10 मिनट डिलीवरी का जुल्म!’—राघव चड्ढा ने सदन में खोला बड़ा मुद्दा, Blinkit-Zomato-Swiggy के गिग वर्कर्स के ‘3 दर्द’ उजागर
Raghav Chadha on gig workers: ‘10 मिनट डिलीवरी का जुल्म’—संसद में गूंजा गिग वर्कर्स का दर्द
Raghav Chadha on gig workers: राज्यसभा में शुक्रवार, 5 दिसंबर को AAP सांसद राघव चड्ढा ने देश के गिग वर्कर्स—Blinkit-Zepto, Zomato-Swiggy डिलीवरी बॉयज़ से लेकर Ola-Uber ड्राइवरों और Urban Company तकनीशियनों—की गंभीर समस्याएं उठाईं। उन्होंने कहा कि गिग वर्कर्स की हालत आज “दिहाड़ी मजदूरों से भी बदतर” हो चुकी है।
उन्होंने नए लेबर कोड के तहत पीएफ, ESIC, इंश्योरेंस और पेंशन जैसे लाभ मिलने की बात का स्वागत करते हुए गिग वर्कर्स को “भारतीय अर्थव्यवस्था के अदृश्य पहिये” (Invisible Wheels of Indian Economy) कहा।
“नोटिफिकेशन के पीछे एक इंसान होता है”—राघव चड्ढा की मार्मिक अपील
चड्ढा ने कहा:
“हम ऐप पर बटन दबाते हैं और नोटिफिकेशन आता है—Your Order is Arriving. लेकिन इसके पीछे एक इंसान है, जिसकी तकलीफें हम नहीं देखते।”
उन्होंने आरोप लगाया कि क्विक कॉमर्स कंपनियां यूनिकॉर्न बन गईं, लेकिन डिलीवरी पार्टनर्स की ज़िंदगी जोखिम में डालकर।
राघव चड्ढा ने सदन में गिनाए गिग वर्कर्स के 3 बड़े दर्द
1️⃣ स्पीड और डिलीवरी टाइम का जुल्म
10-मिनट डिलीवरी ट्रेंड ने सबसे ज्यादा दबाव बनाया है। डिलीवरी बॉय को डर रहता है कि अगर समय से थोड़ा भी लेट हुआ तो:
- रेटिंग गिर जाएगी
- इंसेंटिव कट जाएगा
- ऐप लॉगआउट कर देगी
- आईडी ब्लॉक हो जाएगी
इस डर में वे ओवरस्पीडिंग, रेड लाइट जंप और अपनी जान जोखिम में डालते हैं।
2️⃣ ग्राहक का गुस्सा और डर
5–7 मिनट की देरी पर ही:
- ग्राहक फ़ोन कर डांटता है
- धमकाता है कि शिकायत कर दूँगा
- 1-स्टार रेटिंग देकर पूरे महीने की कमाई बिगाड़ देता है
यह मानसिक उत्पीड़न लगातार बढ़ रहा है।
3️⃣ खतरनाक वर्किंग कंडीशन
गिग वर्कर्स रोज़ाना:
- 12–14 घंटे काम
- तेज़ गर्मी, ठंड, फॉग, बारिश
- भारी ट्रैफिक और प्रदूषण
- बिना प्रोटेक्शन, बिना अलाउंस, बिना बोनस
किन्तु न तो इन्हें परमानेंट जॉब स्टेटस मिलता है, न हेल्थ इंश्योरेंस और न ही सुरक्षा।
“ये रोबोट नहीं, इंसान हैं”—चड्ढा की सरकार को सलाह
चड्ढा ने जोर देकर कहा:
“ये रोबोट नहीं हैं। किसी के पिता, बेटे, भाई हैं। इनके हक की बात करनी ही होगी।”
उन्होंने 10-मिनट डिलीवरी मॉडल को ‘जुल्म’ करार देते हुए इसे खत्म करने की मांग रखी।




