से ऊपर उठकर ‘हम’ की सोच अपनाते हैं, तभी सच्चे अर्थों में राष्ट्र निर्माण संभव होता है।




